क्या है Ectopic Pregnancy, जिसमें बढ़ जाता है मिसकैरेज के चांसेस? जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज

Ectopic Pregnancy: मां बनाना हर महिला के लिए सबसे सुखद अनुभव होता है। लेकिन एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से मां बनने का सपना टूट सकता है। आइए, जानते हैं एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के बारे में विस्तार से -

WrittenBy

Written By: priya mishra | Updated : April 24, 2025 3:32 PM IST

Ectopic Pregnancy In Hindi: मां बनाना हर महिला के लिए सबसे सुखद एहसास होता है। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी ही एक समस्या है एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, जिसमें भ्रूण का विकास गर्भाशय के बाहर ही होने लगता है। यह स्थिति मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। इसका समय पर इलाज न होने पर मिसकैरेज का खतरा काफी ज्यादा होता है। आइए इसके बारे में सन रे हेल्थ पॉइंट की गायनोकॉलोजिस्ट डॉ अर्चना निरूला से जानते हैं।

क्या है एक्टोपिक प्रेग्नेंसी? - What Is Ectopic Pregnancy

जब एक फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय में इम्प्लांट होने के बजाय किसी अन्य स्थान, जैसे फैलोपियन ट्यूब, ओवरी या एब्डोमेन में इम्प्लांट हो जाता है, तो उस स्थिति को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं। दरअसल, गर्भाशय को छोड़कर शरीर का कोई भी हिस्सा भ्रूण को संपूर्ण पोषण नहीं दे सकता, इसलिए यह प्रेग्नेंसी सफल नहीं होती है। समय पर पता न चलने पर आंतरिक रक्तस्राव, अंगों का फटना और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। हर 100 गर्भधारण में से लगभग 1-2 मामले एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के होते हैं।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण - Causes Of Ectopic Pregnancy

  • फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज या किसी तरह का संक्रमण के कारण एक्टोपिक प्रेग्नेंसी हो सकती है।
  • एंडोमेट्रिओसिस की बीमारी की वजह से भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का खतरा रहता है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान इंफेक्शन या अन्य समस्याओं की वजह से भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी हो सकती है।
  • पिछले पेल्विक या ट्यूबवेल सर्जरी के प्रभाव की वजह से एक्टोपिक प्रेग्नेंसी हो सकती है।
  • धूम्रपान और हार्मोनल असंतुलन भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के प्रकार - Types Of Ectopic Pregnancy

  1. ट्यूबल प्रेग्नेंसी – सबसे सामान्य, जिसमें अंडाणु फैलोपियन ट्यूब में आरोपित होता है।
  2. ओवेरीयन प्रेग्नेंसी – जब गर्भ ठहराव अंडाशय में होता है।
  3. सर्वाइकल प्रेग्नेंसी – जब गर्भाशय के मुंह (cervix) में गर्भधारण होता है।
  4. एब्डॉमिनल प्रेग्नेंसी – इसमें अंडाणु एब्डोमेन में आरोपित होता है। यह बहुत दुर्लभ लेकिन अत्यंत खतरनाक है।
  5. कॉर्नुअल/इंटरस्टीशियल प्रेग्नेंसी – इसमें गर्भधारण गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब के जंक्शन में होता है।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण - Symptoms Of Of Ectopic Pregnancy

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण आमतौर पर गर्भावस्था के 4वें और 12वें सप्ताह के बीच विकसित होते हैं। कुछ महिलाओं में शुरू में कोई लक्षण नहीं दिखते। उन्हें तब तक पता नहीं चलता कि उन्हें एक्टोपिक प्रेग्नेंसी है, जब तक कि शुरुआती स्कैन में समस्या न दिख जाए या बाद में उन्हें अधिक गंभीर लक्षण न दिखें। इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं -

  • पेट के निचले हिस्से में तेज या चुभन जैसा दर्द
  • असामान्य ब्लीडिंग या स्पॉटिंग
  • चक्कर आना या बेहोशी
  • कंधे में दर्द
  • प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षणों का अचानक गायब हो जाना
  • डायरिया

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का निदान - Diagnosis Of Ectopic Pregnancy

केवल लक्षणों से एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का निदान करना मुश्किल हो सकता है। यदि आपको एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण हैं और आपका प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव है, तो आपको आगे के परीक्षण के लिए निम्न जांच करवाने को बोला जा सकता है -

पेल्विक जांच – डॉक्टर दर्द या किसी गांठ की जांच करते हैं।

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVS) – जिससे गर्भाशय के बाहर गर्भधारण को देखा जा सकता है।

ब्लड टेस्ट (β-hCG) – एक्टोपिक में hCG का स्तर सामान्य रूप से दोगुना नहीं होता।

लैप्रोस्कोपी – यदि निश्चित पहचान न हो सके, तो कैमरे की सहायता से सीधा देखा जाता है।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के जोखिम कारक - Risk Factors For Ectopic Pregnancy

ऐसे कई जोखिम कारक हैं ,जो एक्टोपिक प्रेग्नेंसी विकसित होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं -

  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का इतिहास
  • फैलोपियन ट्यूब या आपके पेल्विक क्षेत्र के अन्य अंगों पर सर्जरी
  • इनफर्टिलिटी
  • इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के साथ बांझपन का उपचार।
  • एंडोमेट्रियोसिस
  • यौन संचारित संक्रमण
  • गर्भाधान के समय IUD

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के खतरे - Risks Of Ectopic Pregnancy

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से भविष्य में मां बनने की संभावना ही कम हो सकती है।एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के दौरान ट्यूब रप्चर करने पर ब्लड दूसरे ट्यूब में जमा हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर एक ट्यूब को हटा सकते हैं, जिससे कंसीव कर पाना काफी मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, एक बार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होने पर दोबारा एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का खतरा रहता है। गंभीर मामलों में समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का इलाज - Treatment Of Ectopic Pregnancy

दुर्भाग्य से, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में भ्रूण को बचाया नहीं जा सकता है। गर्भावस्था के बहुत बड़ा होने से पहले उसे हटाने के लिए आमतौर पर उपचार की आवश्यकता होती है। हालांकि, मुख्य उपचार विकल्प हैं -

मेडिकल ट्रीटमेंट – मेथोट्रेक्सेट

यदि गर्भधारण की अवस्था प्रारंभिक हो और मरीज स्थिर हो, तो मेथोट्रेक्सेट इंजेक्शन दिया जाता है, जो भ्रूण की वृद्धि को रोकता है। इसके बाद hCG स्तर की निगरानी की जाती है।

सर्जरी

अगर ट्यूब फट चुकी हो या मरीज की हालत गंभीर हो:

साल्पिंगोस्टॉमी – ट्यूब को बचाते हुए केवल गर्भधारण का ऊतक निकाला जाता है।

साल्पिंगेक्टॉमी – अगर नुकसान ज्यादा हो तो पूरी ट्यूब हटानी पड़ती है।

एक्सपेक्टेंट मैनेजमेंट

अगर hCG स्तर अपने आप कम हो रहा हो और कोई लक्षण न हो, तो केवल निगरानी के जरिए भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी को खत्म किया जा सकता है।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से बचाव के उपाय - Ectopic Pregnancy Prevention Tips

  • सही उम्र में ही प्रेग्नेंसी प्लान करें।
  • प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले नियमित हेल्थ चेकअप कराएं।
  • प्रेग्नेंसी से पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान अच्छी डाइट रखें।
  • धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें।
  • बार-बार गर्भपात की वजह जानकर उचित इलाज करवाएं।
  • कंसीव करने के बाद डॉक्टर से मिलकर नियमित जांच करवाएं।
  • गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से बचें।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source