बच्चों में सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर और उसके शुरुआती लक्षण
कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं जिनमें कुछ प्रकार के कैंसर ऐसे भी हैं जो बच्चों में काफी अधिक देखे जाते हैं। इस लेख में एक्सपर्ट्स से ऐसे ही कैंसर के बारे में कुछ खास जानकारियां लेंगे।
कैंसर सिर्फ बड़ों की बीमारी नहीं है, बल्कि बच्चों में भी यह हो सकता है। हालांकि, यह बात सच है कि बड़ों में होने वाले कैंसर कई अलग-अलग कारणों से होते हैं जैसे धूम्रपान, केमिकलों के संपर्क में आना या जेनेटिक कंडीशन आदि। जबकि बच्चों में ज्यादातर कैंसर जेनेटिक कंडीशन से ही जुड़े हो सकते हैं। यहां तक कि कुछ कैंसर ऐसे भी हैं जो बच्चों में काफी ज्यादा पाए जाते हैं। डॉ. विपिन खंडेलवाल, कंसल्टेंट पीडियाट्रिक हेमाटो-ऑन्कोलॉजी एंड बोन मेरी ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल नवी मुंबई के अनुसार बच्चों में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर ल्यूकेमिया है, जिसे रक्त का कैंसर भी कहा जाता है। इसमें भी एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (Acute Lymphoblastic Leukemia - ALL) सबसे आम प्रकार है। यह विशेष रूप से 2 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों में अधिक देखा जाता है और बचपन में होने वाले कुल कैंसर मामलों में लगभग एक-तिहाई इसी के होते हैं।
बच्चों में कैसे होता है ल्यूकेमिया?
ल्यूकेमिया आमतौर पर बोनमेरो में शुरू होने वाला कैंसर है, जिसमें असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं तेजी से बड़ने लगती है और स्वस्थ रक्त कोशिकाओं की जगह ले लेती हैं। इसके कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता क्जोर पड़ने लगती है और रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया भी बाधित हो जाती है।
बच्चों में ल्यूकेमिया के लक्षण
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ल्यूकेमिया के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य वायरल संक्रमण या बचपन की आम बीमारियों जैसे दिखाई देते हैं और इस कारण से लंबे समय तक उन्हें इग्नोर किया जाता है। माता-पिता के लिए इन संकेतों के प्रति जागरूक रहना बेहद आवश्यक है और इसलिए निम्न लक्षणों को विशेष रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए -
- बार-बार बुखार आना और टेस्ट के रिजल्ट में इन्फेक्शन भी न दिखना
- बच्चे में लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती रहना
- बच्चे की स्किन पीली पड़ जाना (जो आमतौर पर खून की कमी के कारण होती है)
- छोटी मोटी चोट से भी ज्यादा खून बहना या बार-बार नाक या मसूड़े से खून आना
- त्वचा पर बार-बार नील पड़ जाना हल्की से चोट से ही नील पड़ जाना
- बच्चा चलने से मना करना या लंगड़ाते हुए चलना ( जो हड्डियों या जोड़ों में दर्द का संकेत है)
- बार-बार या गंभीर संक्रमण होना (इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण)
- बच्चे की लिम्फ नोड्स में सूजन आना (खासतौर पर गर्दन, बगल या कमर में सूजन दिखना)
- भूख कम लगना या बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन घटने लगना
- लिवर या तिल्ली बढ़ने के कारण पेट में सूजन या भारीपन महसूस होना
इसके अलवा बच्चों में ल्यूकेमिया के कारण शुरुआत में कुछ अन्य लक्षण भी महसूस हो सकते हैं जैसे सिरदर्द रहना, उल्टी आना, धुंधला दिखाई देना और संतुलन बिगड़ना आदि। इस तरह के लक्षण तब होते हैं, जब कैंसर के कारण तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो चुका होता है।
कैसे करें रोग की पहचान?
हालांकि, ऐसा नहीं है कि इनमें से कोई एक लक्षण दिखना ल्यूकेमिया का ही संकेत हो बल्कि ज्यादातर मामलों में ये सामान्य बीमारियों का ही संकेत होते हैं इसलिए सिर्फ एक लक्षण होना आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होता। लेकिन फिर भी स्थिति की पुष्टि डॉक्टर से जांच कराने के बाद ही होनी चाहिए। हालांकि, अगर ये लक्षण महसूस हो रहे हैं और निम्न स्थितियां हैं तो बिना देरी किए जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जाती है -
- अपेक्षा से अधिक समय तक बने रहें
- बार-बार लौटकर आएं
- लगातार बढ़ते जाएं
- एक साथ कई लक्षण दिखाई दें, जैसे बुखार, नील पड़ना और अत्यधिक थकान,
जल्दी पहचान क्यों जरूरी है?
ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर आज के समय में बच्चों में काफी ज्यादा देखा जाने वाला कैंसर तो है ही साथ ही साथ यह इसका इलाज भी संभव है। लेकिन इसके इलाज की संभावना उतनी ही ज्यादा बढ़ती है जितनी जल्दी इसकी पहचान होकर इलाज शुरू हो जाता है। यही कारण है कि जल्द से जल्द लक्षणों की पहचान बहुत जरूरी है, ताकि जल्द से जल्द जांच करके स्थिति के अनुसार इलाज शुरु किया जा सके।
शुरुआती जांच के रूप में एक साधारण कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) टेस्ट किया जाता है, जिसके बाद आवश्यकता होने पर अन्य विशेष जांचें की जाती हैं। समय पर निदान और उपचार से बच्चों के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है और जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है।
पेरेंट्स के लिए खास सलाह
यदि आपके बच्चे को लगातार बुखार, असामान्य रूप से नील पड़ना, बिना कारण अत्यधिक थकान या हड्डियों में दर्द जैसी शिकायतें हो रही हैं जो या तो बार-बार हो रही हैं या फिर लगातार बनी हुई हैं तो इन्हें केवल सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज न करें। अधिकांश मामलों में इनके पीछे सामान्य कारण होते हैं, लेकिन यदि लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है। समय पर पहचान और उपचार बच्चे का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल बच्चों में सबसे ज्यादा होने वाले कैंसर के बारे में जानकारी देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।