
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : March 29, 2025 1:48 PM IST
Signs and symptoms glaucoma: ग्लूकोमा को प्रमुख आंखों की बीमारियों में एक गिना जाता है। ज्यादातर लोगों को ग्लूकोमा की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और इसके पीछे का कारण है इसके शुरुआती लक्षणों को इग्नोर करना। रतन ज्योति नेत्रालय के संचालक और वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पुरेंद्र भसीन ने ग्लूकोमा के बारे में कुछ ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियां दी, साथ ही इसके शुरुआती लक्षण व बचाव के बारे में भी बताया। डॉक्टर पुरेंद्र के अनुसार ग्लूकोमा, जिसे काला मोतिया, काला पानी या कांचबिंदु भी कहा जाता है, एक गंभीर नेत्र रोग है जिसमें आंखों के अंदर दबाव (इंट्राओक्युलर प्रेशर) बढ़ जाता है। यह दबाव ऑप्टिक नर्व पर प्रभाव डालता है, जिससे धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होती जाती है। यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो व्यक्ति पूरी तरह अंधेपन का शिकार हो सकता है। इसलिए ग्लूकोमा को "साइलेंट थीफ ऑफ विजन" यानी "चुपचाप रोशनी चुराने वाली बीमारी" भी कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी बड़े संकेत के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को खत्म कर देता है। एक बार जो रोशनी चली जाती है, वह वापस नहीं आ सकती।
डॉक्टर पुरेंद्र भसीन के अनुसार ग्लूकोमा के कुछ शुरुआती लक्षण इस तरह के हो सकते हैं, जिन्हें इग्नोर नहीं किया जाना चाहिए -
1. दृष्टि क्षेत्र का धीरे-धीरे कम होना - ग्लूकोमा के शुरुआती चरणों में आंखों का विज़न फील्ड (दृष्टि क्षेत्र) संकुचित होने लगता है। पहले किनारों से देखना मुश्किल होता है, और धीरे-धीरे केंद्र की दृष्टि भी प्रभावित हो सकती है।
2. आंखों में भारीपन और दर्द - आंखों में भारीपन, दर्द या सिर में दबाव महसूस होना ग्लूकोमा का संकेत हो सकता है। इसके साथ-साथ, कुछ मरीजों को धुंधला दिखाई देने की शिकायत भी हो सकती है।
3. रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुषी गोले दिखना - आंखों के अंदर बढ़ते दबाव के कारण जब व्यक्ति किसी तेज रोशनी की ओर देखता है, तो उसे रंगीन या इंद्रधनुषी गोले दिखाई दे सकते हैं। यह ग्लूकोमा का एक स्पष्ट संकेत हो सकता है।
4. अंधेरे में देखने में कठिनाई - ग्लूकोमा से पीड़ित व्यक्ति को कम रोशनी में या अचानक उजाले से अंधेरे में जाने पर देखने में दिक्कत हो सकती है। यह एक महत्वपूर्ण लक्षण है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
5. चश्मे का नंबर बार-बार बदलना - यदि किसी व्यक्ति का चश्मे का नंबर बार-बार बदल रहा हो, तो यह भी ग्लूकोमा का संकेत हो सकता है। खासतौर पर अगर नंबर में बदलाव तेजी से हो रहा है, तो तुरंत नेत्र चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
डॉक्टर पुरेंद्र भसीन ने ग्लूकोमा से बचाव करने के लिए कुछ तरीकों के बारे में बताया जो इस प्रकार हैं -
1. नियमित नेत्र परीक्षण कराएं - यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है, तो साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच करवाना बहुत जरूरी है। यदि डॉक्टर ने आपकी आंखों की संरचना और ऑप्टिक नर्व के आधार पर ग्लूकोमा की आशंका जताई है, तो आपको हर 6 महीने में जांच करानी चाहिए।
2. पारिवारिक इतिहास को नजरअंदाज न करें - यदि आपके माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी या बड़े भाई-बहन में से किसी को ग्लूकोमा हो चुका है, तो आपके लिए इसका खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे में, आपको आंखों की समय-समय पर जांच अवश्य करानी चाहिए।
3. लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें - यदि आपकी आंखों में लगातार भारीपन, दर्द या धुंधलापन बना रहता है या चश्मे का नंबर तेजी से बदल रहा है, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लें।
4. स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं - नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और आंखों पर अत्यधिक तनाव से बचाव करने से भी ग्लूकोमा के जोखिम को कम किया जा सकता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।