
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Updated : February 2, 2026 6:50 PM IST
Medically Verified By: Dr.Geeta Jain
Endometriosis Vs Adenomyosis 1 In 10 Women In India Silently Suffer From Uterine Conditions : आज भी भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में लाखों महिलाएं हर महीने तेज पीरियड पेन, अत्यधिक ब्लीडिंग और पेल्विक दर्द को “नॉर्मल” समझकर सहन करती रहती हैं। यही वजह है कि एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) और एडेनोमायोसिस (Adenomyosis) जैसी गंभीर स्त्री-रोग संबंधी बीमारियां सालों तक बिना पहचान के रह जाती हैं। ये दोनों ही स्थितियां देखने में एक जैसी लगती हैं, लेकिन इनके कारण, प्रभाव और इलाज अलग-अलग होते हैं।
TheHealthSite.com से खास बातचीत में दिल्ली के जनकपुरी स्थित Maccure Hospital की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता जैन बताती हैं कि कि भारत में ज्यादातर महिलाएं इन बीमारियों से चुपचाप जूझ रही हैं, क्योंकि पीरियड से जुड़ा दर्द आज भी समाज में सामान्य मान लिया जाता है।
एंडोमेट्रियोसिस और एडेनोमायोसिस दोनों ही गर्भाशय (Uterus) से जुड़ी बीमारियां हैं और दोनों में पीरियड के दौरान तेज दर्द और ज्यादा ब्लीडिंग होना आम लक्षण है। इसी समानता के कारण अक्सर महिलाएं और कभी-कभी डॉक्टर भी शुरुआत में इन्हें कंफ्यूज कर लेते हैं। इसके अलावा दोनों ही समस्याओं में कुछ लक्षण ऐसे भी हैं, जो एक जैसे ही लगते हैं। इसमें शामिल है
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत (Endometrium) जैसी टिश्यू गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती है। यह टिश्यू निम्न जगहों पर पाई जा सकती है:
हर महीने पीरियड के दौरान यह टिश्यू भी हार्मोनल बदलावों पर रिएक्ट करती है, लेकिन बाहर होने के कारण ब्लड बाहर नहीं निकल पाता। इससे सूजन, तेज दर्द और स्कार टिश्यू बनने लगता है।
एंडोमेट्रियोसिस कितना आम है?
World Health Organization के अनुसार, दुनियाभर में प्रजनन आयु की लगभग 10% महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं।
एडेनोमायोसिस में एंडोमेट्रियल टिश्यू गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार (Uterine Muscle Wall) के अंदर घुस जाती है। यानी:
एडेनोमायोसिस कितना आम है?
अनुमान है कि यह लगभग 20% महिलाओं को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि इसे अक्सर फाइब्रॉइड समझ लिया जाता है।
| बिंदु | एंडोमेट्रियोसिस | एडेनोमायोसिस |
| टिश्यू की जगह | गर्भाशय के बाहर | गर्भाशय की मांसपेशियों में |
| लक्षण | तेज दर्द, इंफर्टिलिटी | ज्यादा ब्लीडिंग, भारी गर्भाशय |
| उम्र | 20 से 40 साल की उम्र | 35 से 50 साल की उम्र में |
| फर्टिलिटी इफेक्ट | ज्यादा | हल्का लेकिन होता है |
| पता कैसे चलता है? | लैप्रोस्कोपी | अल्ट्रासाउंड या MRI |
एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण- Endometriosis Symptoms in Hindiएंडोमेट्रियोसिस के लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर इनमें शामिल हैं:
कई बार दर्द पीरियड से पहले शुरू होकर बाद तक बना रहता है।
एडेनोमायोसिस के लक्षण उम्र के साथ बढ़ते जाते हैं:
कई महिलाओं को लगता है जैसे पेट हमेशा फूला हुआ है।
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. गीता जैन बताती हैं हां, बिल्कुल। एडेनोमायोसिस का सामना करने वाली महिलाएं आसानी से मां बन सकती हैं। लेकिन इसमें मिसकैरेज का खतरा, IVF फेल होने की संभावना, प्रेग्नेंसी के दौरान कई प्रकार की समस्याएं आ सकती हैं। डॉ. गीता जैन कहती हैं एडेनोमायोसिस से पीड़ित कोई महिला अगर भविष्य में मां बनती है तो इसे प्रेग्नेंसी का पता चलते ही डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
डॉ. गीता जैन बताती हैं कि एंडोमेट्रियोसिस और एडेनोमायोसिस का इलाज महिला की उम्र, लक्षणों की गंभीरता और प्रेग्नेंसी प्लान पर निर्भर करता है। इन दोनों ही मामलों में लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव सबसे ज्यादा जरूरी होता है। एंडोमेट्रियोसिस और एडेनोमायोसिस को मैनेज करने के लिए डॉक्टर नीचे बताए गए सुझाव दे सकते हैं।
दवाइयां- पेन किलर, हार्मोनल थेरेपी और ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स
लाइफस्टाइल बदलाव- स्ट्रेस कम करना, सही डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, नींद पूरी करना
इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें:
एंडोमेट्रियोसिस और एडेनोमायोसिस दोनों ही महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करने वाली स्थितियां हैं। सही जानकारी, समय पर जांच और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट से महिलाएं न सिर्फ दर्द से राहत पा सकती हैं, बल्कि अपनी फर्टिलिटी और जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर बना सकती हैं।