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Effects of Chronic Disease: हमारा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य आपस में गहराई से एक दूसरे से जुड़े होते हैं, जिसे अंग्रेजी में इंटरकनेक्टेड कहते हैं। यह सिर्फ आज की मेडिकल साइंस नहीं बल्कि आयुर्वेद जैसी पुरानी चिकित्सा पद्धतियां भी मानती हैं कि कई ऐसी शारीरिक बीमारियां हैं, जो आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती हैं। डॉ. आत्माप्रीत सिंह, सीनियर डायरेक्टर एंड हैड न्यूरोलॉजी, शारदाकेयर, हेल्थ सिटी ग्रेटर नोएडा के अनुसार अगर लंबे समय से ये बीमारियां कंट्रोल नहीं की गई हैं, तो इसका सीधा असर इससे मेंटल हेल्थ डैमेज होने लगती हैं और कई मेंटल हेल्थ डिजीज पैदा हो जाती हैं। जिस प्रकार हमारे विचार, भावनाएं और मानसिक स्थिति सीधे हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, उसी प्रकार इसका उल्टा असर भी होता है। यह स्थिति खासतौर पर उन लोगों में देखी जाती है जो डायबिटीज, दिल की बीमारी, गठिया या अस्थमा जैसी क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे होते हैं।
स्ट्रेस यानी तनाव के दौरान मस्तिष्क से कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं। ये हार्मोन शरीर को खतरा, भय व डर जैसी भावनाओं से निपटने के लिए तैयार करते हैं, लेकिन अगर स्ट्रेस लंबे समय से है और लगातार बना हुआ है, तो यह शरीर में सूजन, ब्लड प्रेशर बढ़ना और कमजोर इम्यूनिटी जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
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अगर कोई मरीज लंबे समय से किसी शारीरिक समस्या से जूझ रहा है या किसी प्रकार का शारीरिक दर्द झेल रहा है, तो उसे डिप्रेशन या चिंता की समस्या हो सकती है। साइंस भी मानता है कि मन में नकारात्मक भावनाएं दर्द को और बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि डायबिटीज के ज्यादातर मरीज लगातार अपनी सेहत की जांच करते रहने के कारण तनाव में रहते हैं, जो उनके ब्लड शुगर को प्रभावित करता है और बीमारी को नियंत्रित करना कठिन बना देता है। ऐसे में उनका ब्लड शुगर लेवल जितना बढ़ता है, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी उतनी ही बढ़ने लगती हैं।
(और पढ़ें - डायबिटीज कैसे कंट्रोल करें)
जैसा कि हमने आपको बताया है कि लंबे समय तक चलने वाली बीमारियां यानी क्रोनिक डिजीज न सिर्फ शरीर को, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि क्रोनिक बीमारियों के मरीज आमतौर पर थकान, निराशा या हताशा महसूस करते हैं। ये भावनाएं मरीज को उसकी क्रोनिक बीमारी से निपटने के लिए समय पर इलाज, नियमित व्यायाम और सही खानपान लेने में भी मुश्किल पैदा करती है। अगर इलाज के साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाए, तो नतीजे बेहतर होते हैं। रिसर्च बताते हैं कि जो अपनी शारीरिक बीमारी के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का भी एक साथ इलाज कराते हैं, वे दोनों ही समस्याओं को बेहतर तरीके से कंट्रोल कर पाते हैं।
कुछ तरीके हैं, जिनकी मदद से क्रोनिक बीमारियों के मरीज भी अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर रख सकते हैं -
माइंडफुलनेस और मेडिटेशन - इससे मन शांत रहेगा, तनाव कम होने लगेगा और इसकी मदद से शरीर के अंदर होने वाली इन्फ्लेमेशन व अन्य शारीरिक समस्याएं भी बढ़ना बंद हो जाएंगी।
फिजिकल एक्टिविटी - व्यायाम व अन्य शारीरिक गतिविधियां करने से एंडोर्फिन हार्मोन रीलिज होता है जिससे मूड होता है और दर्द कम करने में मदद मिलती है।
अच्छी नींद लेना - शरीर को आराम देने के लिए नींद बहुत जरूरी है, जो तनाव नियंत्रित करने वाले हार्मोन को संतुलित रखती है।
थेरेपी व ग्रुप स्पोर्ट - अपनी भावनाएं अपने दोस्तों या परिवारजनों के साथ शेयर करने से मानसिक बोझ हल्का होता है और रिश्तों का एहसास बढ़ता है।
संतुलित आहार - यह पता होना जरूरी है कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए सही पोष्टिक खानपान बहुत जरूरी है, इसलिए अच्छी डाइट लें।
जब हम शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य व एक दूसरे की समस्या से पड़ने वाले असर के बीच समझ लेते हैं, तो हमारी स्वास्थ्य की सोच बदल जाती है। यह जानना जरूरी है कि सिर्फ शारीरिक समस्याओं का ही इलाज करना काफी नहीं है बल्कि इसके साथ-साथ मन यानी मानसिक स्वास्थअय की देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है।
एक बीमार व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह अपने स्वास्थ्य व आसपास की चीजों के प्रति एक सकारात्मक सोच रखे, अपनी भावनाओं को संतुलित व तनाव को नियंत्रित रखे, जिससे उसकी शारीरिक बीमारियों को ठीक करने में भी मदद मिलेगी।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए, नियमित रूप से व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव का प्रबंधन करना, सामाजिक संबंध बनाए रखना, और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेना महत्वपूर्ण है।
नियमित रूप से व्यायाम करें, समय पर सोएं और समय पर उठते हुए पूरी नींद लें, खानपान का ध्यान रखें और बुरी आदतें छोड़ दें।
खराब जीवनशैली इसका सबसे प्रमुख कारण माना जाता है, इसके अलावा अनहेल्दी डाइट और जीवन की कुछ अन्य घटनाएं भी इसका कारण बन सकती हैं।