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Cervical cancer symptoms early: गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर हमारे देश की महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ी और जानलेवा समस्या बनता जा रहा है। यह महिलाओं के गर्भाशय के अगले भाग जिसे गर्भाशय ग्रीवा कहा जाता है, उसमें होने वाले कैंसर का एक प्रकार है। यह कैंसर आमतौर पर साफ-सफाई न रखने के कारण हो सकता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है और हमारे देश में हर 8 मिनट में एक महिला की मौत इस कैंसर के कारण हो रही है। दुनियाभर में सर्वाइकल कैंसर से मरने वाली महिलाओं में 16 प्रतिशत मौत भारत में ही होती हैं। दरअसल, कैंसर ऐसी समस्या है जो संक्रमण आदि के कारण भी विकसित हो सकती है और इसलिए इसका ध्यान रखना बहुत जरूरी है। साथ ही सर्वाइकल कैंसर से संबंधित किसी भी लक्षण को इग्नोर नहीं किया जाना चाहिए। इस लेख में हम आपको सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां देने वाले हैं और साथ ही यह भी बताने वाले हैं कि सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं।
सर्विक्स में होने वाले कैंसर को सर्वाइकल कैंसर कहा जाता है। सर्विक्स गर्भाशय और योनि के बीच का पतला हिस्सा होता है, जिसकी आकृति ग्रीवा के जैसी होती है और इसलिए हिंदी में इसे गर्भाशय ग्रीवा कहा जाता है। गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर बेहद गंभीर प्रकार का कैंसर है और अगर समय रहते इसका इलाज शुरू न किया जाए तो इससे ग्रसित महिला की मृत्यु भी हो सकती है।
गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, लेकिन एचपीवी संक्रमण इसके प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। यदि आपको लंबे समय से कोई एचपीवी (human papillomavirus) इन्फेक्शन है, तो सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा काफी हद तक बढ़ सकता है। अपने गुप्तांगों की उचित रूप से सफाई न रख पाना, सेक्स के दौरान सुरक्षा न बरतना या एक से ज्यादा सेक्स पार्टनर होना आदि एचपीवी संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है और इस कारण से सर्वाइकल कैंसर का खतरा भी काफी हद तक बढ़ जाता है।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर शुरुआत में कुछ संकेत देता है, जिन्हें कभी भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। चलिए जानते हैं सर्वाइकल कैंसर से होने वाले कुछ शुरुआत संकेतों के बारे में -
सर्वाइकल कैंसर के इलाज में आमतौर पर सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी आदि को शामिल किया जा सकता है। अगर आपको उपरोक्त मे से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है तो आपको जल्द से जल्द इस बारे में डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। इसके अलावा महिलाओं को महसूस हो रहे लक्षणों के अनुसार भी उन्हें कुछ दवाएं दी जाती हैं, जिनमें आमतौर पर पेन किलर दवाएं आदि शामिल हैं।