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कैसे पता चलेगा कि हार्ट वाल्व खराब हो रही है? किन लक्षणों को इग्नोर करना हो सकता है जानलेवा

हार्ट वाल्व डिजीज के कुछ लक्षण ऐसे भी हैं, जिन्हें लोग अक्सर सामान्य समस्याएं समझ लेते हैं और बाद में स्थिति गंभीर हो सकती है। इस लेख में एक्सपर्ट आपको ऐसे ही लक्षणों के बारे में बताने वाले हैं, जो हार्ट वाल्व डिजीज का संकेत हो संकेत हो सकते हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : July 30, 2026 9:43 PM IST

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Medically Verified By: Vaibhav Mishra

हमारे शरीर के कुछ अंग ऐसे होते हैं, जो लगातार बिना रुके काम करते हैं जिनमें से दिल भी एक है। हालांकि, इसमें ध्यान देना होगा कि दिल का काम मेहनत वाला होता है, जो शरीर के हर एक हिस्से तक खून पहुंचाता है जो कि एक मेहनत का काम है। सरल शब्दों में कहें तो यह एक पंप की तरह होता है और जिस तरह पंप होता है और जिस प्रकार पंप के साथ अलग-अलग पाइप व वाल्व जुड़ी होती हैं, हार्ट में भी धमनियां व वाल्व होती हैं। लेकिन हार्ट कि वाल्व ऑटोमेटिक होती हैं, जो सही समय पर खुलती व बंद होती रहती हैं ताकि खून पीछे से आए और की तरफ धकेला जाए। लगातार सिकुड़ने और फैलने वाली इन वाल्व को हार्ट वाल्व कहा जाता है और इनका सही से काम करना बेहद जरूरी है। लेकिन कुछ कारणों से हार्ट वाल्व में भी दिक्कत आ सकती है और कई बार शुरुआत की दिक्कत का पता नहीं चल पाता क्योंकि शुरुआती लक्षण बेहद आम होते हैं। पटपड़गंज स्थित मैक्स हॉस्पिटल के सीनियर डायरेक्टर कार्डियक साइंसेस के डॉ. वैभव मिश्रा ने हार्ट से जु़ड़ी इन समस्याओं के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी और बताया कि कौन से ऐसे लक्षण हैं जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए।

समझें क्यों हमारे दिल का जरूरी हिस्सा हैं ये वाल्व

हमारे दिल में कुल चार वाल्व होती हैं और इनका मुख्य काम खून आगे बढ़ने के लिए रास्ता देना और वापस पीछे बहने से रोकना होता है। इस प्रोसेस को यूनिडायरेक्शनल ब्लड फ्लो कहा जाता है। आपको इस मेडिकल टर्म को याद रखना चाहिए, क्योंकि यह आगे की प्रोसेस को समझने में आपके काम आने वाली है। जब किसी कारण से ये हार्ट वाल्व समय पर ठीक से बंद न हो पाएं और खून आगे बढ़ने की बजाय पीछे भी बढ़ने लगे तो हार्ट पर दबाव पड़ता है और साथ ही शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून भी नहीं मिल पाता है। इसी कंडीशन को हार्ट वाल्व डिजीज कहा जाता है।

हार्ट वाल्व डिजीज के प्रकार

हार्ट वाल्व से जुड़ी बीमारियां आमतौर पर दो अलग-अलग प्रकार की होती हैं, जिन्हें निम्न नामों से जाना जाता है -

  • स्टेनोसिस (Stenosis) - इस स्थिति में पहली वाल्व सिकुड़ जाती है या किसी कारण से उसका आकार अंदर से छोटा होने लगता है। इस कारण से वाल्व के अंदर से पर्याप्त खून नहीं निकल पाता है।
  • रिगर्जिटेशन (Regurgitation) - इसमें हार्ट वाल्व की प्रोसेस प्रभावित हो जाती है और वह समय पर ठीक से बंद नहीं हो पाती है। इस कारण से ब्लड पंप की प्रोसेस के दौरान खून पीछे की तरफ भी लीक होने लगता है, जिससे पूरी प्रोसेस प्रभावित हो जाती है।

stenosis vs regurgitation stenosis vs regurgitation (AI generated Image)

हार्ट वाल्व डिजीज के लक्षण

हार्ट वाल्व डिजीज भले ही दो अलग-अलग प्रकार की होती हैं, लेकिन इनसे ब्लड पंप प्रोसेस प्रभावित होती है और इसलिए व्यक्ति को महसूस होने वाले लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं जो इस प्रकार हैं -

1. सांस फूलना - यह हार्ट वाल्व डिजीज का सबसे पहला लक्षण है और इसलिए होता है क्योंकि दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून नहीं जा पाता है। ऐसे में दिमाग को लगता है कि शायद ऑक्सीजन की कमी हो गई है और वह फेफड़ों को और तेज और गहरी सांस लेने का संकेत देता है।

अगर कोई काम आप पहले आसानी से कर लेते थे जैसे सीढ़ियां चढ़ना आदि और अब इसमें सांस फूलने लगता है व बैठने से आराम मिलता है तो यह हार्ट वाल्व डिजीज का लक्षण हो सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि डॉक्टर से जांच के बाद ही हो सकती है, क्योंकि कई अन्य सामान्य व गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं जिनके कारण व्यक्ति को सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

2. दिल की धड़कन बढ़ना - इसे मेडिकल भाषा में हार्ट पल्पिटेशन कहा जाता है और यह बेहद महत्वपूर्ण लक्षण है, क्योंकि यह सीधा हार्ट से जुड़ी किसी न किसी समस्या का ही संकेत देता है जिनमें हार्ट वाल्व डिजीज भी एक है। लंबे समय तक इस लक्षणों को इग्नोर करना आपके हार्ट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

अगर बिना कोई मेहनत का काम किए भी आपके दिल की धड़कन बढ़ी हुई है तो इसे गलती से भी नजरअंदाज न करें। दिल की धड़कन बढ़ने का मतलब यह है कि किसी कारण से आपका हार्ट पर्याप्त ब्लड पंप नहीं कर पात रहा है और इस कारण से उसने ज्यादा मेहनत करना शुरू कर दिया है। हालांकि, हार्ट पल्पिटेशन भी कई अन्य बीमारियों का संकेत हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह किसी न किसी गंभीर समस्या का ही संकेत होता है और इसलिए डॉक्टर से समस्या की पुष्टि जरूर कराएं।

3. चक्कर आना - यह भी कई मामलों में हार्ट से जुड़ी किसी समस्या या फिर हार्ट वाल्व डिजीज का संकेत हो सकता है। यह भी ठीक सांस फूलने जैसी स्थिति के कारण ही होता है। जब हार्ट वाल्व डिजीज के कारण पर्याप्त मात्रा में ब्लड पंप नहीं हो पाता है, तो ब्रेन में ऑक्सीजन युक्त रक्त की कमी होने लगती है। ऑक्सीजन की कमी होने के कारण चक्कर आना या सिर घूमने जैसे लक्षण होने लगते हैं।

अगर आपको पहले चक्कर आने की समस्या नहीं थी और अब अचानक से चक्कर आने जैसा महसूस होने लगता है तो इस स्थिति को इग्नोर न करें। खासतौर पर अगर आपको सीढ़ियां चढ़ने, चलने, कोई छोटी-मोटी शारीरिकत गतिविधि करने या यहां तक कि कुछ देर बैठने के बाद अचानक से उठने के बाद भी चक्कर आएं तो डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करें। हालांकि, जरूरी नहीं है कि यह हार्ट वाल्व डिजीज का ही लक्षण हो, लेकिन फिर भी इसकी जांच कराकर पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

4. दिनभर थकान व कमजोरी - लोग अक्सर इस तरह के लक्षण को आम समझ लेते हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि कमजोरी या थकान होना सामान्य शारीरिक समस्या ही हो। हार्ट डिजीज व हार्ट वाल्व डिजीज के मरीजों में भी इस तरह के लक्षण आमतौर पर देखे जाते हैं। ऐसा आमतौर पर इसलिए होता है, क्योंकि दिमाग सहित शरीर के अन्य अंगों को भी ऑक्सीजन पर्याप्त नहीं मिल रहा होता है और हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही होती है जिसका असर आपकी एनर्जी व अन्य स्वास्थ्य पर पड़ता है।

इसलिए अगर आपको पहले ऐसा महसूस नहीं होता था और अब होने लगा है, तो डॉक्टर से इस बारे में एक बार जरूर बात करें। थोड़ा-सा काम करने पर भी शरीर में कमजोरी महसूस होती है या पर्याप्त आराम करने के बाद भी आपको अच्छा महसूस नहीं होता है, तो इस स्थिति को नजरअंदाज न करें। ऐसे में जल्द से जल्द इसकी जांच कराकर सही कारण का पता लगा लेना चाहिए।

heart valve disease symptoms heart valve disease symptoms (AI generated Image)

हार्ट वाल्व डिजीज से जुड़े अन्य लक्षण

ऊपर बताए ये लक्षण आमतौर पर हार्ट वाल्व से जुड़े कुछ प्रमुख लक्षण हैं, लेकिन इनके अलावा भी कुछ लक्षण हैं जो हार्ट वाल्व के मरीजों में देखे जा सकते हैं और इनमें आमतौर पर निम्न शामिल हैं -

  • दोनों पैरों में सूजन
  • गर्दन की नसों का उभरना
  • पेट में सूजन या पानी भरना

हालांकि, ये लक्षण आमतौर पर तब दिखाई देते हैं, जब हार्ट वाल्व डिजीज आगे बढ़ चुकी होती है और स्थिति गंभीर हो जाती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को इस तरह का कोई लक्षण महसूस होने लगता है, तो ध्यान रहे कि यह एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है और गलती से भी इसे सामान्य कमजोरी या बढ़ती उम्र का संकेत समझ कर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

कैसे होगी हार्ट वाल्व डिजीज की पुष्टि

अगर किसी व्यक्ति को ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई एक या उससे ज्यादा महसूस हो रहे हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द डॉक्टर से जांच कराने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर आपके लक्षणों के बारे में आपसे पूछेंगे और फिर उसके बाद 2D इकोकार्डियोग्राफी (2D Echocardiography) करेंगे, जो एक स्पेशल टेस्ट होता है और यह पूरी तरह से सरल व सुरक्षित प्रोसेस है और बिना किसी दर्द के कुछ ही मिनटों में OPD में की जा सकती है। 2D इकोकार्डियोग्राफी की मदद से पता चलता है कि -

  • हृदय की पंपिंग क्षमता कैसी है
  • हृदय का आकार सामान्य है या नहीं
  • चारों वाल्व सही तरह से काम कर रहे हैं या नहीं
  • सही समय पर जांच कराने के फायदे

हार्ट वाल्व एक बेहद गंभीर और जानलेवा हेल्थ कंडीशन है, लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर समय पर जांच करके स्थिति के अनुसार इलाज शुरू किया जाए तो अधिकांश हार्ट वाल्व कंडीशन्स का इलाज सफलतापूर्वक हो जाता है। समय पर जांच कराने का यह भी फायदा है कि स्थिति को गंभीर होने से पहले ही उसका पता लगा लिया जाता है और ऐसे में दवाइयों, कैथेटर बेस्ड तकनी या सर्जरी आदि की मदद से सफलतापूर्वक स्थिति का इलाज किया जा सकता है।

डिसक्लेमर: हार्ट वाल्व डिजीज एक बेहद गंभीर रोग हो सकता है और समय पर जांच न कराने से स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो सकती है। इस लेख का उद्देश्य केवल हार्ट वाल्व डिजीज के बारे में जानकारी देना है और इसमें दी गई कोई भी जानकारी हार्ट से जुड़ी किसी भी समस्या के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं की जानी चाहिए। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।