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PCOS And Risk Of Diabetes: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), जिसे पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (पीसीओडी) के नाम से भी जाना जाता है, एक हार्मोनल डिसऑर्डर है जो आमतौर पर महिलाओं को उनकी जिंदगी के उन वर्षों में होती है जब उन्हें गर्भधारण और प्रजनन जैसे काम करने होते हैं। इसीलिए, पीसीओएस होने पर ज्यादातर लक्षण ऐसे दिखायी देते हैं जो प्रजनन प्रणाली से संबंधित हैं। एंड्रोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ दीपिका पटेल (एमडी मेडिसिन एम्स नई दिल्ली, डीएम एंडोक्रिनोलॉजी जिपमेर, पांडिचेरी) का कहना है कि पीसीओएस होने से डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है। डॉ. दीपिका पटेल बता रही हैं कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं के लिए डायबिटीज का रिस्क कितना अधिक है और इससे बचाव के उपाय। (PCOS And Risk Of Diabetes In Hindi.)
डॉ. दीपिका पटेल कहती हैं कि, पीसीओएस एक ऐसी स्थिति है जिसमे आपके शरीर में हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, विशेष रूप से इंसुलिन नामक हार्मोन (जो ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है) उसका स्तर अनियंत्रित हो जाता है। इस स्थिति में, शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति अच्छी तरह से प्रतिक्रिया नहीं कर पाती और इस वजह से शरीर हार्मोन का अधिक उत्पादन करता है। इससे हमारे ब्लड में इंसुलिन का लेवल बहुत अधिक बढ़ जाता है। वहीं, शरीर के लिए इस हाई ब्लड शुगर लेवल को सही ढंग से नियंत्रित कर पाना मुश्किल हो जाता है और इस गड़बड़ी की वजह से टाइप 2 डायबिटीज की बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
वहीं अगर पीसीओएस के साथ महिला मोटापे से भी पीड़ित है, तो इससे डायबिटीज होने का खतरा और भी बढ़ जाता है। पीसीओएस और डायबिटीज के बीच का यह संबंध बहुत परेशानीभरा और गम्भीर हैऔर इस बीमारी के बढ़ने में अन्य कई चीजें भी कारण बनती हैं। जैसे अनुवांशिक कारण, शरीर में सूजन की समस्या और अनहेल्दी लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न कारणों से टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में बढ़ता है।
हालांकि, अगर लाइफस्टाइल में बदलाव किए जाए तो पीसीओएस के मैनेजमेंट और डायबिटीज के रिस्क को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पीसीओएस में डायबिटीज के रिस्क को कम करने के लिए अपनी जीवनशैली में इस तरह के बदलाव कर सकते हैं:
इंसुलिन के लिए शरीर की कोशिकाओं की प्रतिक्रिया में सुधार करने और इंसुलिन् लेवल को संतुलित करने के लिए आप बैलेंस्ड और पौष्टिक आहार अपना सकते हैं। यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने मे भी मदद हो सकती है। अपने रोजमर्रा के खान-पान में पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स शामिल करें। मिलेट्स, साबुत अनाज, फल-सब्जियां और लीन मीट शामिल करें।
ब्रेड, मैदा, पास्ता, नूडल्स और शक्कर जैसी प्रोसेस्ड चीजों का सेवन ना करें। रिफाइंड कार्ब्स के सेवन से भी बचें। इसी तरह बाजार में मिलने वाले मीठे ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन भी ना करेंँ।
:वजन कम करने के अलावा , इंसुलिन एक्टिविटी को बढ़ाने और मधुमेह के जोखिम को कम करने के लिए नियमित व्यायाम करें। प्रतिदिन कम से कम 20-30 मिनट तक कसरत करें। एक्सरसाइज जैसी हेल्दी आदते आपकी ओवरऑल हेल्थ को सुधारने का काम करती है। फिजिकली एक्टिव रहने के लिए आप ऐसी एक्टिविटीज और हॉबीज अपना सकते हैं जो आपको पसंद हो। जैसे अगर जिम जाना पसंद नही करते तो आप स्विमिंग, जॉगिंग और फुटबॉल खेलने जैसे काम सकते हैं।
क्रोनिक स्ट्रेस या बहुत अधिक समय से तनाव से पीड़ित रहने वाली महिलाओं में पीसीओएस के गम्भीर लक्षण दिखायी दे सकते हैं। इससे ब्लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है। तनाव से बचने के लिए ध्यान, योग,डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। प्रकृति के बीच समय बिताने और आराम करने से भी तनाव कम होता है।