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खतरनाक है इबोला वायरस, रहें सावधान!

इबोला वायरस बहुत ही खतरनाक है। अभी तक इसका कोई इलाज नहीं मिल पाया है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, थूक और पसीने से भी फैल सकता है। WHO ने युगांडा में अभी एक पांच साल के बच्चे में इबोला वायरस से पीडि़त होने की पुष्टि की है। हालांकि पिछले दस महीनों में कांगो में दो हजार से ज्यादा मामले देखने में आए हैं। इसलिए सावधान होने की जरूरत है।

खतरनाक है इबोला वायरस, रहें सावधान!
इबोला वायरस बहुत ही खतरनाक है। अभी तक इसका कोई इलाज नहीं मिल पाया है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, थूक और पसीने से भी फैल सकता है। WHO ने युगांडा में अभी एक पांच साल के बच्चे में इबोला वायरस से पीडि़त होने की पुष्टि की है। हालांकि पिछले दस महीनों में कांगो में दो हजार से ज्यादा मामले देखने में आए हैं। इसलिए सावधान होने की जरूरत है।

Written by Yogita Yadav |Published : June 12, 2019 12:49 PM IST

अफ्रीकी देशों से शुरू हुआ इबोला वायरस बहुत ही खतरनाक है। अभी तक इसका कोई इलाज नहीं मिल पाया है। यह इतना ज्‍यादा खतरनाक वायरस है कि संक्रमित व्‍यक्ति के थूक, लार, खून और पसीने के संपर्क में आने पर भी फैल सकता है। पीडि़त व्‍यक्ति की मृत्‍यु के बाद भी इसके संक्रमण के फैलने का डर रहता है। इसलिए इससे पीडि़त व्‍यक्ति को बिल्‍कुल अलग रखा जाता है।

युगांडा में आया पहला मामला 

इबोला वायरस के बारे में कहा जाता है कि इस वायरस का संक्रमण जानवर से होता है। वायरस को जड़ से खत्म करने के लिए कोई दवा नहीं बनाई जा सकी है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इबोला वायरस अफ्रीका के कुछ जानवरों के जरिए इंसानों में होता चला गया। जानकारों का कहना है कि संक्रमित जानवरों के शरीर से होने वाले कई तरह के स्राव से इबोला वायरस फैलता है। WHO ने युगांडा में अभी एक पांच साल के बच्‍चे में इबोला वायरस से पीडि़त होने की पुष्टि की है। हालांकि पिछले दस महीनों में कांगो में दो हजार से ज्‍यादा मामले इबोला वायरस देखने में आए हैं। इसलिए सावधान होने की जरूरत है।

इबोला वायरस फैलने के कारण

यह संक्रमित जानवरों के काटने या खाने से लोगों में फैलता है।

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विशेषज्ञों ने वायरस के अध्ययन के लिए जानवरों की चीर-फाड़ की तो उन्हें भी संक्रमण हो गया था।

इबोला से पीड़ित रोगी के शरीर से निकलने वाले पसीना, खून या दूसरे तरल पदार्थ से यह वायरस फैलता है।

इसीलिए इबोला के रोगी को अलग रखा जाता है।

इस वायरस के कारण रोगी की मौत हो जाने के बाद भी संक्रमण का खतरा रहता है और शव के संपर्क में आने से भी वायरस फैलता है।

यह भी आशंका है कि संक्रमित चमगादड़ों के मल-मूत्र के संपर्क में आने से भी यह फैल सकता है।

अफ्रीका की कुछ गुफाओं में जाने पर पर्यटक इस वायरस से संक्रमित हो गए थे।

यह भी पढ़ें - इबोला वायरस के प्रकोप से 6 दिन की बच्ची कैसे बची ? जानें फैक्ट्स

इबोला के लक्षण

  • मुंह, कान, नाक से खून बहना
  • उल्टी होना
  • पेट दर्द होना
  • शरीर में दर्द होना
  • कमजोरी और फ्लू जैसे लक्षण
  • शरीर पर फुंसी हो जाना

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सावधानी ही है इबोला से बचाव 

उन जानवरों के मांस को न खाएं, जिनसे इबोला वायरस फैलता है।

इबोला वायरस से पीड़ित रोगी की देखभाल करते समय उसके खून, लार व शरीर से निकलने वाले अन्य पदार्थों से बचना चाहिए।

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इसके अलावा जागरुकता इबोला वायरस से बचने का सबसे बड़ा तरीका है।

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