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Ebola : जानिए WHO को क्‍यों करनी पड़ी मेडिकल इमरजेंसी की घोषणा

इबोला (Ebola) एक खतरनाक वायरस है। जिसकी मृत्‍यु दर 90 फीसदी है। कांगो के गोमा इलाके में इबोला (Ebola) का मरीज पाया जाने के बाद डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे मेडिकल इमरजेंसी घोषित किया है।

Ebola : जानिए WHO को क्‍यों करनी पड़ी मेडिकल इमरजेंसी की घोषणा
इबोला (Ebola) एक खतरनाक वायरस है। जिसकी मृत्‍यु दर 90 फीसदी है। कांगो के गोमा इलाके में इबोला (Ebola) का मरीज पाया जाने के बाद डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे मेडिकल इमरजेंसी घोषित किया है।

Written by Yogita Yadav |Published : July 19, 2019 2:50 PM IST

इबोला (Ebola) एक खतरनाक वायरस है। जिसकी मृत्‍यु दर 90 फीसदी है। कांगो के गोमा इलाके में इबोला (Ebola) का मरीज पाया जाने के बाद डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे मेडिकल इमरजेंसी घोषित किया है। आइए जानें क्‍या हैं यह खतरनाक बीमारी और क्‍यों इस पर घोषित करनी पड़ी मेडिकल इमरजेंसी।

क्‍या है इबोला  (Ebola) 

इबोला एक गंभीर बीमारी का रूप धारण कर चुका है। इस बीमारी में शरीर में नसों से खून बाहर आना शुरु हो जाता है, जिससे अंदरूनी रक्तस्त्राव प्रारंभ हो जाता है। यह एक अत्यंत घातक रोग है। इसमें 90% रोगियों की मृत्यु हो जाती है। कांगो गणराज्य में इबोला के प्रकोप ने अब वैश्विक आपदा का रूप ले लिया है।

क्‍यों कहा गया इबोला (Ebola) 

इस रोग की पहचान सर्वप्रथम सन 1976 में इबोला नदी के पास स्थित एक गांव में की गई थी। इसी कारण इसका नाम इबोला पडा। इबोला एक ऐसा रोग है जो मरीज के संपर्क में आने से फैलता है। यह शारीरिक संबंध के माध्‍यम से भी फैल सकता है। यह वायरस इतना खतरनाक है कि मरीज की मृत्‍यु के बाद भी जीवित रहता है और फैलने का डर बना रहता है। मरीज के पसीने, खून, श्वास से किसी के भी संपर्क में आने से यह रोग फैल सकता है। इसकी चपेट में आकर टाइफाइड, कॉलरा, बुखार,और मांसपेशियों में दर्द होता है। बाल झड़ने लगते हैं। नसों से मांशपेशियों में खून उतर आता है।

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पहले भी हुई है इबोला की दस्‍तक  (Ebola) 

ऐसा नहीं है कि कांगो इस समस्या का पहली बार सामना कर रहा है। पिछले साल पहली अगस्त को भी इस बीमारी ने दस्तक दी थी। तब से अब तक इस बीमारी से 1600 से भी ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले साल 2014-16 के दौरान पश्चिम अफ्रीका में इस बीमारी से 11,300 लोगों की मौत हो चुकी है।

क्‍यों की गई मेडिकल इमरजेंसी की घोषणा (Ebola) 

इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल (पीएचईआईसी) घोषित कर दिया है। इस बार इबोला ने कांगो के गोमा शहर में दस्तक दी है। यहां इस बीमारी से संक्रमित पहले मरीज की पुष्टि हुई है। आशंका है कि 20 लाख की आबादी वाले इस शहर में अगर बीमारी फैली तो इस पर काबू पाना मुश्किल होगा।

विश्‍व का गेटवे है गोमा

इस बार इस बीमारी से ज्‍यादा डर इसलिए भी क्‍योंकि कांगो का गोमा इलाका दूसरे देशों का गेटवे है।  गोमा रवांडा सीमा पर पूर्वोत्तर कांगो में महत्वपूर्ण शहर है जो एक अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से लगता है। कांगो और दुनिया के बाकी हिस्सों में दाखिल होने के रास्ते भी शहर से होकर निकलते हैं। यहां मीलिशिया सेना की मौजूदगी भी चिंता का एक कारण है।

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