विटामिन डी की कमी होने पर हार्ट से जुड़ी किन बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है?
विटामिन डी सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं बल्कि दिल के लिए भी जरूरी है और जब शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है, तो इस कारण हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है जिसके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।
विटामिन डी के सप्लीमेंट्स अक्सर कैल्शियम के साथ लिए जाते हैं और इसलिए अधिकांश लोग विटामिन डी को बोन हेल्थ के साथ जोड़कर देखते हैं। यह सच है कि हड्डियों को हेल्दी रखने और उनकी मजबूती बनाए रखने के लिए जरूरी है लेकिन हड्डियों के साथ-साथ यह शरीर के अन्य अंगों के लिए भी बेहद जरूरी है जिनमें हमारा हार्ट भी शामिल है। हाल ही में कई अध्ययन हो चुके हैं और उनमें पाया भी गया है कि विटामिन डी की कमी के कारण हार्ट और ब्लड वेसल्स से जुड़ी कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। डॉ. असीम ढल्ल, डायरेक्टर एवं एचओडी, कार्डियक साइंसेज, ISIC Multi-Specialty Hospital के अनुसार भारत में एक बड़ी संख्या में लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं और इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि बाद में स्थिति गंभीर हो सकती है और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
विटामिन डी की कमी से हार्ट डिजीज का खतरा
विटामिन डी के फायदे हमारे शरीर के लिए बहुत हैं और शरीर के अंदर बहुत सी ऐसी प्रोसेस को सामान्य रूप से चलने में मदद करता है जिससे हार्ट को भी फायदा मिलता है जैसे ब्लड प्रेशर मैनेज करने में मदद करना, सूजन को कंट्रोल करना और रक्त वाहिकाओं को हेल्दी रखना आदि। ऐसे में जब शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है, तो हार्ट से जुड़ी कई समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय की धमनियों में रुकावट), हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया कि विटामिन डी की कमी से शरीर के अंदर इन्फ्लेमेशन यानी सूजन बढ़ने लगती है, जिसका सीधा असर धमनियों पर पड़ता है और ऐसे में हार्ट डिजीज का खतरा भी बढ़ जाता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि केवल विटामिन डी की कमी से ही हृदय रोग हो जाते हैं, लेकिन यह निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक हो सकता है।
FAQ'S
1. हार्ट हेल्थ के लिए सबसे जरूरी क्या है?
2. हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण क्या हैं
3. हार्ट डिजीज क्या है
किन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
जो लोग लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं, धूप में कम निकलते हैं, बुजुर्ग हैं, मोटापे से ग्रस्त हैं या डायबिटीज एवं हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं, उनमें विटामिन डी की कमी का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करवानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार विटामिन डी का स्तर जांचना चाहिए।
कैसे बनाए रखें विटामिन डी का सही स्तर?
सुबह की हल्की धूप विटामिन डी का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है। इसके अलावा अंडा, मछली, फोर्टिफाइड दूध और कुछ अन्य खाद्य पदार्थ भी विटामिन डी की पूर्ति में मदद कर सकते हैं। यदि शरीर में इसकी कमी पाई जाती है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं।
यह समझना जरूरी है कि स्वस्थ हृदय केवल अच्छी डाइट और व्यायाम से ही नहीं, बल्कि शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों के संतुलन से भी जुड़ा होता है। इसलिए विटामिन डी की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, पर्याप्त धूप और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हम न केवल अपनी हड्डियों बल्कि अपने दिल को भी स्वस्थ रख सकते हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल विटामिन डी की कमी से होने वाली समस्याओं से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।