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Ebola virus : एक साल में बदतर हुए इबोला पर हालात, रवांडा ने बंद की कांगो सीमा

कांगो में इबोला वायरस फैलने के एक साल बाद भी हालात काबू में आने की बजाए और बदतर हुए हैं। आज रवांडा ने अपने सीमांत इलाकों को कांगों के लिए बंद करने की घोषणा कर दी।

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Written By: Yogita Yadav | Published : August 1, 2019 8:10 PM IST

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस (Ebola virus) से हुई तीसरी मौत के बाद उसके पड़ोसी देश और ज्‍यादा सतर्क हो गए हैं। गुरुवार को रवांडा ने कांगो से आने वाले रास्‍ते बंद कर दिए। जहां कांगो के सीमांत इलाके गोमा शहर में इबोला वायरस (Ebola virus )से एक व्‍यक्ति की मौत हो गई। कांगो में पिछले साल 1 अगस्‍त 2018 को इबोला (Ebola virus )पर स्‍वास्‍थ्‍य आपातकाल घोषित किया गया था। एक साल बीतने के बाद भी यह हालात सुधरे नहीं हैं।

क्‍या है इबोला

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इबोला (Ebola ) एक क़िस्म की वायरल बीमारी है। इबोला वायरस के बारे में कहा जाता है कि इस वायरस का संक्रमण जानवर से होता है। वायरस को जड़ से खत्म करने के लिए कोई दवा नहीं बनाई जा सकी है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इबोला वायरस (Ebola virus) अफ्रीका के कुछ जानवरों के जरिए इंसानों में होता चला गया। जानकारों का कहना है कि संक्रमित जानवरों के शरीर से होने वाले कई तरह के स्राव से इबोला वायरस फैलता है।

क्‍यों माना जाता है खतरनाक

इबोला को बहुत ही खतरनाक वायरस  (Ebola virus) माना जा रहा है। इसका वायरस (Ebola virus) ग्रसित व्‍यक्ति की मौत के बाद भी नहीं मरता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 80% से ज़्यादा लोग इस रोग से मृत्यु को प्राप्त कर चुके है। रक्तचाप के कम हो जाने और अंगों की विफलता के कारण मृत्यु हो जाती है। इसका उपचार करने वाले डॉक्‍टरों को भी इससे ग्रस्‍त होने का खतरा बना रहता है।

बदतर हुए हालात 

कांगो में इबोला वायरस फैलने के एक साल बाद भी हालात काबू में आने की बजाए और बदतर हुए हैं। आज रवांडा ने अपने सीमांत इलाकों को कांगों के लिए बंद करने की घोषणा कर दी।

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