
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Increased risk of Alzheimer's disease in women: बहुत सी ऐसी गंभीर बीमारियां हैं, जिनके बारे में लोगों को अभी तक भी ठीक से जानकारी नहीं है, और अल्जाइमर रोग भी उन्हीं में से एक है। अल्जाइमर डिजीज प्रमुख न्यूरोलॉजिकल विकारों में से एक है जो व्यक्ति के दिमाग पर असर डालता है। इससे मरीज की याददाश्त धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है, सोचने समझने और निर्णय लेने की क्षमता भी कम होने लगी है। अल्जाइमर के मरीज सामान्य कार्य भी ठीक से नहीं कर पाता है, जैसे नहाना, कपड़े पहनना आदि। खासतौर पर 60 की उम्र के बाद ही यह बीमारी देखी जाती है, लेकिन कुछ अध्ययन यह बता रहे हैं कि पुरुषों की तुलना मं महिलाओं में अल्जाइमर डिजीज होने का खतरा ज्यादा है। कुछ अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि बीते कुछ सालों में महिलाओं में अल्जाइमर रोग के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में डॉ. अरिंदम घोष, कंसलटेंट न्यूरोलॉजिस्ट, नारायणा हेल्थ, कोलकाता में नारायणा न्यूरोलॉजिस्ट, कंसल्टेंट डॉ. अरिंदम घोष ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी जिनके बारे में आप इस लेख में जानेंगे।
महिलाओं और पुरुषों के स्वास्थ्य में बहुत से फैक्टर ऐसे होते हैं, जो उनके शरीर को एक दूसरे से काफी अलग बनाते हैं। यह स्वाभाविक है कि कुछ बीमारियों का खतरा महिलाओं में ज्यादा होता है जबकि कुछ बीमारियों का खतरा पुरुषों में ज्यादा होता है। स्टडीज में भी पाया गया है कि महिलाओं में अल्जाइमर का खतरा पुरुषों की तुलना में ज्यादा है। डॉक्टर अरिंदम घोष के अनुसार महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, मानसिक समस्याएं, नींद की कमी और अन्य कई स्थितियां हैं, जो इसका खतरा बढ़ाती है।
आगे डॉ. घोष बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अल्जाइमर विकसित होने का खतरा बहुत ज्यादा है। ऐसा होने के पीछे सिर्फ लाइफस्टाइल और मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं ही नहीं बल्कि अनुवांशिक कारण भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए अगर माता-पिता में से किसी को पहले अल्जाइमर रहा है, तो उन्हें भी यह बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।
इस रोग के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसकी रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने बहुत जरूरी हैं। डॉ. अरिंदम घोष के अनुसार अल्जाइमर की रोकथाम करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है लोगों तक इसकी रोग की जानकारी पहुंचाना इस बीमारी के प्रति जागरूकता होना ही इस बीमारी को कंट्रोल करने का सबसे पहले कदम हो सकता है। इसके अलावा सही लाइफस्टाइल, हेल्दी डाइट हैबिट्स और नियमित डॉक्टर से जांच भी इस बीमारी की रोकथाम करने के लिए बहुत जरूरी है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।