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No Smoking Day 2026: स्मोकर्स आमतौर पर दो तरह के होते हैं, पहले होते हैं जो तलब लगते ही सिगरेट पीते हैं और दूसरे होते हैं जो कहते हैं कि उन्हें सिगरेट की तलब नहीं लगती लेकिन जब वे दोस्तों के साथ होते हैं तो सिगरेट फूंक लेते हैं। अब दूसरी किस्म के जो लोग हैं, ये कहते हैं कि वे स्मोकर नहीं है वे तो बस टशन मारने के लिए कभी-कभी सिगरेट पी लेते हैं। यही नहीं उनका ये मानना भी है कि रोज सिगरेट पीने से या जिन लोगों को सिगरेट की तलब लगने लगती है उन्हें सिगरेट नुकसान पहुंचाती है। इसका मतलब ये हुआ कि जो लोग सिर्फ कभी-कभार सिगरेट पीते हैं उन्हें सिगरेट नुकसान नहीं पहुंचाती है। लेकिन क्या ये सच है? लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है इस बारे में तो सिर्फ एक्सपर्ट्स ही बता सकते हैं। शारदाकेयर-हेल्थसिटी के एसोसिएट डायरेक्टर, रेस्पिरेटरी मेडिसिन और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. हरीश वर्मा ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।
बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर वे केवल पार्टी या दोस्तों के साथ ही सिगरेट पीते हैं तो यह सुरक्षित है। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा नहीं है। कम मात्रा में भी सिगरेट पीने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं तनाव कम करने के तरीके ढूंढते-ढूंढते कभी-कभी सिगरेट पीने से भी फेफड़ों और हृदय की सेहत पर असर पड़ता है। धीरे-धीरे यह आदत नियमित धूम्रपान में भी बदल सकती है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ जाते हैं।

मुख्य कारण जिनसे कभी-कभी धूम्रपान भी नुकसानदायक हो सकता है -
अगर सरल शब्दों में कहें तो कभी-कभी सिगरेट पीने का मतलब यह नहीं है कि आपको इससे स्वास्थ्य से जुड़ी किसी परेशानी का खतरा नहीं है या फिर खतरा कम है। एक बार सिगरेट पीना भी स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है और कई बीमारियों का कारण बन सकता है। वहीं कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी रहता है कि क्या हुक्का सिगरेट से कम खतरनाक होता है? तो भी आपको बता दें कि स्मोकिंग का कोई भी प्रोडक्ट किसी दूसरे से कम खतरनाक नहीं है। ये सभी सेहत के दुश्मन हैं और समय पर अगर इनका सेवन बंद न किया जाए तो स्थिति जानलेवा हो सकती है।
धूम्रपान का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित करता है। लंबे समय तक धूम्रपान करने से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सबसे बड़ा खतरा फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का होता है, जिसमें लंग कैंसर और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा दिल और रक्त वाहिकाओं पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कभी-कभी सिगरेट पीने का मतलब है कि शरीर को निकोटीन की आदत नहीं है और जब उसे निकोटीन मिलती है तो ब्रेन ज्यादा रिएक्ट करता है और उससे होने वाले कुछ असर इस प्रकार हो सकते हैं -

ऊपर हमने कुछ खास ऐसे नुकसान बताएं हैं, जो कभी-कभार सिगरेट पीने वाले लोगों को महसूस होते हैं और जब वे धीरे-धीरे रोज स्मोकिंग करने लग जाते हैं तो इस तरह के लक्षण कम देखने को मिलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि शरीर को धुएं से निकलने वाले उन केमिकल्स की आदत पड़ गई है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है, कि रोज पीने से इन समस्याओं का खतरा कम हो जाता है। जितना ज्यादा स्मोकिंग व्यक्ति करता है, तो स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी उतना ही ज्यादा बढ़ता है। अगर महीनों में एक बार स्मोकिंग की जाती है, तो भी कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
अगर कोई व्यक्ति रोज सिगरेट पीने लगा है या उसका सिगरेट पीने का मन करने लगा है तो संकेत देता है कि या तो उसे लत लग चुकी है या फिर बहुत ही जल्द लगने वाली है। यह भी हो सकता है कि व्यक्ति को महसूस भी न हो पाए और धीरे-धीरे उसे स्मोकिंग की लत लग जाए। साथ ही स्मोकिंग की लत जितने लंबे समय तक रहती है, उसका असर स्वास्थ्य पर भी उतने ही लंबे समय तक रहता है और हो सकता है शरीर के अंदर कोई परमानेंट डैमेज भी हो जाए। धूम्रपान की लत लगने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नुकसान कुछ इस प्रकार हो सकते हैं -
अब तक हम उन लोगों के बारे में बात कर रहे थे जो स्मोकिंग करते हैं, लेकिन आपको बता दें कि वे लोग भी धूम्रपान से होने वाली बीमारियों के रिस्क में होते हैं जो सिगरेट पीने वाले लोगों के आसपास रहते हैं। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास मौजूद लोग भी उसके धुएं से प्रभावित हो सकते हैं। इसे सेकेंड-हैंड स्मोक कहा जाता है। यह बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से हानिकारक हो सकता है। सेकेंड हैंड स्मोकिंग को पैसिव स्मोकिंग भी कहा जाता है और इससे होने वाले खतरे कुछ इस प्रकार हो सकते हैं -

धूम्रपान दुनिया के सबसे ज्यादा हानिकारक नशे में से एक है और इसे छोड़ने का फैसला जितना जल्दी लिया जाए उतना ही सही रहता है और स्वास्थ्य के लिए कई गंभीर समस्याओं का खतरा उतना ही कम हो जाता है। अच्छी बात यह है कि जब व्यक्ति सिगरेट पीना छोड़ देता है, तो उसके बाद शरीर धीरे-धीरे खुद को ठीक करना शुरू कर देता है। धूम्रपान छोड़ने से फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार होता है और दिल की बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है। धूम्रपान छोड़ने से निम्न फायदे हो सकते हैं -
अगर आपको स्मोकिंग की लत लग गई है या फिर आपको लगता है कि आपको इसकी लत लगने वाली है, तो आपको आज से ही इसे छोड़ने का फैसला लेना होगा। धूम्रपान की लत छोड़ने के लिए जो चीज सबसे जरूरी होगी वो आपका मजबूत इरादा है। अगर आप मन ही मन में यह दृढ़ निश्चय कर लेते हैं कि आपको धूम्रपान नहीं करना है, तो आपको धीरे-धीरे खुद ही इससे नफरत होने लगेगी। इसके अलावा भी कुछ चीजें हैं, जिनका ध्यान रखकर आप स्मोकिंग की लत छोड़ सकते हैं -
कभी-कभी सिगरेट पीना भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। तंबाकू का धुआं शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए बेहतर यही है कि धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाए रखें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। स्वस्थ जीवन के लिए जागरूकता और सही निर्णय बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। धूम्रपान से बचकर और संतुलित जीवनशैली अपनाकर हम लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य बनाए रख सकते हैं।
Harish Verma, Associate Director – Pulmonary Medicine & Critical Care, ShardaCare – Healthcity
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।