इम्यूनिटी को कमजोर करके बीमार बना देता है प्रदूषण, दिवाली से पहले ही रखें इन बातों का ध्यान

Effects of Air Pollution on Health: प्रदूषण का खतरा वैसे तो हर किसी को है लेकिन इससे सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इस लेख में एक्सपर्ट्स से जानें प्रदूषण का स्वास्थ्य पर प्रभाव और इससे कैसे करें बचाव।

इम्यूनिटी को कमजोर करके बीमार बना देता है प्रदूषण, दिवाली से पहले ही रखें इन बातों का ध्यान

Written by Mukesh Sharma |Published : October 14, 2025 7:42 PM IST

Air Pollution Side Effects on Kids And Elderly: हमारा शरीर एक मशीन की तरह होता है, जिसके अंदर बहुत सी जटिल प्रक्रियाएं चल रही होती हैं और हमें पता भी नहीं चलता है। लेकिन प्रक्रियाओं में बाधा पैदा करने वाली भी बहुत सी चीजें हैं, जिन्हें हम इग्नोर कर रहे होते हैं और और उनमें से एक है प्रदूषण। खासतौर पर दिवाली के पहले प्रदूषण की गंभीरता को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि दिवाली के बाद एक बार तो कुछ समय के प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। प्रदूषण बढ़ने का असर हमारे इम्यून सिस्टम पर भी पड़ता है। डॉ. हरीश कुमार वर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, शारदाकेयर हेल्थसिटी के अनुसार प्रदूषण का इम्यूनिटी पर असर सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। जब हवा प्रदूषित होती है, तो सबसे पहले इस उम्र वर्ग के लोग प्रभावित होते हैं और बीमार पड़ते हैं।

प्रदूषण से बच्चों को खतरा

प्रदूषण से बच्चों को स्वास्थ्य को बचाना बहुत जरूरी है और जैसे कि अब दिवाली का समय आ गया है इस दौरान खास ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

  • बच्चों का शरीर लगातार बढ़ रहा होता है और उनकी इम्यूनिटी पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होती है। ऐसे में बच्चे का शरीर ज्यादा संवेदनशील होता है और प्रदूषण के कारण उनके बीमार पड़ने का खतरा ज्यादा रहता है।
  • बच्चों की वायुमार्ग, श्वासनलियां वयस्कों की तुलना में छोटे होते हैं और पूरी तहह से विकसित नहीं हुए होते हैं, इस कारण से प्रदूषण के कण सीधे फेफड़ों तक आसानी से पहुंच जाते हैं।
  • बच्चे ज्यादा तेजी से लेते हैं और कई बार उन्हें मुंह से सांस लेने की आदत भी पड़ जाता है, जो उनके लिए बीमारियों के खतरे को और ज्यादा बढ़ाता है।
  • उनकी इम्यूनिटी पूरी तरह से विकसित न हो पाने के कारण उनके शरीर में प्रदूषण के कणों के कारण एलर्जी, सूजन व इन्फेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है।

इसके अलावा भी बहुत सारे ऐसे फैक्टर हैं, जो बताते हैं कि बढ़ता प्रदूषण वयस्कों की तुलना में बच्चों के लिए ज्यादा हानिकारक है। जैसे छोटे बच्चों का बाहर खेलना, मास्क न लगाकर रखना, बार-बार धूल-मिट्टी के संपर्क में आना और समय-समय पर दवाएं आदि न लेना आदि। इस तरह के कुछ कारक हैं, जो बच्चे को प्रदूषण से होने वाली बीमारियों की चपेट में जल्दी आने के खतरे को बढ़ाती है।

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प्रदूषण से बुजुर्गों को खतरा

बच्चों की तरह बुजुर्गों को भी प्रदूषण से होने वाली बीमारियों की खतरा ज्यादा रहता है, जिनमें से कुछ के बारे में इस लेख में जानकारी दी गई है -

  • बच्चों की ही तरह बुजुर्गों की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यूनिटी कमजोर होती है। बच्चों की इम्यूनिटी विकसित हो रही होती है, वहीं बुजुर्गों की इम्यूनिटी बूढ़ी हो रही होती है। यह स्थिति उन्हें प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों के खतरे में लाती है।
  • बढ़ती उम्र के साथ-साथ शरीर के अंदरूनी अंग भी बूढ़े और कमजोर पड़ जाते हैं। उनके कमजोर फेफड़े प्रदूषण में ठीक से काम नहीं कर पाते हैं, जिस कारण से उनके बीमार पड़ने का खतरा ज्यादा रहता है।
  • उम्र बढ़ने के साथ-साथ इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और इस कारण से बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी काफी हद तक कम हो जाती है और खासतौर पर इन्फेक्शन आदि होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
  • उम्र जितनी ज्यादा बढ़ती है क्रोनिक रोग होने का खतरा भी उतना ही बढ़ता रहता है, जैसे सीओपीडी, डायबिटीज और हार्ट डिजीज आदि।

इसके अलावा भी कई ऐसे फैक्टर हैं, जो बताते हैं कि वयस्कों की तुलना में बुजुर्गों में ऐसी बीमारियां होने का खतरा ज्यादा रहता है और प्रदूषण के कारण उनका शरीर जल्दी प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा जो बुजुर्ग लोग पहले से ही किसी क्रोनिक बीमारी से बीमारी हैं, उनके लिए इन बीमारियों का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

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बचाव के तरीके

हालांकि, ऐसा नहीं है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए अब खतरा पूरी तरह से बढ़ चुका है, बल्कि इसके बचाव के कुछ उपाय भी हैं जिनकी मदद से बच्चों और बुजुर्गों में प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • जितना भी हो सके प्रदूषण वाले इलाकों में न जाएं और अगर किसी काम से जाना जरूरी है, तो अच्छी क्वालिटी के N95/N99 मास्क का उपयोग करें।
  • इंटरनेट पर प्रदूषण कास्तर देखते रहें और जिस दिन प्रदूषण ज्यादा हो घर के खिड़की-दरवाजे बंद रखें। बच्चों व बुजुर्गों को बिना किसी काम के घर से बाहर न निकलने दें।
  • अपने बाहर के काम सुबह व शाम की बजाय दोपहर में निपटाएं, क्योंकि इस समय प्रदूषण अपेक्षाकृत कम हो जाता है।
  • अगर आपके क्षेत्र में प्रदूषण ज्यादा रहता है, तो आप घर पर एयर प्यूरिफायर भी लगा सकते हैं, ताकि घर के अंदर ही हवा समय-समय पर साफ होती रहे।
  • घर के अंदर किसी तरह के रसायनिक क्लीनर, एयर फ्रेशरन, अगर बत्ती, धूम्रपान व हवा को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करें।

शरीर को मजबूत करना भी जरूरी

प्रदूषण से बचने के तरीकों के साथ-साथ प्रदूषण से निपटने के तरीकों पर भी ध्यान देना होगा। इसका मतलब है कि अपनी इम्यूनिटी को अच्छा बनाएं रखें, अच्छा व संतुलित आहार लें जिसमें खूब सब्जियां, फल, बीज, ड्राई फ्रूट्स व साबुत अनाज शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और नियमित रूप से व्यायाम करते रहना भी बहुत जरूरी है।

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