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मात्र इस चीज का सेवन बढ़ा सकता है दिमागी बीमारी का खतरा, जानें किस मानसिक बीमारी का हो सकते हैं शिकार

आप बढ़ती उम्र में अपनी डाइट को कंट्रोल कर डिमेंशिया जैसी बीमारी के विकास के जोखिम को कम करने के लिए जरूर कुछ उपाय कर सकते हैं।

मात्र इस चीज का सेवन बढ़ा सकता है दिमागी बीमारी का खतरा, जानें किस मानसिक बीमारी का हो सकते हैं शिकार
मात्र इस फूड का सेवन बढ़ा सकता है दिमागी बीमारी का खतरा, जानें किस मानसिक बीमारी का हो सकते हैं शिकार

Written by Jitendra Gupta |Published : November 4, 2021 10:51 AM IST

डिमेंशिया एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है, जो अक्सर बढ़ती हुई उम्र में लोगों के लिए चिंता का एक कारण बनती है। याददाश्त का कमजोर होना और फैसले लेने में परेशानी जैसे इन दो काम को करने में जब आपको परेशानी होने लगे तो ये डिमेंशिया के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि डिमेंशिया कोई विशिष्ट बीमारी नहीं है लेकिन यह स्थिति चीजों को याद रखने, सोचने या निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर देती है। ऐसे कई कारक हैं, जो डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, जिनमें आनुवंशिकी, आयु, डाइट से लेकर आपकी बदलती जीवनशैली भी शामिल हैं। हां, आप बढ़ती उम्र में अपनी डाइट को कंट्रोल कर इस बीमारी के विकास के जोखिम को कम करने के लिए जरूर कुछ उपाय कर सकते हैं। इस लेख में हम आपको ऐसे फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जो डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाने वाले फूड्स

ऐसी धारणा है कि हेल्दी रहने के लिए आपको हेल्दी भोजन करना जरूरी है। यह बात आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लागू होती है। हालांकि यह साबित हो चुका है कि जंक फूड और आपके भोजन में मौजूद पोषक तत्वों की कमी आपको चिंता, तनाव और अवसादका शिकार बना सकती है। वहीं ये दोनों चीजें डिमेंशिया के जोखिम से भी जुड़ी हुई है। कुछ अध्ययन बताते हैं डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाने का काम करता है रिफाइऩ्ड कार्ब।

रिफाइंड कार्ब्स कैसे डिमेंशिया के लिए हानिकारक

हम सभी जानते हैं कि रिफाइंड कार्ब्स स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं क्योंकि यह शरीर में ग्लूकोज का लेवल बढ़ा देते हैं। दरअसल हम जो कार्ब्स खाते हैं, उन्हें हमारा पाचन तंत्र शुगर में तब्दील कर देता है और वह सीधा हमारे खून में मिल जाते हैं। वहां से यह ऊर्जा पैदा करने के लिए इंसुलिन की मदद से कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि हमारे द्वारा खाए जाने वाले सभी कार्ब्स अलग-अलग गति से संसाधित होते हैं और अन्य कार्ब्स की तुलना में रिफाइन्ड कार्ब्स अधिक तेज़ी से ग्लूकोज में बदलते हैं। इसलिए हमारा ब्लड शुगर लेवलबहुत तेजी से बढ़ता-घटता है। अध्ययन बताते हैं कि समय के साथ-साथ हमारा ब्लड शुगर लेवल लगातार बढ़ने-घटने से डिमेशिया और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

क्या कहता है अध्ययन

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर ग्लूकोज का प्रभाव बहुत अधित होता है। अध्ययन के मुताबिक, ब्लड में ग्लूकोज का हाई लेवल लोगों में मनोभ्रंश का खतरा बढ़ा देता है। यह उन सभी के लिए आम है, जिन्हें डायबिटीज है।

हाल ही में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, हमारे ब्लड में शुगर की अधिक मात्रा होने से आपके मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

डिमेंशिया के जोखिम को कम करने के लिए कौन से फूड्स से बचें

हमें डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिए हाई ग्लाइसेमिक फूड्स और रिफाइन्ड कार्ब्स के सेवन से बचना चाहिए। इसलिए, आपको रिफाइंड आटे से बने उत्पादों जैसे ब्रेड, पास्ता, पिज्जा, कुकीज का सेवन कम करने की आवश्यकता है। आप साबुत और फाइबर युक्त अनाज से बने फूड्स का सेवन करें और अपनी डाइट में अधिक से अधिक सब्जियां, फल और फलियां शामिल करें।

किन फूड्स से बनाएं दूरी

सिर्फ रिफाइंड कार्ब्स ही आपके मस्तिष्क के स्वास्थ्य को खराब नहीं करते बल्कि और भी कई चीजें हैं जो समान रूप से हानिकारक हैं। ये हैंः

1-सप्ताह में चार बार से अधिक रेड मीट न खाएं।

2-तला हुआ या फास्ट फूड सप्ताह में एक बार ही खाएं।

3-सप्ताह में एक बार पनीर खाएं।

4-सप्ताह में पांच बार तक पेस्ट्री या मिठाई खाना।

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6-एक दिन में एक ड्रिंक से ज्यादा लेना।

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