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Bahrapan Kyon Hota Hai: शोर-शराबा तो हम भारतीयों की जीवनशैली का हिस्सा बन गया है, कहीं पर ट्रैफिक का शोर है तो कहीं पर जोरो-शोरों से कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। हालांकि, नॉइस पॉल्यूशन सिर्फ यही नहीं बल्कि बल्कि तेज आवाज में म्यूजिक बजना और यहां तक कि फोन में बार-बार बज रहा नोटिफिकेशन टोन भी ध्वनि प्रदूषण है। हम जानते हैं कि ध्वनि प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, लेकिन इतना भी अच्छे से नहीं जानते कि ध्वनि प्रदूषण वाली जगहों पर रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ रहा है। आपको शायद यह भी जानकारी नहीं होगी कि भारत में लोग धीरे-धीरे बहरेपन का शिकार हो रहे हैं, लेकिन उन्हें जब यह समस्या महसूस होती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी इस बारे में सावधान कर रहे हैं और बता रहे हैं कि ध्वनि प्रदूषण आपको धीरे-धीरे बहरा बना रहा है और ज्यादातर लोगों को इस बारे में जानकारी भी नहीं है। दिल्ली के करोल बाग में स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में, ईएनटी, हेड एंड नेक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. नित्या सुब्रमण्यन ने इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी जिनके बारे में हम आगे जानेंगे।
वर्ल्ड हियरिंग डे के मौके पर यह समझना बेहद जरूरी है कि शोर अब सिर्फ एक दिक्कत नहीं, बल्कि युवाओं की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। तेज आवाज में हेडफोन सुनना, लगातार मोबाइल नोटिफिकेशन, सड़कों का ट्रैफिक और शहरों में चल रहे निर्माण कार्य, इन सबकी वजह से अब शोर कभी-कभार नहीं, बल्कि हर समय हमारे आसपास मौजूद रहता है।
Dr. Nitya Subramanian, Senior Consultant - ENT, Head and Neck Surgery, Apollo Spectra Hospital, Delhi
डॉ. सुब्रमण्यन के अनुसार बढ़ते ध्वनि प्रदूषण का असर हमारी सुनने की क्षमता पर तेजी से पड़ता जा रहा है और इस कारण से धीरे-धीरे सुनने की क्षमता खत्म हो रही है। शुरुआत में इसका पता नहीं चलता और जब तक समस्या समझ में आती है, तब तक नुकसान स्थायी हो सकता है। इसलिए अगर परमानेंट डैमेज से बचाना चाहते हैं, तो बहरेपन से जुड़े किसी भी लक्षण को इग्नोर नहीं करना चाहिए, ताकि समय रहते समस्या की पहचान करके स्थिति का पता लगाया जा सके।
जब बहरापन शुरू होता है, तो उसके लक्षण भी देखने को मिलते हैं लेकिन दिक्कत यह होती है कि लक्षण काफी सामान्य होते हैं और उनकी पहचान नहीं हो पाती है। जब बहरापन शुरू होता है, तो इस दौरान आमतौर पर कान में घंटी बजने जैसा महसूस होना (टिनिटस), किसी आवाज या म्यूजिक को ज्यादातर देर तक सुन न पाना और आवाज कम सुनाई देना जैसी समस्याएं दिखने लगते हैं। हालांकि, बहरापन सिर्फ तभी माना जाएगा अगर ये ल्कषण कम उम्र में महसूस हो रहे हैं, क्योंकि बुजुर्गों में इस तरह के लक्षण होना आम हो सकता है।
आज के समय में कानों को स्वस्थ रखने का मतलब यह नहीं है कि आप हेडफोन या इयरफोन जैसी नई और एडवांस चीजों का इस्तेमाल करना बंद कर दें। बल्कि इसका मतलब यह है कि आप सही तरीके से इनका इस्तेमाल करें। हेडफोन की आवाज कम रखें, बीच-बीच में कानों को आराम दें और समय-समय पर हियरिंग टेस्ट जरूर कराएं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।