
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Written By: priya mishra | Updated : April 24, 2025 3:32 PM IST
Ectopic Pregnancy In Hindi: मां बनाना हर महिला के लिए सबसे सुखद एहसास होता है। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी ही एक समस्या है एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, जिसमें भ्रूण का विकास गर्भाशय के बाहर ही होने लगता है। यह स्थिति मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। इसका समय पर इलाज न होने पर मिसकैरेज का खतरा काफी ज्यादा होता है। आइए इसके बारे में सन रे हेल्थ पॉइंट की गायनोकॉलोजिस्ट डॉ अर्चना निरूला से जानते हैं।
जब एक फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय में इम्प्लांट होने के बजाय किसी अन्य स्थान, जैसे फैलोपियन ट्यूब, ओवरी या एब्डोमेन में इम्प्लांट हो जाता है, तो उस स्थिति को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं। दरअसल, गर्भाशय को छोड़कर शरीर का कोई भी हिस्सा भ्रूण को संपूर्ण पोषण नहीं दे सकता, इसलिए यह प्रेग्नेंसी सफल नहीं होती है। समय पर पता न चलने पर आंतरिक रक्तस्राव, अंगों का फटना और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। हर 100 गर्भधारण में से लगभग 1-2 मामले एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के होते हैं।
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण आमतौर पर गर्भावस्था के 4वें और 12वें सप्ताह के बीच विकसित होते हैं। कुछ महिलाओं में शुरू में कोई लक्षण नहीं दिखते। उन्हें तब तक पता नहीं चलता कि उन्हें एक्टोपिक प्रेग्नेंसी है, जब तक कि शुरुआती स्कैन में समस्या न दिख जाए या बाद में उन्हें अधिक गंभीर लक्षण न दिखें। इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं -
केवल लक्षणों से एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का निदान करना मुश्किल हो सकता है। यदि आपको एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण हैं और आपका प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव है, तो आपको आगे के परीक्षण के लिए निम्न जांच करवाने को बोला जा सकता है -
पेल्विक जांच – डॉक्टर दर्द या किसी गांठ की जांच करते हैं।
ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVS) – जिससे गर्भाशय के बाहर गर्भधारण को देखा जा सकता है।
ब्लड टेस्ट (β-hCG) – एक्टोपिक में hCG का स्तर सामान्य रूप से दोगुना नहीं होता।
लैप्रोस्कोपी – यदि निश्चित पहचान न हो सके, तो कैमरे की सहायता से सीधा देखा जाता है।
ऐसे कई जोखिम कारक हैं ,जो एक्टोपिक प्रेग्नेंसी विकसित होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं -
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से भविष्य में मां बनने की संभावना ही कम हो सकती है।एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के दौरान ट्यूब रप्चर करने पर ब्लड दूसरे ट्यूब में जमा हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर एक ट्यूब को हटा सकते हैं, जिससे कंसीव कर पाना काफी मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, एक बार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होने पर दोबारा एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का खतरा रहता है। गंभीर मामलों में समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।
दुर्भाग्य से, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में भ्रूण को बचाया नहीं जा सकता है। गर्भावस्था के बहुत बड़ा होने से पहले उसे हटाने के लिए आमतौर पर उपचार की आवश्यकता होती है। हालांकि, मुख्य उपचार विकल्प हैं -
यदि गर्भधारण की अवस्था प्रारंभिक हो और मरीज स्थिर हो, तो मेथोट्रेक्सेट इंजेक्शन दिया जाता है, जो भ्रूण की वृद्धि को रोकता है। इसके बाद hCG स्तर की निगरानी की जाती है।
अगर ट्यूब फट चुकी हो या मरीज की हालत गंभीर हो:
साल्पिंगोस्टॉमी – ट्यूब को बचाते हुए केवल गर्भधारण का ऊतक निकाला जाता है।
साल्पिंगेक्टॉमी – अगर नुकसान ज्यादा हो तो पूरी ट्यूब हटानी पड़ती है।
अगर hCG स्तर अपने आप कम हो रहा हो और कोई लक्षण न हो, तो केवल निगरानी के जरिए भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी को खत्म किया जा सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।