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Hormonal Imbalance Symptoms Hair Loss: हेयर फॉल से निपटने के लिए हम क्या कुछ नहीं करते हैं, महंगे से महंगे हेयर केयर प्रोडक्ट्स खरीदने से लेकर देसी नुस्खे अपनाने तक। कुछ लोगों को इनसे फायदा मिल जाता है, तो कई बार कुछ लोगों को इनसे फायदा नहीं मिल पाता है। अक्सर हम देखते हैं कि हेयर फॉल को रोकने के लिए कई बार महंगे हेयर केयर प्रोडक्ट्स भी काम नहीं कर पाते हैं, क्योंकि यह आमतौर पर अंदरूनी बीमारी होती है। ऐसी ही अंदरूनी बीमारी के बारे में डॉ. विजय सिंघल सीनियर कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजी श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट दिल्ली ने जानकारी दी। उनके अनुसार बालों का झड़ना एक सामान्य समस्या है, लेकिन जब यह लगातार बढ़ने लगे या अचानक बहुत अधिक बाल गिरने लगें, तो इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। हार्मोन शरीर के कई कार्यों को नियंत्रित करते हैं, जिनमें बालों की वृद्धि चक्र भी शामिल है। जब हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है, तो बालों की जड़ें कमजोर पड़ सकती हैं और बाल तेजी से झड़ने लगते हैं।
थायराइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। यदि थायराइड हार्मोन कम हो जाए (हाइपोथायरायडिज्म) या अधिक हो जाए (हाइपरथायरॉइडिज्म), तो इसका सीधा असर बालों पर पड़ सकता है। थायराइड असंतुलन के कारण बाल पतले हो सकते हैं, उनकी वृद्धि धीमी हो सकती है और बालों का झड़ना बढ़ सकता है।
महिलाओं में बाल झड़ने का एक प्रमुख कारण पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम है। इस स्थिति में शरीर में पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर बढ़ सकता है, जिससे सिर के बाल पतले होने लगते हैं। साथ ही चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल बढ़ सकते हैं। पीसीओएस के साथ अनियमित मासिक धर्म, वजन बढ़ना और मुंहासे जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं।
गर्भावस्था के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बाल अधिक घने और मजबूत लग सकते हैं। लेकिन प्रसव के बाद हार्मोन का स्तर अचानक कम हो जाता है, जिसके कारण कुछ महीनों तक अधिक बाल झड़ सकते हैं। यह स्थिति सामान्यतः अस्थायी होती है और समय के साथ ठीक हो जाती है।
मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इससे बालों की वृद्धि प्रभावित होती है और बाल पतले होकर झड़ने लगते हैं। इस अवस्था में संतुलित आहार और चिकित्सकीय सलाह से स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। इसलिए देखा जाता है, कि जिन महिलाओं की उम्र 40 से ज्यादा होती है, उनमें बाल झड़ने के मामले ज्यादा देखे जाते हैं।
लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर में कॉर्टिसोल नामक तनाव हार्मोन बढ़ जाता है। अत्यधिक तनाव बालों के विकास चक्र को प्रभावित करता है और अचानक अधिक बाल झड़ने की समस्या पैदा कर सकता है। पर्याप्त नींद, योग और तनाव कम करने की आदतें इस समस्या को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं।
शरीर में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का असंतुलन भी बाल झड़ने का कारण बन सकता है। जब टेस्टोस्टेरोन डीएचटी में बदलता है, तो यह बालों की जड़ों को कमजोर कर सकता है। इसके कारण पुरुषों में सिर के आगे और बीच के हिस्से से बाल झड़ने लगते हैं, जिसे पुरुष पैटर्न गंजापन कहा जाता है। महिलाओं में भी इसी कारण बाल पतले हो सकते हैं।
इंसुलिन की समस्या या मधुमेह जैसी स्थितियों में शरीर का हार्मोन संतुलन प्रभावित होता है। इससे बालों की जड़ों तक पर्याप्त पोषण नहीं पहुंच पाता और बाल झड़ने लगते हैं। रक्त शर्करा को नियंत्रित रखना बालों के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।
यदि बाल अचानक अधिक झड़ने लगें, बालों की घनत्व कम हो जाए या इसके साथ शरीर में अन्य बदलाव जैसे वजन बढ़ना या घटना, थकान, अनियमित मासिक धर्म आदि दिखाई दें, तो हार्मोनल असंतुलन की जांच कराना आवश्यक है। समय पर परीक्षण और उचित उपचार से हार्मोन संतुलन को ठीक किया जा सकता है और बालों के झड़ने की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित चिकित्सकीय परामर्श बालों की सेहत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।