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Medically Verified By: Dr. Shubhra Gupta
What Are The Autoimmune Diseases: आजकल लगभग हर प्रकार की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है और उनके मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है। यह सच है कि कुछ बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और कुछ बीमारियां धीरे-धीरे। जिन बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, उनमें ऑटोइम्यून बीमारियां भी एक हैं। अब आपको सबसे पहले यह जानना चाहिए कि ऑटोइम्यून बीमारियां होती क्या हैं। दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. शुभ्रा गुप्ता के अनुसार ऑटोइम्यून कंडीशन ऐसी समस्याएं होती हैं, जिनमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही स्वस्थ कोशिकाओं और अंगों को नुकसान पहुंचाने लग जाता है। सामान्य परिस्थितियों में इम्यून सिस्टम बैक्टीरिया, वायरस और अन्य बाहरी संक्रमणों से शरीर की रक्षा करता है, लेकिन जब यह असंतुलित हो जाता है, तो शरीर के अपने ऊतकों को ही नुकसान पहुंचाने लगता है।
ऑटोइम्यून कंडीशन्स के लक्षण आमतौर पर बीमारी के प्रकार पर निर्भर करते हैं। ऑटोइम्यून बीमारियां कई अलग-अलग प्रकार की होती हैं और ज्यादातर मामलों में इस पर निर्भर करती हैं कि शरीर के कौन से हिस्से को नुकसान पहुंचा रही हैं। ऑटोइम्यून बीमारियों के कुछ प्रकार आमतौर पर निम्न हो सकते हैं -
अब अगर इसके लक्षणों की बात करें तो व्यक्ति और बीमारी के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, क्योंकि इसमें यह देखा जाता है कि बीमारी के कारण इम्यून सिस्टम शरीर के किस हिस्से को नुकसान पहुंचा रहा है और साथ ही में स्थिति कितनी गंभीर है। हालांकि, इसमें आमतौर पर देखे जाने वाले कुछ लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं -
अगर ऑटोइम्यून कंडीशन्स होने के कारण की बात करें तो अभी तक किसी भी मेडिकल रिसर्च में इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। सरल शब्दों में कहें तो इसके कारण का अभी तक सटीक रूप से पता नहीं चल पाया है। आज के समय में खराब खानपान और निष्क्रिय जीवनशैली ऑटोइम्यून बीमारियों के बढ़ने का बड़ा कारण बन रही है। प्रोसेस्ड और जंक फूड का अधिक सेवन, अधिक चीनी और नमक का इस्तेमाल, साथ ही शारीरिक गतिविधियों की कमी शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) को बढ़ाती है। लंबे समय तक यह सूजन इम्यून सिस्टम को असंतुलित कर देती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
(और पढ़ें - इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ने के लक्षण)
लगातार बढ़ता तनाव और मानसिक दबाव भी इन बीमारियों को बढ़ावा देता है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक अपेक्षाएं व्यक्ति को मानसिक रूप से थका देती हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बिगड़ जाता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है और ऑटोइम्यून प्रतिक्रियाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, वायु प्रदूषण और दूषित पानी भी इम्यून सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिससे शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है।
जैसा कि हमने आपको बताया है कि ऑटोइम्यून बीमारियों के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है और इसलिए इसकी पूरी तरह से रोकथाम करना भी संभव नहीं है। लेकिन संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट की मदद से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही सही डाइट लेना भी ऐसी बीमारियों के होने के खतरे को कम करने में मदद करता है, इसलिए अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त आहार लें, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।
इसके अलावा योग, ध्यान और प्राणायाम मानसिक शांति प्रदान करते हैं और शरीर को संतुलित रखते हैं। इसके अलावा, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना भी जरूरी है। किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें, जिससे आप स्वस्थ रह सकते हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।