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Risk of infection in Monsoon: बारिश के मौसम में वायरल बुखार और दूसरे मौसमी संक्रमण बढ़ जाते हैं। कई लोग लंबे बुखार को मामूली समझकर इलाज नहीं कराते, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। खासकर बच्चों में, जहां बुखार ही एकमात्र लक्षण होता है, जांच जरूरी है। कोलकाता स्थित अपोलो डायग्नोस्टिक झोनल टेक्निकल चीफ ईस्ट इंडिया डॉ. अभिक बनर्जी ने कहा कि, “वायरल बुखार विभिन्न वायरस के कारण होता है, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इनमें डेंगू, इन्फ्लुएंजा, चिकनगुनिया और वायरल गैस्ट्रोएन्टेराइटिस शामिल हैं, जो मानसून में ज्यादा फैलते हैं। गंदे पानी का जमा होना, मच्छरों का बढ़ना, और दूषित भोजन व पानी पीने से इन मामलों में वृद्धि होती है। इसके लक्षणों में शरीर दर्द, थकान, गले में खराश, खांसी, त्वचा पर चकत्ते और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वायरल बुखार के साथ ही टाइफाइड और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बैक्टीरियल इंफेक्शन भी मानसून में ज्यादा देखी जाती हैं, खासकर बाढ़ या जलजमाव वाले इलाकों में। इलाज में आराम करना, पानी ज्यादा पीना और बुखार कम करने की दवाइयां शामिल हैं। गंभीर मामलों में एंटीवायरल या अन्य सपोर्टिव केयर की जरूरत पड़ सकती है। रोकथाम के लिए स्वच्छता बनाए रखना, मच्छर भगाने के उपाय करना, साफ पानी पीना और बाहर का खाना अवॉइड करना जरूरी है।”
डॉ. बनर्जी ने आगे कहा कि, “पीयूओ (Pyrexia of Unknown Origin) तब कहा जाता है जब बुखार तीन हफ्तों से ज्यादा बना रहता है। बच्चों में यह और भी चिंता का विषय है क्योंकि वे स्पष्ट लक्षण नहीं बता पाते और चुपचाप तकलीफ सहते रहते हैं। इसके कारण वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण से लेकर ऑटोइम्यून रोग और छिपे हुए कैंसर तक हो सकते हैं। माता-पिता को बच्चों में सुस्ती, भूख में कमी, वजन कम होना या बीच-बीच में बुखार आने जैसे लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और अगर बुखार 7-10 दिनों से ज्यादा चले तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। पीयूओ के मामलों में ब्लड कल्चर, इमेजिंग और एडवांस लैब टेस्ट्स से कारण जानकर तुरंत इलाज शुरू करना जरूरी है। पीयूओ का पता लगाने के लिए खून की जांच, स्कैन और दूसरी जांचें जरूरी होती हैं। समय पर जांच और इलाज से मरीज जल्दी ठीक होते हैं।”
“मल्टीप्लेक्स पीसीआर पैनल, इंफ्लेमेटरी मार्कर्स, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई, और इम्यूनोलॉजिकल टेस्ट्स से बुखार के पीछे का कारण पता किया जा सकता है। पीयूओ के इलाज में एंटीबायोटिक्स, एंटीवायरल और कभी-कभी इम्यूनो सप्रेसेंट भी दिए जाते हैं। सभी मामलों में, जल्दी जांच कराने से रिकवरी जल्दी होती है। माता-पिता को सावधानी बरतनी चाहिए और विशेषज्ञ द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए,” डॉ. बनर्जी ने कहा।
झायनोवा शाल्बी रूग्णालयातील इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. निमित्त नागदा कहा कि, “मानसून में वायरल बुखार और पीयूओ के केस बहुत बढ़ रहे हैं। करीब 30–40% मरीज बुखार की समस्या लेकर आ रहे हैं। नमी, गंदा पानी और मच्छर इसके फैलने में मदद करते हैं। मरीजों को तेज बुखार, शरीर दर्द, सिर दर्द, कमजोरी और कभी-कभी रैश होते हैं। सही जांच के बिना कारण पता लगाना मुश्किल होता है। एडवांस जांच से सही कारण जल्दी पता चलता है और इलाज तुरंत शुरू किया जा सकता है। समय पर जांच से गंभीर परेशानी और गलत दवाइयों से बचा जा सकता है। लोग खुद दवा न लें, साफ पानी पिएं, सफाई रखें और अगर बुखार तीन दिनों से ज्यादा रहे तो डॉक्टर से मिलें। मच्छरों से बचें और आसपास पानी जमा न होने दें। इस मौसम में सावधानी रखना, समय पर जांच कराना और जल्दी इलाज करना ही सबसे अच्छा तरीका है।”
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
अपनी साफ-सफाई का ध्यान रखें, सही डाइट लें जिससे इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग रहे
इन्फेक्शन कई तरह का होता है बैक्टीरियल, वायरस, फंगल और पैरासाइटिक आदि। जो साफ सफाई न रखने या पहले से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से हो सकता है।
शरीर का तापमान बढ़ना, जोड़ों में दर्द होना और सिरदर्द होना आदि बुखार का लक्षण हो सकता है।