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Medically Verified By: Dr. Anil Thakwani
Screen Side Effects on Health: स्क्रीन बच्चों के लिए कितनी ज्यादा खतरनाक है, हम शायद अभी तक भी समझ नहीं पाए हैं। अगर घर में बच्चे हमारे आगे घंटों तक फोन चलाते रहते हैं, तो हम बिल्कुल भी अच्छी पेरेंटिंग नहीं कर रहे हैं। लेकिन अब सीरियस होने का समय है और सिर्फ छोटे बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि किशोरों के लिए भी। एक्सपर्ट्स ये मानते हैं कि मोबाइल, लैपटॉप या टीवी ज्यादा देखना यानी स्क्रीन ज्यादा देखना ब्रेन ट्यूमर के खतरे को भी बढ़ा सकता है। सोशल मीडिया और अधूरी जानकारी इस चिंता को और बढ़ा देती है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस विषय को डर की बजाय वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समझना जरूरी है। तो आइए सही बात क्या है इसे जानें।
ब्रेन ट्यूमर एक जानलेवा या जीवन को पूरी तरह से बदल देने वाली ऐसी स्थिति है, जो असल में दिमाग और उसके आसपास की कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि (Abnormal Growth) को कहा जाता है। यह दो प्रकार का होता है प्राइमरी, जो दिमाग में ही शुरू होता है और सेकेंडरी, जो शरीर के किसी अन्य हिस्से से फैल कर दिमाग तक पहुंचता है। अगर ट्यूमर गंभीर है तो उसे मालिग्नैंट ट्यूमर कहा जाता है और अगर गंभीर नहीं है तो उसे बिनाइन ट्यूमर कहा जाता है।
ब्रेन ट्यूमर के कुछ लक्षण ऐसे होते हैं, जो हर व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग देखे जा सकते हैं, जबकि कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जैसे कि वो किसी छोटी-मोटी बीमारी के लक्षण हों जैसे सिर में कभी-कभी या लगातार दर्द रहना, सुबह के समय उल्टी आना और जी मिचलाना आदि। लेकिन कुछ अन्य लक्षण भी हैं, जो गंभीर होते हैं और ब्रेन ट्यूमर के बढ़ने का संकेत हो संकेत हो सकते हैं जैसे नजर धुंधली पड़ जाना, दौरे पड़ना, शरीर का संतुलन न बन पाना, बार-बार भूलना या याददाश्त कमजोर होना और शरीर का कोई हिस्सा ठीक से काम न कर पाना जैसे एक तरफ का पैर या हाथ या फिर दोनों।
विशेषज्ञ का साफ तौर पर कहना है कि अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जो यह साबित करे कि मोबाइल फोन, लैपटॉप या ज्यादा स्क्रीन देखने से ब्रेन ट्यूमर होता है। लेकिन साइंस यह जरूर मानता है कि मोबाइल जैसे डिवाइसेस से निकलने वाली रेडिएशन नॉन-आयोनाइजिंग होती है, जो डीएनए को नुकसान पहुंचाने में सक्षम है। हालांकि, ज्यादा स्क्रीन टाइम से आंखों की समस्या, नींद की कमी, सिरदर्द, मोटापा, मानसिक तनाव आदि जरूर बढ़ सकता है, लेकिन इन्हें ब्रेन ट्यूमर का सीधा कारण नहीं माना जा सकता।
लेकिन इस बात का ध्यान रखना होगा कि ज्यादा स्क्रीनटाइम का मतलब है कि आपकी लाइफस्टाइल खराब हो रही है और खराब लाइफस्टाइल कैंसर व ट्यूमर जैसी बीमारियों को भी बढ़ावा दे सकती है।
ब्रेन ट्यूमर प्रमुख रूप से जेनेटिक होता है और इसके अलावा बचपन में की गई बचपन में सिर पर की गई रेडिएशन थेरेपी भी इसके खतरे को बढ़ा सकती है। आधुनिक जीवनशैली कई बीमारियों से जुड़ी हो सकती है, लेकिन यह ब्रेन ट्यूमर का सीधा कारण नहीं हो सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, सबसे बड़ा बचाव जागरूकता और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना है। अगर किसी बच्चे या युवा में न्यूरोलॉजिकल लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत जांच करवाएं। एमआरआई, सीटी स्कैन जैसी जांच और सही समय पर सर्जरी, रेडिएशन या कीमोथेरेपी से बेहतर परिणाम संभव हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।