
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : April 22, 2026 6:08 PM IST
Medically Verified By: Dr. J. B. Sharma
Biopsy Risk of Spreading Cancer: कैंसर ऐसा रोग है, जिसका जितना जल्दी इलाज हो जाए तो इससे होने वाले खतरे को उतना ही कम किया जा सकता है। वहीं उसके विपरीत अगर इसके इलाज में देरी होती है, तो इससे होने वाली जटिलताएं ज्यादा हो जाती हैं। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहने की सलाह देते हैं। कैंसर के अनुसार उसका सही इलाज ढूंढने के लिए अक्सर बायोप्सी की जाती है, जिसमें शरीर के अंदर के कैंसरग्रस्त ऊतकों (Cancerous Tissue) का सैंपल लिया जाता है और उस पर टेस्ट किए जाते हैं। हालांकि, कुछ लोग बायोप्सी कराने से डरते हैं और कहते हैं कि बायोप्सी कराने से कैंसर फैलने लगता है। लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है या फिर यह पूरी तरह से झूठ है, इस बारे में सिर्फ कैंसर एक्सपर्ट्स ही बता सकते हैं।
कई लोगों के मन में यह डर बैठा हुआ है कि अगर बायोप्सी कराई जाए तो कैंसर “छेड़ने” से शरीर में फैल सकता है। यही कारण है कि कई मरीज जांच से बचते हैं या इलाज में देरी कर देते हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार यह धारणा ज्यादातर एक मिथक है, न कि सच्चाई।
Dr. J.B. Sharma, Director - Medicine and Therapeutics, Action Institute of Medical Oncology and Immunotherapy, Action Cancer Hospital, Delhi
बायोप्सी एक प्रकार की मेडिकल प्रोसीजर है, जिसमें शरीर के उस हिस्से से सैंपल लिया जाता है जहां पर कैंसर है या फिर कैंसर होने का शक है। टिश्यू का सैंपल लेकर उस पर टेस्ट किए जाते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गांठ या असामान्यता कैंसर है या नहीं। बिना बायोप्सी के कैंसर की पुष्टि करना मुश्किल होता है, इसलिए सही इलाज शुरू करने के लिए यह बेहद अहम कदम है। उदाहरण के रूप में ब्रेस्ट कैंसर के कारण का पता लगाने के लिए बायोप्सी काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, कुछ रिसर्चों के अनुसार बायोप्सी से कैंसर फैलने का जोखिम बहुत ही कम होता है यानी लगभग न के बराबर। आजकल बायोप्सी की तकनीकें काफी एडवांस हो चुकी हैं, जैसे नीडल बायोप्सी (सुई के जरिए) या इमेज-गाइडेड बायोप्सी, जिनमें पूरी सावधानी बरती जाती है। डॉक्टर इस प्रक्रिया को इस तरह करते हैं कि कैंसर कोशिकाएं आसपास के हिस्सों में न फैलें।
पहले जब मेडिकल तकनीकें इतनी एडवांस नहीं थी, तब कुछ दुर्लभ मामलों में बायोप्सी से जुड़ी कुछ जटिलताएं देखने को मिल जाती थी। वहीं कई बार ऐसा भी होता है कि कैंसर पहले से ही शरीर में फैल चुका होता है, लेकिन बायोप्सी के बाद इसका पता चलता है। इससे लोगों को लगता है कि फैलाव बायोप्सी की वजह से हुआ, जबकि असल में ऐसा नहीं होता। यही कारण है कि लोगों के मन में यह डर तब से बना हुआ है, जो मेडिकल प्रोसीजर इतनी एडवांस नहीं थी।
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कैंसर पर रिसर्च करके उसके लिए सही इलाज का पता लगाया जाता है और ऐसा बायोप्सी की मदद से ही किया जा सकता है। इसलिए कैंसर का इलाज करने के लिए बायोप्सी करना बहुत जरूरी है और इसे एक सेफ प्रोसीजर माना जाता है। बायोप्सी आज के समय में कैंसर की पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीका है। बिना सही डायग्नोसिस के इलाज शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। कई बार समय पर बायोप्सी न कराने से बीमारी बढ़ जाती है, जिससे इलाज और कठिन हो जाता है।
हालांकि, हर मेडिकल प्रक्रिया की तरह बायोप्सी में भी कुछ सामान्य जोखिम होते हैं, जैसे हल्का दर्द, सूजन या इंफेक्शन। लेकिन ये जोखिम अस्थायी होते हैं और आसानी से नियंत्रित किए जा सकते हैं। कैंसर फैलने का खतरा इनसे जुड़ा नहीं होता। बायोप्सी से कैंसर फैलने का डर एक आम लेकिन गलत धारणा है। यह जांच कैंसर की सही पहचान और समय पर इलाज के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए अगर डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं, तो डरने के बजाय उसे समय पर कराना ही समझदारी है। सही जानकारी और जागरूकता ही इस तरह के मिथकों को दूर कर सकती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।