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Written By: Jitendra Gupta | Published : September 5, 2021 6:52 PM IST
2 साल के बच्चों को भी हो सकती है डायबिटीज? जानें बड़ों से कितनी अलग और कैसे बचाएं
हम सभी जानते हैं कि डायबिटीज एक जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है और आलम ये है कि दुनिया भर में 42 करोड़ 20 लाख लोग इससे पीड़ित हैं। इस बीमारी का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है बच्चे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। हाल ही में 2 साल से कम उम्र के बच्चों में डायबिटीज का पता चला है, जो कि एक चिंता का विषय है। ऐसा कहा जा रहा है कि बच्चे टॉफी और चॉकलेट खाना पसंद करते हैं, जिसके सेवन को सीमित करने की कितनी भी कोशिश की जाए उतनी कम है। बहुत से एक्सपर्ट बताते हैं कि समाज में डायबिटीज को लेकर ढेर सारे भ्रम फैले हैं, जिसमें से एक यह है कि डायबिटीज शुगर के अधिक सेवन के कारण होती है। लेकिन ये सही नहीं है आइए जानते हैं क्यों।
जब अक्सर बच्चे बीमार होते हैं, तो डॉक्टर से उनके बीमार होने के बारे में पूछा जाता है ठीक इसी तरह बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि टाइप 1 डायबिटीज अधिक शुगर के सेवनसे नहीं होती है। बता दें कि टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून (autoimmune) रोग है, जो शरीर की इंसुलिन उत्पादन करने की क्षमता खत्म हो जाने के कारण होता है। हालांकि इसका वास्तविक कारण अज्ञात है और अभी भी इसे रोकने का कोई उपाय नहीं है। आप कितनी शुगर लेते हैं इसका टाइप 1 डायबिटीज पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
वहीं दूसरी ओर, टाइप 2 डायबिटीज शुगर के बजाए आपके वजन बढ़ने से जुड़ा हुआ है। जो बच्चे स्वस्थ भोजन नहीं खाते हैं और जादा मात्रा में अनहेल्दी फूड्स का सेवन करते हैं उन्हें टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा अधिक हो सकता है।
हम में से ज्यादातर लोग केवल दो प्रकार की डायबिटीज के बारे में जानते हैं, एक जो बच्चों को प्रभावित करती है, जिसे टाइप 1 डायबिटीज के रूप में जाना जाता है और दूसरा जिसे टाइप 2 डायबिटीज के रूप में जाना जाता है। हालांकि, हम में से अधिकांश लोग इस बात से अनजान हैं कि बच्चों को टाइप 2 डायबिटीज हो सकती है।
मोडी (मैच्योरिटी ऑनसेट डायबिटीज ऑफ द यंग)[Maturity onset diabetes of the young (MODY)]
- स्टेरॉयड इंड्यूस्ड डायबिटीज (Steroid-induced diabetes)
- सिस्टिक फाइब्रोसिस रिलेटेड डायबिटीज (Cystic-fibrosis-related diabetes)
- टाइप 1.5 डायबिटीज (Type 1.5 diabetes)
बच्चों द्वारा सेवन की जाने वाली शुगर की मात्रा समय के साथ-साथ ब्लड में शुगर(blood sugar) का कारण बनती है। यही कारण है आगे चलकर उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, प्री-डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा शुगर की मात्रा आपके बच्चे के मूड, गतिविधि और अति सक्रियता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।
-जूस, सोडा और अन्य मीठे पेय पदार्थ
- चिप्स, कुकीज और अन्य अनहेल्दी स्नैक्स
- सफेद ब्रेड, चावल, पास्ता
- तला हुआ और जंक फूड
- लाल मांस
- फुल फैट डेयरी उत्पाद
टाइप 1 डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है। एक्सपर्ट अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह बीमारी आखिर क्यों होती है। वहीं दूसरी ओर, टाइप 2 डायबिटीज को हेल्दी जीवनशैली अपनाकर कंट्रोल किया जा सकता है। टाइप 2 डायबिटीज को अच्छी तरह के खाने, नियमित रूप से व्यायाम करने और स्वस्थ वजन बनाए रखने से कंट्रोल रखा जा सकता है।