35 से 55 साल की करीब 40% प्रतिशत महिलाओं को एनीमिया, फिर भी नहीं करा रही जांच

Anemia Risk in Women: ब्लड टेस्ट कराने पर 35 से 55 साल की उम्र की करीब 40% महिलाओं में एनीमिया की शिकायत पाई जाती है और लंबे समय तक इस स्थिति को इग्नोर करना कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : January 14, 2026 7:35 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Abhik Banerjee

Blood Test For Anemia in Women: शरीर में खून की कमी होना यानी एनीमिया एक गंभीर समस्या है और महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा होता है। लेकिन फिर भी देखा गया है कि ज्यादातर महिलाएं एनीमिया के खतरे को इतनी गंभीरता से नहीं ले रही हैं। जबकि एनीमिया का बढ़ना या लंबे समय से एनीमिया होना महिलाओं के स्वास्थ्य में कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है, जिससे बाद में स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं होने लगती हैं। कोलकाता स्थित अपोलो डायग्नोस्टिक के ईस्ट जोन के जोनल टेक्निकल चीफ डॉ. अभिक बनर्जी ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी। उन्होंने बताया कि अक्सर 35 से 55 साल की उम्र की करीब 40% महिलाएं जब ब्लड टेस्ट कराती हैं, तो उनमें एनीमिया पाया जाता है। लंबे समय से ये महिलाएं अक्सर कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द और जल्दी थक जाने जैसी परेशानियों को इग्नोर कर रही होती हैं। हीमोग्लोबिन और आयरन की नियमित जांच से समय पर बीमारी पकड़ी जा सकती है और सही इलाज शुरू किया जा सकता है, जिससे महिला की सेहत और जिंदगी दोनों बेहतर हो सकती हैं।

महिलाओं में एनीमिया का खतरा ज्यादा

एनीमिया की समस्या महिलाओं में काफी आम होती जा रही है और इसलिए यह सबसे ज्यादा इग्नोर की जाने वाली बीमारियों में से एक बनती जा रही है। इसके पीछे कई कारण हैं जैसे बढ़ता करियर प्रेशर, जानकारी की कमी और शुरुआती संकेतों को आम समझना या उन्हें इग्नोर करना आदि। यही कारण है कि बहुत सी महिलाएं बिना जाने ही लंबे समय तक कमजोरी और थकान के साथ जीती रहती हैं। समय पर ब्लड टेस्ट कराने से एनीमिया जल्दी पकड़ में आ सकता है, बड़ी बीमारियों से बचाव हो सकता है और महिला की सेहत बेहतर रह सकती है।

क्या है एनीमिया

डॉ. बनर्जी के अनुसार एनीमिया एक ऐसी हेल्थ कंडीशन है, जिसमें शरीर में पर्याप्त हीमोग्लोबिन या स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं होती। हीमोग्लोबिन खून के जरिए शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। जब हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, तो शरीर को पूरी ताकत नहीं मिल पाती और महिला को रोजमर्रा के छोटे कामों में भी थकान और कमजोरी महसूस होती है। लेकिन देखा जा रहा है कि महिलाएं जल्दी थकान व कमजोरी जैसे इन संकेतों को इग्नोर कर देती हैं और बाद में बड़ी समस्या का सामना करना पड़ जाता है।

आयरन की कमी सबसे बड़ा खतरा

ज्यादातर मामलों में महिलाओं को एनीमिया आमतौर पर आयरन की कमी के कारण होता है। यह खराब खानपान, पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग, बार-बार गर्भधारण, चोट आदि के कारण ज्यादा शरीर से खून निकलना या खाने से पोषक तत्व ठीक से न मिल पाने के कारण हो सकता है। इसके अलावा विटामिन B12 और फोलेट की कमी, लंबे समय से चल रही कोई बीमारी और कुछ दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी एनीमिया की वजह बन सकती हैं।

महिलाओं में एनीमिया के लक्षण

एनीमिया के कारण महिलाओं में कुछ ऐसे लक्षण देखे जाते हैं, जिन्हें वे अक्सर इग्नोर कर देती हैं जैसे हर समय थकान रहना, कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना, सिरदर्द रहना, त्वचा पीली पड़ने लगना, सांस जल्दी फूलने लगना, बाल झड़ने लगता और किसी काम पर ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि ये लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए कई महिलाएं इन्हें आम बात समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन अगर समय पर इलाज न हो, तो एनीमिया गंभीर रूप ले सकता है और दिल पर दबाव, कमजोर इम्यूनिटी, गर्भावस्था में दिक्कत, बीमारी से देर से ठीक होना और जिंदगी की गुणवत्ता खराब होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

महिलाएं नहीं कराती ब्लड टेस्ट

अभिक बनर्जी ने कहा कि, “यह बहुत चिंता की बात है कि 35 से 55 साल की करीब 70% महिलाएं नियमित ब्लड टेस्ट नहीं कराती। इसी वजह से उनका एनीमिया सालों तक पता ही नहीं चलता और बिना इलाज के रह जाता है। जब जांच कराई जाती है, तो लगभग 40% महिलाओं में एनीमिया पाया जाता है और उन्हें इलाज की जरूरत होती है। कई महिलाएं थकान और कमजोरी को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मान लेती हैं, जबकि बिना इलाज का एनीमिया दिल, इम्यूनिटी और प्रजनन स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। समय पर जांच कराने से सालों की परेशानी से बचा जा सकता है। साधारण ब्लड टेस्ट बहुत बड़ा फर्क ला सकते हैं।”

आगे डॉ. बनर्जी ने बताया कि, “किशोर लड़कियां, वे महिलाएं जिन्हें पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होती है, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, वे महिलाएं जिन्हें लंबे समय से थकान व कमजोरी महसूस हो रही या फिर वे महिलाओं सो वेट लॉस या किसी अन्य कारण से सख्त डाइट कर रही हैं इन सबको ब्लड टेस्ट जरूर करा लेना चाहिए। समय पर जांच से एनीमिया को सही खानपान, सप्लीमेंट और इलाज से कंट्रोल किया जा सकता है और महिला फिर से ताकत और ऊर्जा महसूस कर सकती है।”

डॉ. अभिक ने यह भी बताया कि, एनीमिया की जांच के लिए कुछ जरूरी टेस्ट होते हैं। जैसे की, हीमोग्लोबिन टेस्ट से खून में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता पता चलती है। आयरन स्टडी (सीरम आयरन, फेरिटिन और TIBC) से शरीर में आयरन की कमी और भंडारण की जानकारी मिलती है। CBC यानी कंप्लीट ब्लड काउंट से खून की पूरी स्थिति और एनीमिया की गंभीरता का पता चलता है। विटामिन B12 और फोलेट टेस्ट से यह जाना जाता है कि शरीर में जरूरी विटामिन की कमी तो नहीं है।

अगर एनीमिया समय पर पकड़ में आ जाए, तो इसका इलाज आसान होता है। आयरन से भरपूर खाना, जरूरी दवाइयां, बीमारी की असली वजह का इलाज और नियमित ब्लड टेस्ट से महिला की सेहत फिर से बेहतर हो सकती है। इसके बावजूद आज भी बहुत सी महिलाएं जांच को जरूरी नहीं समझती। लगातार थकान, कमजोरी या चक्कर आने को हल्के में नहीं लेना चाहिए और समय-समय पर ब्लड टेस्ट जरूर कराना चाहिए।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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