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Written By: Jitendra Gupta | Updated : June 21, 2023 12:45 PM IST
मोबाइल और कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल से शरीर की ये हड्डियां हो रही कमजोर! जानें किस उम्र के रोगियों की बढ़ी संख्या
भारत को दुनिया का सबसे युवा देश कहा जाता है। हमारे देश में अधिक युवा हैं और यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन, वर्तमान में युवाओं में कंप्यूटर और मोबाइल गेमिंग के अत्यधिक इस्तेमाल में बढ़ोतरी देखी जा रही है। घंटों मोबाइल पर एक जगह बैठे रहने से आंखों और दिमाग पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके अलावा कमर, कंधे और रीढ़ की हड्डी में दर्द (सर्वाइकल स्पाइन) की समस्या बढ़ती जा रही है। अस्पताल की ओपीडी में आनेवाले 60 फीसदी मरीज रीढ़ की हड्डी के दर्द से परेशान हैं। यह सभी मरीज ऑफिस के कर्मचारी हैं। घंटों कंप्यूटर और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के कारण वे जोड़ों के दर्द से परेशान हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग एक करोड़ लोग सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से पीड़ित होते हैं। वयस्कों में गर्दन के दर्दकी घटनाएं सालाना 25-50 फीसदी होती हैं। 50 वर्ष से अधिक आयु के 75 % लोगों को स्पाइनल कैनाल की समस्या है। आजकल युवाओं में सर्वाइकल स्पाइन और जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ती जा रही है, जिसके मुख्य कारण हैंः
1- लैपटॉप, स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग
2- गतिहीन जीवन शैली
3- खराब शारीरिक मुद्रा
4- गाने सुनते हुए या गेम खेलते हुए खाने की आदत कम उम्र के बच्चों में बहुत खतरनाक होती है।
5-24 घंटे उनके हाथ में मोबाइल और गलत पोजीशन में बैठने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से उंगलियों, हाथों, पीठ और गर्दन में बहुत दर्द हो सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया तो आगे चलकर यह और गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
जायनोवा शाल्बी हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक एंड नी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. धनंजय परब का कहना है कि किसी भी चीज का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल खराब होता है। कंप्यूटर, फोन के ज्यादा इस्तेमाल से कलाई में सुन्नता और दर्द हो सकता है। इससे आपके हाथों पर जोर पड़ता है। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से गर्दन नीचे की ओर रहती है, जिससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी की समस्या हो सकती है। साथ ही मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से कंधे और कमर में दर्द हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ओपीडी में प्रतिदिन 2 से 3 मरीज मोबाइल फोन के प्रयोग के कारण जोड़ों और अंगुलियों में दर्द की शिकायत लेकर आते हैं। इस मरीज की उम्र 20 से 40 साल के बीच है। अब तो 20 साल से कम उम्र के बच्चे भी इलाज के लिए आने लगे हैं। इसके अलावा ऑफिस के काम की वजह से भी कई लोग जोड़ों के दर्द से परेशान होते हैं। समय पर निदान होना बहुत जरूरी है। क्योंकि जोड़ों का दर्द ज्यादा होने पर सर्जरी की आवश्यकता होती हैं।
नेक्सस के विशेषज्ञ और आर्थ्रोस्कोपी सर्जन डॉ. यजुवेंद्र गवई ने कहा कि अक्सर चोटों से कंधे में दर्द और सूजन होने की संभावना अधिक होती है। कंधे के दर्द के कारण का पता लगाने के लिए एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई या इलेक्ट्रोमोग्राफी (ईएमजी) जैसे मेडिकल परीक्षण किए जाते हैं। कंधे के दर्द को बढ़ने से गंभीर स्थिति को रोकने के लिए समय पर निदान और उपचार आवश्यक है।
अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के कंधे और घुटने के सर्जन डॉ. उत्कर्ष पवार ने कहा कि मोबाइल या कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल से कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द हो सकता है। यह स्थिति अक्सर जोड़ों में अकड़न और दर्द का कारण बनती है। अगर समय पर इलाज नहीं किया जाता है, तो पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस से रीढ़ की हड्डी टूट सकती है। पीठ, कंधे और रीढ़ की हड्डी के दर्द को रोकने के लिए नियमित व्यायाम आवश्यक है। स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज फायदेमंद हो सकती हैं। दर्द कम करने के लिए ठंडे पानी का सेंक दें। सूजन को कम करने और दर्द से राहत के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन दिए जा सकते हैं। लेकिन, अगर दर्द असहनीय हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है।"