
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : April 27, 2026 7:56 PM IST
Medically Verified By: Dr Jayanti Tiwari
गर्दन में दर्द होना वैसे तो सामान्य थकान और गर्दन का ज्यादा इस्तेमाल करने का कारण माना जाता है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता है और यह कई बार किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है। सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस इनमें से गर्दन में दर्द का कारण बनने वाली प्रमुख समस्याओं में से एक है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में सर्वाइकल या गर्दन का सर्वाइकल भी कहा जाता है। लेकिन यह सिर्फ गर्दन में दर्द की समस्या नहीं है, बल्कि सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस ऐसी समस्या है जिसका जल्द से जल्द इलाज होना जरूरी है। ऐसा इसलिए क्यों
कि अगर लंबे समय से सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस को सिर्फ गर्दन का दर्द समझ कर इग्नोर किया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है और प्रभावित नस में परमानेंट डैमेज हो सकता है। नोएडा की जानी-मानी फिजियोथेरेपिस्ट और न्यूरोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. जयंती तिवारी ने इस बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
डॉ. जयंती तिवारी ने बताया कि सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस को नेक ओस्टियोआर्थराइटिस (Neck Osteoarthritis) भी कहा जाता है। यह आमतौर पर उम्र होने के बाद होता है, जिसमें गर्दन के हिस्से में मौजूद रीढ़ की हड्डियां कमजोर पड़ने लगती हैं। सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में आमतौर पर गर्दन में मौजूद रीढ़ की हड्डी की डिस्क कमजोर डिजनरेट होने लगती है, हड्डी बढ़ने लगती है या फिर हड्डी में अन्य कोई असामान्य बदलाव होने लगता है। हड्डियों में असामान्य बदलाव के कारण उनके बीच से निकल रही नसें प्रभावित होने लगती हैं और जिस हिस्से की वे नसे होती हैं, उस हिस्से में दर्द, कमजोरी और सुन्न होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
डॉ. जयंती तिवारी के अनुसार सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस को क्रोनिक डिजनरेटिव डिजीज है यानी यह लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है और इसका अभी तक कोई परमानेंट इलाज भी नहीं मिलता है। यही कारण है कि सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लिए दवाओं की तुलना में फिजियोथेरेपी ज्यादा महत्वपूर्ण मानी गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दवाएं महत्वपूर्ण ही नहीं है।
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लेकिन फिजियोथेरेपी को सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रीटमें इसलिए माना गया है, क्योंकि यह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लक्षण को कंट्रोल करने में मदद करता है जैसे गर्दन में दर्द, प्रभावित अंग का सुन्ना होना, सिरदर्द, प्रभावित अंग की कमजोरी दूर करना आदि।
फिजियोथेरेपी सिर्फ दर्द व अन्य लक्षणों को ही कम करने में मदद नहीं करता है, बल्कि बॉडी पोस्चर में सुधार करने में भी मदद करता है ताकि इसके लक्षणों को बार-बार होने से रोका सके। साथ ही इससे गर्दन के प्रभावित हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाता है ताकि हड्डियां मजबूत हो सके और स्थिति को और ज्यादा गंभीर होने से रोका जा सके।
(और पढ़ें - शरीर के एक हिस्से में होने वाला दर्द कहीं गर्दन का सर्वाइकल तो नहीं?)
दरअसल, दोनों का अपना-अपना अलग काम है और इसलिए यह तो कहना उचित नहीं होगा कि कौन सी बेहतर है। लेकिन यह कहा जा सकता है, जि सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस जैसी समस्याओं का इलाज करने के लिए यह बेहद प्रभावी और महत्वपूर्ण है। वहीं जरूरी सप्लीमेंट्स और पेन किलर आदि भी सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के उद्देशय से लिखा गया है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस या किसी अन्य बीमारी के इलाज में नहीं किया जाना चाहिए। अगर आपको गर्दन में दर्द या स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य कोई समस्या महसूस होती है, तो डॉक्टर से इस बारे में संपर्क करें।
फिजियोथेरेपी एक खास चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसकी मदद से जोड़ों, हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं का इलाज खास एक्सरसाइज और मालिश के जरिए किया जाता है।
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का अगर इलाज न किया जाए या इससे रीढ़ की हड्डी या नसों पर दबाव पड़ता रहे, तो यह गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से पीड़ित लोगों के लिए, कायरोप्रैक्टिक उपचार गर्दन के दर्द और अकड़न के आधार पर किया जाता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर छपी रिसर्च बताती है कि सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के मरीजों का कायरोप्रैक्टर लक्षणों को कम करने के लिए आपकी रीढ़ की हड्डी को हिला सकते हैं या मालिश कर सकते हैं।