मानसिक स्वास्थ्य के इलाज की दवाएं बीच में ही छोड़ देना और ज्यादा खतरनाक क्यों है?

Mental Health Problems: मानसिक स्वास्थ्य की दवाएं बीच में छोड़ देना केवल इलाज रोकना नहीं है, बल्कि अपने स्वास्थ्य को जोखिम में डालना है। इस लेख में जानेंगे किस प्रकार यह आदत हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : April 22, 2026 7:32 PM IST

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Medically Verified By: Mr. Supreet Singh

What Happens When You Stop Taking Mental Health Medication in Ongoing Treatment: डिप्रेशन, एंग्जायटी, बाइपोलर डिसऑर्डर या सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आज के समय में आम होती जा रही हैं। लेकिन यह भी सच है कि मेडिकल साइंस एडवांस होती जा रही है और अब इनके इलाज के लिए प्रभावी दवाएं और थेरेपी उपलब्ध हैं। लेकिन प्रभावी दवाएं तो तब काम करेंगी ना जब उनके कोर्स को पूरा किया जाएगा, आज के समय में लोगों की दवाएं बीच में ही छोड़ देने की आदत एक बड़ी समस्या बनकर सामने आती है। Psychocare Health Private Limited के फाउंडर एंड सीईओ मि. सुप्रीत सिंह के अनुसार यह आदत न केवल इलाज को अधूरा छोड़ देती है, बल्कि कई मामलों में स्थिति को पहले से ज्यादा गंभीर बना सकती है। इस लेख में हम एक्सपर्ट से जानेंगे कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाओं को बीच में ही छोड़ देना स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है और ऐसे में क्या किया जाना चाहिए।

रिलैप्स

हम खासतौर पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए ली जाने वाली दवाओं की बात कर रहे हैं और अगर उन्हें बीच में ही छोड़ दिया जाए तो उससे “रिलैप्स” का खतरा बढ़ता है। जिसका मतलब है बीमारी का दोबारा लौट आना। मानसिक स्वास्थ्य की दवाएं धीरे-धीरे असर दिखाती हैं और दिमाग के केमिकल संतुलन को स्थिर करने में समय लेती हैं। जब मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा छोड़ देता है, तो यह संतुलन फिर से बिगड़ सकता है, जिससे लक्षण पहले से अधिक तीव्र होकर वापस आ सकते हैं।

ट्रीटमेंट रेजिस्टेंस

जब आपके शरीर में किसी दवा का असर कम हो जाए और उस समस्या से निपटने के लिए बड़ी खुराक की जरूरत पड़े तो उसे ट्रीटमेंट रिजिस्टेंस कहा जाता है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में अगर किसी दवा को बार-बार शुरू और बंद किया जाता है, तो शरीर और दिमाग उन पर पहले जैसा प्रतिक्रिया नहीं देते। धीरे-धीरे यह स्थिति ड्रग रेजिस्टेंस में बदल जाती है।

विथड्रावल सिंड्रोम

मरीजों को यह समझना होगा कि डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसे मानसिक विकारों के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली ज्यादातर दवाएं इस तरह से बनी होती है, जिनकी लत लग सकती है। ऐसे में विथड्रावल सिंड्रोम का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। कई मानसिक स्वास्थ्य दवाएं, खासकर एंटीडिप्रेसेंट्स और एंटी-एंग्जायटी दवाएं, अचानक बंद करने पर शरीर में बेचैनी, चक्कर, नींद की समस्या, सिरदर्द और मूड स्विंग जैसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। यह अनुभव इतना असहज हो सकता है कि मरीज को लगे कि उसकी हालत और बिगड़ गई है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

अगर मरीज बार-बार मानसिक स्वास्थ्य के इलाज की दवाएं बीच में छोड़ रहा है, तो उससे उसके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। ऐसे में धीरे-धीरे मरीज का आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ने लगता है। उसे लगने लगता है कि शायद वह कभी ठीक नहीं हो पाएगा, जिससे मानसिक स्थिति और बिगड़ सकती है।

किन बातों का ध्यान रखना जरूरी

मि. सुप्रीत सिंह के अनुसार सिर्फ जागरूकता और सही मार्गदर्शन की मदद से ही इस समस्या का सही समाधान निकाला जा सकता है। मरीजों को यह समझना जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य का इलाज एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है, जिसमें निरंतरता बेहद जरूरी है। दवाओं को केवल डॉक्टर की सलाह से ही कम या बंद किया जाना चाहिए, ताकि शरीर और दिमाग को धीरे-धीरे बदलाव के लिए तैयार किया जा सके।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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