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Recurrence of cancer: कैंसर एक गंभीर बीमारी है जो शरीर की कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण होती है। इलाज के बाद जब मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है, तो यह उम्मीद की जाती है कि कैंसर फिर कभी वापस नहीं आएगा। लेकिन कई बार इलाज के बाद भी कैंसर दोबारा हो सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में “रिलैप्स” या “रिकरेंस” कहा जाता है। यहां जानिए कि कैंसर दोबारा क्यों होता है, इसके क्या कारण हैं, किन लोगों को इसका ज्यादा खतरा होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है। डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा, सीनियर डायरेक्टर और विभागाध्यक्ष (एचओडी) – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी, पारस हेल्थ, गुरुग्राम। ने इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी, जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।
इलाज के दौरान कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या सर्जरी से अधिकतर कैंसर कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, लेकिन कुछ सूक्ष्म कोशिकाएं शरीर में छुपी रह सकती हैं। समय के साथ ये फिर से बढ़ सकती हैं और नया ट्यूमर बना सकती हैं।
कुछ कैंसर बहुत आक्रामक होते हैं यानी वे तेजी से फैलते हैं और इलाज के बावजूद वापस आ सकते हैं। जैसे ब्लड कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, या अग्नाशय (पैंक्रियाज) का कैंसर।
कुछ लोगों में कैंसर दोबारा होने की प्रवृत्ति जेनेटिक हो सकती है। यदि परिवार में पहले किसी को कैंसर रहा हो, तो दोबारा होने की संभावना अधिक हो सकती है।
अगर कैंसर के इलाज के बाद भी व्यक्ति धूम्रपान, शराब या असंतुलित खानपान जैसी आदतें जारी रखता है, तो कैंसर दोबारा हो सकता है।
कुछ मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) कमजोर होती है जिससे कैंसर कोशिकाएं दोबारा सक्रिय हो जाती हैं।
जब कैंसर उसी जगह पर वापस आता है जहां पहले था।
जब कैंसर शरीर के आसपास के टिशू या लिम्फ नोड्स में लौटता है।
जब कैंसर शरीर के किसी दूर हिस्से में फैल जाता है जैसे कि लिवर, फेफड़े या हड्डियों में।
इलाज के बाद भी डॉक्टर से समय-समय पर चेकअप कराते रहना जरूरी है। कुछ टेस्ट जैसे PET स्कैन, MRI या ब्लड रिपोर्ट से दोबारा कैंसर की पहचान समय पर हो सकती है।
संतुलित आहार लें, धूम्रपान और शराब से दूर रहें, रोजाना थोड़ा व्यायाम करें।
तनाव और चिंता से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को फिर से पनपने का मौका मिल सकता है।
डॉक्टर की सलाह से दवाएं समय पर लेना और कोई भी इलाज बीच में न छोड़ना जरूरी है।
कैंसर दोबारा होना एक डरावनी स्थिति हो सकती है, लेकिन समय पर पहचान और उचित इलाज से इसे भी नियंत्रित किया जा सकता है। जरूरी है कि मरीज इलाज के बाद भी सजग रहें, अपने शरीर के बदलावों को समझें और डॉक्टर से नियमित संपर्क में रहें।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।