कोरोनावायरस के बाद अब इस खतरनाक वायरस का हमला, WHO ने की पुष्टि

इबोला ने कांगो में दस्तक दे दी है। इस बात की पुष्टि स्थानीय लोगों के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भी की गई है। खबरों के मुताबिक, कांगो में इबोला के अबतक 6 नए मामले सामने आए हैं, जिसमें से 4 लोगों की मौत हो चुकी है।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 3, 2020 12:17 PM IST

Ebola Virus :  कोरोनावायरस ने धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। इस महामारी के बीच एक और वायरस ने दस्तक दे दी है, जो पूरी दुनिया के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। इस वायरस का नाम है इबोला (Ebola Virus )। इबोला ने कांगो में दस्तक दे दी है। इस बात की पुष्टि स्थानीय लोगों के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भी की गई है। खबरों के मुताबिक, कांगो में इबोला के अब तक 6 नए मामले सामने आए हैं, जिसमें से 4 लोगों की मौत हो चुकी है।

कांगो के स्वास्थ्य अधिकारी का बयान

इबोला वायरस (Ebola Virus) को लेकर कांगो के स्वास्थ्य अधिकारियों ने  कहा कि कांगो के पश्चिमी शहर मबंडाका में  इस महामारी ने दस्तक दे दी है। यहां अबतक छह नए मामले सामने आए हैं। इसमें से 4 लोगों की मौत हो चुकी है। मालूम हो कि साल 2018 से अबतक कांगो में दूसरी बार इबोला के मामले सामने आए हैं।

WHO के महानिदेशक का बयान

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस ने भी इस बारे में अपना बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इबोला वायरस के मामलों की जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि कांगो के जिस शहर में इबोला के मामले सामने आए हैं, वहां अब तक एक भी कोरोनावायरस के केस नहीं हैं। वहीं, पूरे कांगो में कोरोनावायरस से अबतक करीब 3,000 लोग संक्रमित हो चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कहा कि कोरोना और इबोला वायरस का आपस में कोई संबंध नहीं है।

इबोला वायरस क्या है और इसके लक्षण?

इबोला वायरस अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन वाले इलाके की एक क्षेत्रिय बीमारी है। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति के शरीर में निकलने वाले तरल पदार्थ के संपर्क में जो भी व्यक्ति आता है, वह इबोला से संक्रमित हो जाता है। इसके शुरुआती लक्षण अचानक बुखार, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और गले में खराश होती है।

इसके बाद मरीज को उल्टी और डायरिया की समस्या होने लगती है।  कुछ मामलों में अंदरूनी और बाहरी रक्तस्राव होता है।  अधिक रक्तस्राव होने के कारण मौत होने का खतरा बढ़ जाता है। मनुष्यों में इस वायरस का संक्रमण संक्रमित जानवरों, जैसे चमगादड़, चिंपैंजी और हिरण इत्यादि के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।

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