कैसे जीवन रक्षक साबित हो सकती है ओरल कैंसर स्क्रीनिंग, ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताया महत्व

ओरल कैंसर की जांच करने के लिए सिर्फ 5 मिनट में की जाने वाली स्क्रीनिंग हर व्यक्ति के लिए बेहद फायदेमंद है। इस लेख में एक्सपर्ट ने बताया कि किस तरह मुंह में दिख रहे मामूली लक्षण भी कई बार ओरल कैंसर का संकेत हो सकते हैं और ऐसे में यह स्क्रीनिंग इतनी फायदेमंद कैसे है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 14, 2026 4:53 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Tinku Takia

ओरल कैंसर स्क्रीनिंग में केवल 5 मिनट का समय लगता है, लेकिन कैंसर की तुरंत पहचान करने और इलाज को कारगर बनाने में यह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ओरल कैंसर बहुत मामूली लक्षणों के साथ चुपचाप बढ़ता चला जाता है। मरीज को शुरुआत में न तो कोई दर्द महसूस होता है और न ही कोई बेचैनी होती है, इसलिए इन लक्षणों पर ध्यान नहीं जाता है। मुंह में मामूली दाने, छाले या टिश्यू में छोटे बदलाव उचित जांच के बिना आसानी से नजरअंदाज हो सकते हैं। इसलिए ओरल कैंसर की जांच कराते रहना चाहिए। इससे शुरुआती लक्षणों को तुरंत पहचानने और इलाज को कारगर बनाकर बेहतर नतीजे प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है। जल्दी पहचान के महत्व पर जोर देते हुए, डॉ. टिंकू टाकिया, कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल्स, पटियाला, कहते हैं कि एक छोटा सा ओरल चेकअप भी शुरुआती लक्षणों को पहचानने और इलाज के बेहतर परिणाम पाने में मदद कर सकता है।

ओरल कैंसर स्क्रीनिंग में क्या होता है?

ओरल कैंसर स्क्रीनिंग में मुंह का परीक्षण किया जाता है ताकि कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचाना जा सके। कैंसर होठों, जीभ, जबड़े, मसूढ़े एवं मुँह के अन्य हिस्सों में हो सकता है। यह परीक्षण गालों की अंदरूनी परत, मुंह की निचली और ऊपरी परत, मसूढ़ों, होठों, जीभ और टॉन्सिल्स में होने वाली आसामान्य वृद्धि के लिए किया जाता है। ओरल कैंसर सिर और गर्दन का एक आम कैंसर है, जो पूरी दुनिया में किसी को भी हो सकता है। इसके तुरंत निदान और इलाज के लिए ओरल कैंसर स्क्रीनिंग सबसे प्रभावशाली उपाय है। कुछ लोगों को ओरल कैंसर के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। उन्हें ओरल कैंसर स्क्रीनिंग को अपनी स्वास्थ्य की दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए।

ओरल कैंसर स्क्रीनिंग किन्हें कराते रहना चाहिए

जिन लोगों को ओरल कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है या जिन्हें लग रहा है कि उनकी ओरल हेल्थ में कुछ बदलाव हो रहे हैं तो, उन्हें नियमित तौर से स्क्रीनिंग कराते रहना चाहिए।

  • उम्र के साथ जोखिम बढ़ता है - 30 से 35 साल से अधिक उम्र के लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि उम्र के साथ ओरल हैल्थ की समस्याएं बढ़ती जाती हैं।
  • पुरुषों को अधिक जोखिम होता है - पुरुषों को ओरल कैंसर होने का जोखिम अधिक होता है, इसलिए उन्हें नियमित तौर से स्क्रीनिंग कराते रहना चाहिए।
  • पहले से ओरल हेल्थ खराब होना - जिन लोगों को बार-बार संक्रमण होता रहा है या फिर जिन्हें दांतों की समस्या हो, उन्हें नियमित तौर से जांच कराते रहना चाहिए।
  • कोई लक्षण महसूस होना - अगर मुंह में छाले, गांठ, लाल या सफेद धब्बे दिखाई दे रहे हों, बिना वजह खून निकलता हो या फिर चबाने और निगलने में कठिनाई होती हो, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • परिवार में पहले किसी को ओरल कैंसर हुआ हो - जिन लोगों के परिवार में किसी को कैंसर हो चुका है, उन्हें नियमित तौर से जांच कराते रहना चाहिए।
  • जीवनशैली और जोखिम वाले लोग - नियमित रूप से शराब व धूम्रपान का सेवन करने वाले लोग, जिन्हें पहले एचपीवी संक्रमण हो चुका हो या फिर जो लोग लंबे समय तक धूप में रहते हैं उन्हें ओरल कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।

स्क्रीनिंग के बाद क्या करें?

स्क्रीनिंग के बाद अगला कदम क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्क्रीनिंग में कोई चिंताजनक बात सामने आई है या नहीं। अगर किसी हिस्से में कैंसर विकसित होने का शक है, तो आगे के परीक्षण किए जाते हैं, जिनमें साइटोलॉजी या बायोप्सी शामिल हैं। इन परीक्षणों में पता चल जाता है कि असामान्य और कैंसरयुक्त कोशिकाएं मौजूद हैं या नहीं। अगर डायग्नोसिस में कैंसर की पुष्टि हो जाती है, तो उसके लिए ट्रीटमेंट प्लान तैया किया जाता है।

ओरल कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर होता है कि कैंसर किस हिस्से में विकसित हुआ है और कितना गंभीर हो चुका है। कई मामलों में केवल रेडिएशन थेरेपी या कीमोथेरेपी से कैंसर ठीक हो जाता है। लेकिन अगर कैंसर ज्यादा गंभीर है और काफी फैल चुका है, तो कैंसर के ट्यूमर और प्रभावित टिश्यू को निकालने के लिए सर्जरी करनी पड़ती है।

कभी-कभी आसपास के लिम्फ नोड्स को भी हटाना पड़ सकता है। सर्जरी की सामान्य प्रक्रियाओं में ट्यूमर को काटकर निकालना, ग्लॉसेक्टोमी यानी जीभ का एक हिस्सा या पूरी जीभ काटकर निकालना, मैंडीबुलेक्टोमी, जबड़े का एक हिस्सा काटकर निकालना या लिम्फ नोड्स का इलाज करने के लिए गले की सर्जरी शामिल है।

ओरल कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में

ओरल कैंसर की स्क्रीनिंग कुछ ही मिनटों में हो जाती है, लेकिन यह स्वस्थ रहने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। स्वास्थ्य की नियमित जांच में इसे शामिल करके लोग ओरल हेल्थ में मामूली परिवर्तन होने पर भी उसकी पहचान कर सकते हैं। इससे उन्हें अपनी ओरल हेल्थ बनाए रखने में मदद मिलती है। समय पर निदान होने पर न केवल इलाज आसान होता है, बल्कि मुंह के महत्वपूर्ण कार्यों, जैसे बोलने और खाने की क्षमता को भी बचाया जा सकता है। इसलिए ओरल कैंसर स्क्रीनिंग से न केवल बीमारी से बचाव होता है, बल्कि एक बेहतर स्वास्थ्य और एक बेहतर जीवन पाने में भी मदद मिलती है।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल ओरल कैंसर की स्क्रीनिंग से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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