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विश्व कैंसर दिवस हर साल 4 फरवरी को मनाया जाता है। वर्ष 2018 के लिए थीम है 'हम कर सकते हैं। मैं कर सकता हूं।' इसका उद्देश्य व्यक्तियों और संगठनों को कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाने के लिए एकजुट करना है।
क्या आप जानते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर के बाद, सर्वाइकल कैंसर (cervical cancer) भारतीय महिलाओं में कैंसर की वजह से होनेवाली मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है? और हाल ही मे जो आंकड़े आए हैं उनके अनुसार, एचपीवी (HPV) से संबंधित कैंसर के मामलों में भारत में वढ़ोतरी हुई है। एसआरएल डायग्नोस्टिक्स के विश्लेषण में पता चला है कि 16 से 30 साल (14%) आयु वर्ग की महिलाओं में ज़्यादा खतरनाक एचपीवी के पॉजिटीव मामले ज़्यादा देखे गए, और इसलिए उनमें सर्वाइकल कैंसर के होने का खतरा भी अधिक है।
#1. भारत में आयोजित स्टडीज़ से पता चलता है कि सामान्य जनसंख्या की लगभग 5% महिलाओं को एक निश्चित समय में सर्वाइकल एचपीवी-16/18 इंफेक्शन फैलने की संभावना देखी गयी। डॉ. बी.आर. दास (कंसल्टेंट एंड हेड- आरएंडडी और मॉल्येक्यूलर पैथोलॉजी, एसएएल डायग्नोस्टिक्स) का कहना है कि, "हालांकि ज्यादातर एचपीवी संक्रमण खुद ठीक हो जाते हैं और इनके कोई निशान भी नहीं दिखायी देते, लेकिन इस तरह के ज़्यादा जोखिम वाले एचपीवी इंफेक्शन्स दोबारा होने से सर्वाइकल कैंसर का खतरा 100 गुना बढ़ जाता है। इसलिए, सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग में पहली कोशिश होनी चाहिए कैंसर का विकास होने से पहले उन सेल्स का पता लगाना जिसमें कैंसर होने के लक्षण दिखायी दे और उनका तुरंत इलाज करना चाहिए।"
#2. लगभग 100% सर्वाइकल कैंसर के मामले लंबी अवधि (एक दशक से अधिक) तक बार-बार होनेवाले एचपीवी इंफेक्शन्स के कारण होते है। 100 विभिन्न प्रकार के एचपीवी इंफेक्शन्स में, 8 सबसे आम और खतरनाक प्रकार हैं जबकि 16, 18, 45, 33, 31, 52, 58 और 35, जो सर्वाइकल कैंसर के 91% मामलों में वजह बनते हैं। एचपीवी 16, 18 और 45, सबसे सामान्य सर्वाइकल कैंसर (स्क्वैमस सेल) के 75% मामलों की वजह बनते हैं जबकि एडीनोकार्किनोमा (दूसरा सबसे आम रूप) के 94% मामलों में यही एचपीवी टाइप ज़िम्मेदार होते हैं। गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर में अपनी भूमिका को देखते हुए, एचपीवी परीक्षण मुख्य रूप से सर्वाइकल कैंसर के मामलों में एपीवी की भूमिका के कारण वर्तमान में जो भी क्लिनिकल प्रैक्टिस की जाती हैं उनमें एचपीवी टेस्टिंग एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।
#3. भारत में, खतरनाक आंकड़े के बावजूद, सरकारी तौर पर कोई भी देशव्यापी स्क्रीनिंग कार्यक्रम उपलब्ध नहीं है। इलाज के खर्च और जागरूकता की कमी के कारण, रिफ्लेक्स टेस्टिंग ज़्यादा पसंद किया जाता है, खासकर संदिग्ध/ उच्च जोखिम वाले मामलों में। हालांकि, शुरुआती अवस्था में कैंसर का पता लगाने के लिए सर्वाइकल कैंसर के सही स्क्रीनिंग मेथड की ज़रूरत होती ताकि इसका इलाज किया जा सके।
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अनुवादक:Sadhana Tiwari
चित्रस्रोत:Shutterstock