
डॉ. नीरज कुमार
डॉ. नीरज कुमार एक जाने माने जनरल मेडिसिन हैं, जिनके पास 15 वर्षों से भी अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ... Read More
Written By: Dr. Niraj Kumar | Updated : February 18, 2026 5:53 PM IST
आपने आपने कभी सोचा है कि डायबिटीज के कुछ मरीज आमतौर पर थके से क्यों रहते हैं। जब उनका ब्लड शुगर बढ़ा हुआ हो सिर्फ उस समय नहीं बल्कि जब उनका ब्लड शुगर कंट्रोल हो उस समय भी उनका चेहरा थका हुआ सा महसूस होता है। ज्यादातर लोगों को डायबिटीज की इस कॉम्प्लिकेशन के बारे में पता नहीं होता है और उन्हें लगता है कि वे डायबिटीज के मरीज है इसलिए उन्हें ऐसा हो रहा है। लगभग हर परिवार या आस पड़ोस में डायबिटीज का कोई मरीज मिल ही जाता है और इसलिए डायबिटीज के बारे में तो अच्छे से सब समझते हैं। लेकिन डायबिटीज डिस्ट्रेस के बारे में जानकारी अभी तक नहीं है। जितना जरूरी है डायबिटीज के बारे में जानना है, उतना ही जरूरी डायबिटीज डिस्ट्रेस के बारे में जानना भी है।
आपने आज तक सुना होगा कि डायबिटीज आपके ब्लड शुगर को बढ़ा देता है, जिससे आपका शारीरिक स्वास्थ्य खराब होने लगता है। लेकिन वास्तव में डायबिटीज सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा होता है। मरीजों के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि डायबिटीज के मरीज कई बार अपने ब्लड शुगर को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित होने लगते हैं और उसके कारण उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होने लगता है।

डायबिटीज सिर्फ एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह मानसिक तनाव भी पैदा कर सकती है। जब किसी व्यक्ति को लंबे समय तक ब्लड शुगर कंट्रोल करने, दवाइयां लेने, खानपान पर ध्यान रखने और बार-बार जांच कराने की चिंता रहती है, तो उसे डायबिटीज डिस्ट्रेस कहा जाता है।
अब तक आप यह समझ गए होंगे कि जब कोई डायबिटीज का मरीज अपने ब्लड शुगर और डायबिटीज की कॉम्पलिकेशन के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचने लग जाता है, तो समझ लीजिए कि डायबिटीज डिस्ट्रेस शुरु हो गया है। ऐसे में मरीज को आमतौर पर थकान, चिड़चिड़ापन, निराशा, डर और कभी-कभी अकेलापन महसूस करता है।

डायबिटीज डिस्ट्रेस ऐसी कंडीशन है कि वह अक्सर कम होने की बजाय बढ़ती ही रहती है। मरीज को अक्सर लगता है कि वह अपनी बीमारी को कंट्रोल नहीं कर पा रहा है। अगर डायबिटीज कंट्रोल भी हो जाए तो उसे डर सताता रहता है कि कहीं फिर से ब्लड शुगर बढ़ गया तो। वहीं जब उसका ब्लड शुगर बढ़ने लगता है तो वह फिर बार-बार अपने ब्लड शुगर की जांच करने लगते हैं। सरल शब्दों में कहें तो मरीज को लगता है कि वह डायबिटीज को ठीक से संभाल नहीं पा रहा, जिससे तनाव और बढ़ जाता है।
यह बात भी ध्यान में रखना जरूरी है कि अगर डायबिटीज के किसी मरीज को डायबिटीज डिस्ट्रेस हो गया है, तो उसका सीधा असर उसके ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। क्योंकि डायबिटीज डिस्ट्रेस के कारण जितना वह बार-बार इन इसके बारे में सोचता है, तो चिंता, तनाव व डिप्रेशन बढ़ने लगता है और ये सभी मानसिक समस्याएं ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाने लगती हैं।
डायबिटीज डिस्ट्रेस जैसी कंडीशन को मैनेज करने के लिए यह सबसे जरूरी है कि आप इस समस्या के बारे में अपने दोस्तों, परिवार वालों और डॉक्टर से खुलकर बात करें। खुद को दोषी समझना बंद करें और यह अच्छे से समझ लें कि डायबिटीज को मैनेज करने जितना ही जरूरी मानसिक स्वास्थ्य को मैनेज करना भी है। इस बात का ध्यान रखें कि डायबिटीज एक क्रोनिक डिजीज है यानी लंबी चलने वाली बीमारी है और इसमें ब्लड शुगर लेवल में कभी-कभार उतार-चढ़ाव आना सामान्य है।

डायबिटीज डिस्ट्रेस मैनेज करने के लिए आप छोटे-छोटे लक्ष्य बनाना शुरू करें, संतुलित खाना खाएं, रोज थोड़ा टहलें या व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग या सपोर्ट ग्रुप की मदद भी ली जा सकती है। सही जानकारी, सकारात्मक सोच और अपनों का सहयोग डायबिटीज डिस्ट्रेस को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।