क्या डायबिटिक रेटिनोपैथी में व्यक्ति पूरी तरह से अंधा हो जाता है? जानें डायबिटीज में आंखों को डैमेज से जुड़े मिथ्स एंड फैक्ट्स
एक्सपर्ट के अनुसार, डायबिटिक रेटिनोपैथी से जुड़े कई मिथक भी हैं जो लोगों में गलत जानकारियों के कारण बन सकते हैं और लोग उन पर आसानी से भरोसा भी कर लेते हैं।
Myths About Diabetes Retinopathy: डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह की बीमारी से जुड़ी एक गंभीर जटिलता है जो आंखों को प्रभावित करती है। इसकी वजह से दृष्टि कमजोर होने या अंधेपना का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति मुख्य रूप से हाई ब्लड शुगर लेवल के कारण होती है जो रेटिना को रक्त की आपूर्ति करने वाली छोटी रक्त वाहिकाओं के नेटवर्क को नुकसान पहुंचाती है। यह आमतौर पर मामूली बीमारी के रूप में शुरू होती है जिसके बाद कुछ लोगों की दृष्टि में बदलाव होते हैं, जैसे कि पढ़ने में या दूर की वस्तुओं को देखने में दिक्कतें आना। बीमारी के आगे के चरणों में, रेटिना की रक्त वाहिकाओं से आपकी आंख में भरे नेत्रकाचाभ द्रव में रक्त स्राव होने लगता है जिससे अस्थायी या स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है।
इस गंभीर स्थिति से जुड़े कई मिथक भी हैं जो लोगों में गलत जानकारियों के कारण बन सकते हैं और जिनकी वजह से लोग डायबिटिक रेटिनोपैथी के बारे में सुनकर डर सकते हैं या उनमें अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है। आणंद, गुजरात से विट्रेओ-रेटिना सर्जन डॉ. बिरवा दवे (Dr. Birva Dave, Vitreo-Retina Surgeon, DNB, MRCS, FICO, Anand, Gujarat) बता रही हैं कुछ ऐसे ही कॉमन मिथकों के बारे में पढ़ें साथ ही जानें इनसे जुड़े सही तथ्य और तर्क।
मिथक 1: डायबिटिक रेटिनोपैथी केवल बुजुर्गों को प्रभावित करता है।
सच: वैसे तो डायबिटिक रेटिनोपैथी का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है, किन्तु यह मधुमेह से पीड़ित किसी भी उम्र के व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है। डायबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या होने में मधुमेह की अवधि और प्रबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उम्र चाहे कुछ भी हो, इस स्थिति का शीघ्र पता लगाने और उसका प्रबंधन करने के लिए, नियमित आंखों की जांच करवाना आवश्यक है।
मिथक 2: मेरी दृष्टि एकदम सही है, इसलिए मुझे डायबिटिक रेटिनोपैथी के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।
सच: डायबिटिक रेटिनोपैथी अक्सर प्रारंभिक अवस्था में बिना किसी लक्षण के विकसित होता है। जब तक दृष्टि संबंधी समस्याएं स्पष्ट होंगी, तब तक रोग काफ़ी बढ़ चुका होगा। भले ही आपकी दृष्टि सही हो, पर फिर भी नियमित नेत्र जांच करवाना डायबिटिक रेटिनोपैथी का शीघ्र पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण है, जब यह अधिक प्रबंधनीय होता है।
मिथक 3: अगर मेरा ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में है, तो मुझे डायबिटिक रेटिनोपैथी नहीं होगा।
सच: रक्त में ग्लूकोज का लेवल नियंत्रित करना डायबिटीज मैनेजमेंट का एक महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन यह डायबिटिक रेटिनोपैथी से प्रतिरक्षा की गारंटी नहीं देता है। अन्य कारक, जैसे कि रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल का स्तर और आनुवंशिक प्रवृत्ति भी इस स्थिति के विकास में भूमिका निभाते हैं। आंखों की नियमित जांच सहित व्यापक मधुमेह देखभाल आवश्यक है।
मिथक 4: डायबिटिक रेटिनोपैथी केवल टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित लोगों को प्रभावित करती है।
सच: टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह दोनों के रोगियों में डायबिटिक रेटिनोपैथी विकसित होने का खतरा होता है। मधुमेह की अवधि के साथ-साथ जोखिम भी बढ़ता जाता है। इसके अतिरिक्त, गर्भावस्था के दौरान गर्भकालीन मधुमेह के कारण भी डायबिटिक रेटिनोपैथी विकसित हो सकता है।
मिथक 5: डायबिटिक रेटिनोपैथी से व्यक्ति पूर्ण रूप से अंधा हो जाता है।
सच: डायबिटिक रेटिनोपैथी से पीड़ित हर व्यक्ति अंधा नहीं होता। शीघ्र पता लगने, उचित प्रबंधन और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप के साथ, रोग की प्रगति को धीमा किया या रोका जा सकता है। दृष्टि बचाने के लिए नियमित आंखों की जांच करवाना और एडवांस ट्रीटमेंट प्लानिंग करने और उसे फॉलो करना महत्वपूर्ण है।