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Health Problems That Should Not Be Ignored: अक्सर लोग कान, नाक और गले (ईएनटी) से जुड़ी छोटी-मोटी समस्याओं को हल्के में ले लेते हैं। कान में दर्द, नाक बंद रहना, गले में खराश, आवाज बैठना या बार-बार सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतें आम लगती हैं, इसलिए लोग घरेलू नुस्खों या खुद से दवा लेकर काम चला लेते हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। ईएनटी से जुड़ी समस्याएं केवल असहजता तक सीमित नहीं होती, बल्कि समय पर इलाज न मिलने पर ये सुनने की क्षमता, सांस लेने, बोलने और यहां तक कि जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती हैं। डॉ. सलोनी सिन्हा, ईएनटी, हेड नेक एंड राइनोप्लास्टी सर्जरी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली ने इस बारे में काफी महत्वपूर्ण बातें बताएं जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।
कान में लंबे समय तक इंफेक्शन रहने से सुनने की शक्ति कम हो सकती है। कई मामलों में यह स्थायी भी हो जाती है। बच्चों में बार-बार कान का इंफेक्शन उनकी पढ़ाई और बोलने की क्षमता पर असर डाल सकता है। इसी तरह नाक की समस्या, जैसे एलर्जी या साइनस को नजरअंदाज करने पर बार-बार सिरदर्द, चेहरे में दर्द, सांस लेने में परेशानी और नींद की समस्या हो सकती है।
गले की लगातार खराश, आवाज बैठना या निगलने में दर्द को अगर महीनों तक अनदेखा किया जाए, तो यह क्रॉनिक इंफेक्शन, वोकल कॉर्ड की समस्या या गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है।
कान, नाक और गले के सभी अंग आपस में जुड़े होते हैं, इसलिए नाक की छोटी-सी समस्या भी कान और गले को प्रभावित कर सकती है और गले का इंफेक्शन कान तक फैल सकता है। ऐसे में शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही डॉक्टर से सलाह लेना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि समय पर जांच से बीमारी की सही पहचान हो जाती है और शुरुआती स्टेज में दवाओं से ही समस्या नियंत्रित की जा सकती है, जबकि देर होने पर सर्जरी या लंबे इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
बच्चों में नाक का लगातार बंद रहना, मुंह से सांस लेना, सुनने में कमी या बार-बार गला खराब होना एडिनॉइड या टॉन्सिल की ओर इशारा कर सकता है, वहीं बुज़ुर्गों में सुनाई कम देना या आवाज़ में बदलाव को अक्सर उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि कई मामलों में यह पूरी तरह इलाज योग्य होता है।
कान में लगातार दर्द रहना, पस आना या सुनाई कम देना, नाक से बार-बार खून आना या लंबे समय तक नाक बंद रहना, गले में दो हफ्तों से अधिक खराश या आवाज का बैठ जाना और निगलने में दर्द या गले में गांठ-सी महसूस होना ऐसे लक्षण हैं जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन संकेतों पर समय रहते ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराने से गंभीर बीमारियों का खतरा टल सकता है।
दरअसल, कान, नाक और गले की समस्याओं को हल्के में लेना समझदारी नहीं है, क्योंकि शुरुआती देखभाल न केवल दर्द और असुविधा से राहत दिलाती है, बल्कि आगे चलकर होने वाली बड़ी और जटिल परेशानियों से भी बचाव करती है। सही समय पर किया गया छोटा-सा इलाज भविष्य की बड़ी समस्या को रोकने में अहम भूमिका निभाता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।