
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Is it Safe to Put Honey in Eyes: शहद को आयुर्वेद में एक प्राकृतिक औषधि के रूप में माना जाता है, जो शरीर के लिए कई प्रकार से लाभकारी होता है। इसमें विटामिन, एंजाइम, एंटीऑक्सीडेंट और खनिज जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन सुधारने और त्वचा को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। शहद का उपयोग आयुर्वेद में घाव भरने, खांसी-जुकाम में राहत पाने और ऊर्जा प्रदान करने के लिए किया जाता है। हालांकि कुछ लोग आंखों की रोशनी बढ़ाने, जलन कम करने या आंखों को ठंडक पहुंचाने के लिए शहद डालते हैं। लेकिन क्या यह शहद आंखों के लिए सुरक्षित? आपने इस बारे में सोचा है? तो चलिए विशेषज्ञ से जानते हैं कि शहद आंखों के लिए सुरक्षित है या नहीं।
इसमें कोई शक नहीं कि शहद में कई उपचारात्मक गुण होते हैं, लेकिन इसे सीधे आंखों में डालना सुरक्षित नहीं माना जाता। आंखें शरीर का सबसे संवेदनशील अंग होती हैं और उनमें किसी भी अस्थिर या संक्रामक पदार्थ का उपयोग नुकसानदायक हो सकता है। शहद भले ही प्राकृतिक हो, लेकिन उसमें मौजूद परागकण या बैक्टीरिया आंखों में जलन, संक्रमण या एलर्जी का कारण बन सकते हैं। इसलिए, आंखों की देखभाल में किसी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि इससे कुछ गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे-
शहद प्राकृतिक होने के बावजूद इसमें बैक्टीरिया या परागकण हो सकते हैं। इन्हें आंखों में डालने से कंजंक्टिवाइटिस (आंख आना), लालिमा और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, खासकर यदि शहद पूरी तरह से स्टरलाइज न हो। इसलिए आंखों में कई बार शहद डालना खासतौर पर सीधे मधुमक्खी के छत्ते से निकाला हुआ शहद डालना आंखों में संक्रमण का कारण बन सकता है।
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शहद की चिपचिपी प्रकृति और उसमें मौजूद तत्व आंखों में जलन, चुभन और खुजली पैदा कर सकते हैं। इससे आंखों में पानी आना और रगड़ने की आदत भी बढ़ सकती है, जो स्थिति को और बिगाड़ सकती है और आंखों में अन्य प्रकार की कोई परेशानी बढ़ा सकती है। खासतौर पर मधुमक्खी के छत्ते से निकाले शहद में कई ऐसे कण या अन्य कचरा भी मौजूद हो सकता है, जो आंखों में खुजली, जलन व अन्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
शहद की मोटी और चिपचिपी बनावट आंखों की सतह पर जम सकती है, जिससे अस्थायी रूप से धुंधलापन महसूस होता है। यह धुंधलापन दृष्टि को प्रभावित करता है, जिससे पढ़ने, गाड़ी चलाने या किसी भी काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है और दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है। शहद चिपचिपा होने के साथ-साथ उसमें कई ऐसे तत्व होते हैं, जो जिसके कारण धुंधलापन होने लगता है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में यह धुंधलापन अपने आप ठीक हो जाता है।
कुछ लोगों को शहद में मौजूद परागकण, एंजाइम या अन्य प्राकृतिक तत्वों से एलर्जी हो सकती है। आंखों में इसका उपयोग करने पर पलकों में सूजन, खुजली, जलन और लालिमा जैसी एलर्जिक प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, जो आंखों की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। कुछ लोगों की आंखें थोड़ी ज्यादा सेंसिटिव हो सकती हैं और ऐसे लोगों को शहद डालने के बाद ऐसी समस्याएं होने का खतरा ज्यादा रहता है।
हालांकि, आंखों में शहद डालने से जरूरी नहीं है कि कोई दिक्कत ही हो क्योंकि। जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया है कि आयुर्वेद के अनुसार तो आंखों में शहद डालना काफी फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, अगर शहद में किसी तरह की कोई अशुद्धि है, जैसे कोई बैक्टीरिया, वायरस या फंगस आदि तो इससे आंखों में दिक्कत हो सकती है और मधुमक्खी के छत्ते से सीधे निकाला गया शहद स्टेराइल नहीं होता है उसमें ये अशुद्धियां होना सामान्य हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को आंख में शहद डालने के बाद निम्न लक्षण होते हैं तो उसे जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए -
उपरोक्त ये सभी लक्षण आंख में किसी इंफेक्शन का संकेत हो सकता है या फिर शहद में मौजूद किसी तत्व या अशुद्धि के कारण आंख में एलर्जी होने का संकेत हो सकता है। ऐसे में जल्द से जल्द डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। इसलिए जिन लोगों को शहद डालने के बाद इस तरह के लक्षण महसूस होते हैं या कोई और परेशानी होती है, तो आंखों के स्पेशलिस्ट यानी ओफ्थल्मोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टर के पास जाकर उन्हें बताएं कि आपने अपनी आंख में शहद डाला था और उसके बाद आपको ये दिक्कत होने लगी है। ऐसे में डॉक्टर खुजली, जलन, दर्द व लालिमा कम करने के लिए कुछ आई ड्रॉप्स व खाने की दवाएं दे सकते हैं। साथ ही डॉक्टर आंख से कुछ टेस्ट भी कर सकते हैं, जिससे आधार पर डॉक्टर दवाई देते हैं।
डॉक्टर दवाएं देने के साथ-साथ आपको घर पर भी उसका कुछ खास ध्यान रखने की सलाह दे सकते हैं, जैसे दिन में दो से तीन बार ठंडे पानी से आंख को धोना, आंख की ठंडी सिकाई करना। कुछ सीमित समय के लिए रोशनी के सीधे संपर्क में न आना, बार-बार आंखों को न छूना और धूल-मिट्टी के संपर्क में न आना आदि।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि आंखें हमारे शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक है और इसलिए इसका खास ध्यान रखना जरूरी होता है। अगर आपको आंख से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या होती है, तो घर पर नुस्खे आजमाने की बजाय डॉक्टर से इस बारे में संपर्क करना चाहिए।
अग आपकी आंखें ठीक हैं, तो भी उसे जितना हो सके धूल-मिट्टी व अन्य किसी केमिकल या गैस के संपर्क में आने सा बचाना चाहिए। साथ ही अपनी डाइट में हेल्दी और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए, जिससे आंखों को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। इसलिए अपनी डाइट में मौसमी फल व सब्जियां शामिल करें और जितना भी हो सके बाहर की चीजों जैसे फास्ट फूड्स आदि का सेवन न करें। हेल्दी डाइट और फास्ट फूड्स से बचना आपकी आंखों को पोषण देगा और आपकी इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाएगा जिससे आंखों में इंफेक्शन आदि होने का खतरी भी कम होने लगेगा।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
आंखों में शहद डालने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए?
रोजाना आंखों को ठंडे पानी से धोने से आंखों में ताजगी रहती है और उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।
आंखों में जलन होने के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिसमें धूल मिट्टी के कारण होने वाली एलर्जी, संक्रमण व अन्य समस्याएं भी शामिल हैं।