
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 9, 2026 1:45 PM IST
Medically Verified By: Dr. Archana Dhawan Bajaj
(Image credit: Chatgpt)
मेडिकल साइंस कितनी ही एडवांस क्यों न हो चुकी हो, लेकिन “कैंसर” शब्द का जो डर है वह अभी निकल नहीं पाया है। अलग-अलग प्रकार के प्रकार के मेडिकल ट्रीटमेंट्स कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किए जा चुके हैं और इतना होने के बावजूद भी कई बार कैंसर बाजी जीत जाता है। ऐसा आमतौर पर इसलिए होता है, क्योंकि आज भी लोगों को कैंसर से जुड़ी जानकारी पूरी नहीं है। ओवेरियन कैंसर भी ऐसा ही एक कैंसर विषय है, जिस बारे में महिलाएं ज्यादा बात नहीं कर पाती हैं और मां बनने का सपना लेकर अंदर ही अंदर घुटन महसूस करने लगती हैं। ओवेरियन कैंसर के बाद भी क्या आप मां बन सकती हैं, इस बारे में हम नर्चर आईवीएफ क्लिनिक की गाइनेकोलॉजिस्ट और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज से इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां लेंगे।
ओवेरियन कैंसर के बाद मां बनना संभव है, लेकिन यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर का स्टेज क्या था, किस प्रकार का उपचार किया गया और उपचार के दौरान अंडाशय (Ovaries) और गर्भाशय (Uterus) कितना सुरक्षित रह पाया। कई मामलों में, खासकर यदि कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ा गया हो और एक ही ओवरी प्रभावित हो, तो सर्जरी के दौरान दूसरी ओवरी और गर्भाशय को सुरक्षित रखा जा सकता है। ऐसे मामलों में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना बनी रहती है। हालांकि, यदि दोनों ओवरी हटानी पड़ी हों या कीमोथेरेपी/रेडियोथेरेपी के कारण अंडाशय की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई हो, तो फर्टिलिटी पर गहरा असर पड़ सकता है।
Dr Archana Dhawan Bajaj, a Gynaecologist and IVF expert at Nurture IVF Clinic
फर्टिलिटी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण पहलू है, फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन की प्लानिंग, जो आदर्श रूप से ओवेरियन कैंसर का इलाज शुरू होने से पहले की जाती है। इसमें एग फ्रीजिंग (oocyte cryopreservation) या एम्ब्रियो फ्रीजिंग शामिल हो सकती है। कई युवा मरीज, जिनका परिवार पूरा नहीं हुआ होता, उनके लिए यह विकल्प भविष्य में मां बनने की संभावना को सुरक्षित रखता है। अगर यह पहले नहीं किया गया हो, तब भी कुछ मामलों में डोनर एग्स या सरोगेसी जैसे विकल्पों के माध्यम से मातृत्व संभव हो सकता है।
इलाज के बाद गर्भधारण का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लेना चाहिए। आमतौर सलाह दी जाती है कि कैंसर के इलाज के बाद कम से कम 2 से 3 साल का समय दिया जाए, क्योंकि इस दौरान ओवेरियन कैंसर के फिर से होने का खतरा अधिक होता है। इस अवधि में नियमित फॉलो-अप, स्कैन और ट्यूमर मार्कर्स की जांच जरूरी होती है। जब डॉक्टर यह सुनिश्चित कर लें कि बीमारी कंट्रोल में है और शरीर रिकवरी कर चुका है, तभी गर्भधारण की योजना बनानी चाहिए।
ओवेरियन कैंसर और उसके उपचार के बाद शरीर में एस्ट्रोजन और अन्य हार्मोन्स का स्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या पूरी तरह बंद भी हो सकते हैं। ऐसे में IVF जैसी तकनीकों की जरूरत पड़ सकती है, जहां नियंत्रित तरीके से ओव्यूलेशन और फर्टिलाइजेशन कराया जाता है। हर केस में यह निर्णय व्यक्तिगत होता है और इसमें ऑन्कोलॉजिस्ट और फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट दोनों की सलाह आवश्यक होती है।
(और पढ़ें - देश के किन अस्पतालों में होता है ओवेरियन कैंसर का मुफ्त इलाज)
कैंसर से उबरने के बाद गर्भधारण का सफर कई बार चिंता और डर से भरा होता है—रीकरेन्स का डर, प्रेग्नेंसी पर असर का डर, और बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर चिंता। ऐसे में काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम बेहद जरूरी होता है। सही जानकारी, नियमित मॉनिटरिंग और एक मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच के साथ, कई महिलाएं ओवेरियन कैंसर के बाद भी सफलतापूर्वक मां बन पाती हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल ओवेरियन कैंसर से जुड़ी सही जानकारी देना है इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
आईवीएफ में आमतौर पर 10 से 20 इंजेक्शन लग सकते हैं।
आईवीएफ की पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 4 से 6 सप्ताह लग जाते हैं।
यह एक प्रकार की सहायक रिप्रोडक्टिव तकनीक है जिसमें महिलाओं के अंडाशय और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर प्रयोगशाला में फर्टिलाइजर किया जाता है, और फिर भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है।