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Obesity Related Health Problems: मोटापा आज के समय में स्वास्थ्य का सबसे बड़ा दुश्मन है, जिसके कारण एक या दो नहीं बल्कि सैंकड़ों बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है। शरीर के वजन बढ़ने की स्थिति को मोटापा (Obesity) नहीं कहा जाता है, बल्कि जब शरीर का वजन एक सीमित सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है, तो उस स्थिति को मोटापा कहा जाता है। लाइफस्टइल से लेकर कुछ हेल्थ प्रॉब्लम्स तक मोटापे के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिनके बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है। कई ऐसी गंभीर व जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं, जिनका खतरा मोटापे के कारण बढ़ जाता है और अगर सही लाइफस्टाइल जैसे एक्सरसाइज व डाइट की मदद से शरीर के बढ़ते वजन को कम किया जाए तो इन बीमारियों का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है। इस लेख में उन्हीं खतरनाक बीमारियों के बारे में जानेंगे जिनका खतरा मोटापे के कारण और ज्यादा बढ़ जाता है।
लेकिन मोटापा केवल शरीर का आकार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ भी बनता है। खासतौर पर कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिनमें आगे चलकर सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इनमें प्रमुख हैं- हर्निया, पित्त की पथरी और फैटी लिवर। इन बीमारियों का सीधा संबंध बढ़ते वजन और असंतुलित खानपान से जुड़ा है।
डॉ. वैभव गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट - जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर
मोटापे के कारण पेट की मांसपेशियों पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जब यह दबाव लंबे समय तक बना रहता है, तो पेट की अंदरूनी सतह कमजोर होने लगती है और अंदरूनी अंग, जैसे आंत का हिस्सा, बाहर की ओर उभर सकता है। यही स्थिति हर्निया कहलाती है। जिन लोगों के शरीर का वजन ज्यादा बढ़ा होता है, उन्हें अक्सर एब्डॉमिनल या इन्गुइनल हर्निया होने का खतरा ज्यादा रहता है।
इसके शुरुआती लक्षणों में पेट या जांघ के पास सूजन, खड़े होने या वजन उठाने पर दर्द और भारीपन होना आदि शामिल है। कई बार लोग इसे सामान्य सूजन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है। यदि आंत का हिस्सा फंस जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है और तत्काल सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। वजन नियंत्रण, नियमित व्यायाम और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाना इसके खतरे को कम कर सकता है।
शरीर का वजन जितना ज्यादा होता है, वह उतना ही पित्ताशय में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ा देता है और उससे उतना ही पित्त की पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है। अधिक तला-भुना और वसा युक्त भोजन, फास्ट फूड और शारीरिक निष्क्रियता इस जोखिम को और बढ़ा देते हैं।
पित्त की पथरी के लक्षणों में पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में तेज दर्द, उल्टी, गैस और अपच शामिल हैं। कई बार पथरी बिना लक्षण के भी रहती है और अल्ट्रासाउंड के दौरान ही सामने आती है। यदि पथरी बार-बार दर्द दे या संक्रमण का कारण बने, तो गॉलब्लैडर हटाने की सर्जरी (कोलेसिस्टेक्टॉमी) करनी पड़ती है। संतुलित आहार, फाइबर युक्त भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि से इस समस्या से बचाव संभव है।
फैटी लिवर मोटापे से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक है, इसमें लिवर की कोशिकाओं में अत्यधिक फैट जमा हो जाता है। शुरुआत में यह बिना किसी खास लक्षण के रहता है, इसलिए कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता। लेकिन धीरे-धीरे यह सूजन (स्टीटोहेपेटाइटिस), फाइब्रोसिस और गंभीर स्थिति में सिरोसिस का रूप ले सकता है।
मोटापा, टाइप-2 मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं। हालांकि हर मरीज को सर्जरी की जरूरत नहीं होती, लेकिन गंभीर मामलों में लीवर ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ सकती है। फैटी लिवर का सबसे प्रभावी इलाज जीवनशैली में बदलाव है, वजन घटाना, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार।
मोटापा केवल एक बाहरी समस्या नहीं, बल्कि कई सर्जिकल बीमारियों का कारण बन सकता है। हर्निया, पित्त की पथरी और फैटी लिवर जैसी स्थितियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं और समय रहते ध्यान न देने पर जटिल रूप ले सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि वजन को नियंत्रित रखा जाए, रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि की जाए और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराई जाए। सही जीवनशैली अपनाकर इन गंभीर बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।