कोविड इंफेक्शन के बाद इतने साल तक रहता है दिल को खतरा! जानें कैसे रख सकते हैं आप अपने दिल को सेफ

जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि हार्ट फेल्योर और मृत्यु सहित ह्रदय रोग उन लोगों में 4 फीसदी अधिक पाए गए, जो कोविड-19 से संक्रमित हुए थे।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : February 10, 2022 10:26 AM IST

वे लोग, जिन्हें कोविड हुआ है या हुआ था उन्हें इंफेक्शन होने के एक महीने से लेकर एक साल के भीतर ह्रदय संबंधी समस्याएं होने का खतरा बढ़ा हुआ होता है। एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि कोविड-19 उन लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा देता है, जो पहले से ही ह्रदय समस्याओं का शिकार होते हैं। लेकिन हैरानी की बात ये है कि जिन लोगों को दिल से जुड़ी कोई समस्या नहीं थी उनमें भी कोविड के बाद ह्रदय संबंधी समस्याओं का जोखिम पाया गया। आइए जानते हैं और क्या कहता है अध्ययन।

हर किसी को खतरा, किसी को कम किसी को ज्यादा

जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि हार्ट फेल्योर और मृत्युसहित ह्रदय रोग उन लोगों में 4 फीसदी अधिक पाए गए, जो कोविड-19 से संक्रमित हुए थे जबकि इंफेक्शन का शिकान न हुए लोगों में ये खतरा थोड़ा कम था।

किस रोग का कितना खतरा

अध्ययन के मुताबिक, जब बिना इंफेक्शन वाले समूह से इंफेक्शन वाले समूह की तुलना की गई कि तो ये पाया गया कि कोविड-19 के संपर्क में आने वाले लोगों को 72 फीसदी कोरोनरी आर्टरी रोग, 63 फीसदी हार्ट अटैक और 52 फीसदी स्ट्रोक का खतरा था।

कुलमिलाकर कहा जाए तो वायरस से संक्रमित हुए लोगों में कोविड से बचने वाले लोगों की तुलना में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और मुत्यु सहित बड़ी ह्रदय संबंधी घटनाओं का शिकार होने का खतरा 55 फीसदी ज्यादा था।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

सेंट लुईस स्थित वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के एसिस्टेंट प्रोफेसर जियाद अल-अली का कहना है कि कोविड-19 गंभीर ह्रदय जटिलताओं और मृत्यु का कारण बन सकता है। किसी का भी दिल एक बार हार्ट अटैक या फिर किसी भी नुकसान के बाद उतनी तेजी से ठीक नहीं होता है। यही वजह है कि ये बीमारी पूरी जिंदगी लोगों को प्रभावित करती है।

महामारी की शुरुआत के बाद से दुनियाभर में 38 करोड़ से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं।

1.5 करोड़ से ज्यादा लोग हुए शिकार

अली का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण लगातार बढ़ रहा है और इसकी वजह से अब तक दुनियाभर में 1.5 करोड़ से ज्यादा नए मामले ह्रदय रोग के सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि ये जानकारी बहुत ही जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो इस इंफेक्शन का शिकार हुए हैं। इसलिए ये जरूरी है कि कोविड के बाद रिकवर होने के दौरान अपने ह्रदय स्वास्थ्य को भी एक जरूरी हिस्सा माना जाए।

शोधकर्ताओं ने एक डेटा तैयार किया है, जिसमें डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी है। ये लोग एक मार्च 2020 से लेकर 15 जनवरी 2021 के बीच कभी न कभी कोविड पॉजिटिव हुए थे और बीमार होने के पहले 30 दिन बीमारी से लड़े थे।

वैक्सीन से खतरा हो सकता है कम

अली कहते हैं कि अध्ययन के निष्कर्ष कोविड-19 से सुरक्षा के लिए वैक्सीन लगाने की जरूरत पर जोर देते हैं, जो कि ह्रदय को होने वाले नुकसान से बचाने का एक तरीका हो सकता है।

उन्होंने ये भी कहा कि दुनियाभर की सरकारों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को कोविड-19 महामारी से ह्रदय रोगों पर पड़ने वाले दबाव की इस चुनौती से निपटने के लिए तैयार हो जाना चाहिए, जो कि दिखाई भी दे रहा है।