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Early Puberty in Hindi: लड़कियों में समय से पहले आई ‘प्यूबर्टी’, स्टडी में हुआ खुलासा किस कारण से हुई Precocious puberty

Precocious puberty: पुणे के जहांगीर अस्पताल में एक अध्ययन किया गया जिसमें पाया गया कि कोविड लॉकडाउन के बाद बच्चों में अर्ली प्यूबर्टी के मामलों में 3.6 फीसदी उछाल देखा गया, जिसमें लड़कियां ज्यादा प्रभावित पाई गई।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : June 13, 2022 1:19 PM IST

कोरोना महामारी ने सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को मानसिक रूप से भी बीमार किया है। हालांकि, परेशानियां सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती है महामारी के कारण एक के बाद एक लगने वाले लॉकडाउन ने भी लोगों की जीवनशैली को काफी प्रभावित किया है और अब उसका असर छोटे बच्चों में भी दिखने को मिल है। दरअसल हाल ही में पुणे के जहांगीर अस्पताल में हुई एक स्टडी में पाया गया कि लॉकडाउन के कारण छोटे बच्चों में अर्ली प्यूबर्टी यानी समय से पहले प्यूबर्टी आने के लक्षण देखे गए हैं। शोध में पाया गया कि प्यूबर्टी के मामले 3.6 फीसदी बढ़े हैं। शोधकर्ता इसे लॉकडाउन के कारण होने वाले लाइफस्टाइल में बदलाव और सैनिटाइजर में मौजूद केमिकल के संपर्क में आने से जोड़ा गया है।

8 से 9 साल के बच्चे हुए प्रभावित

पुणे के जहांगीर अस्पताल में हुए शोध के मुताबिक 8 से 9 साल के बच्चों में समय पूर्व यौवन के लक्षण देखे गए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना लॉकडाउन के बाद अस्पताल आए बच्चों के 3053 मामलों में 155 (5.1 फीसदी मामले) अर्ली प्यूबर्टी से जुड़ी सलाह लेने आए। वही अगर कोरोना महामारी से पहले की बात करें तो यह दर सिर्फ 1.4 ही थी।

लड़कियों में ज्यादा प्रभाव

शोध से प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि कोरोना के बाद हुई अर्ली प्यूबर्टी में लड़कों से ज्यादा लड़कियां प्रभावित हुई हैं। लॉकडाउन के बाद दर्ज किए गए 155 मामलों में 146 लड़कियां थी और उससे पहले 59 मामलों में 54 लड़कियां थी। यह आंकड़े संकेत देते हैं कि लड़को की तुलना में लड़कियां अर्ली प्यूबर्टी से ज्यादा प्रभावित हो रही हैं।

क्या है अर्ली प्यूबर्टी

वर्तमान में भी दुनिया की कई ऐसी जगह हैं, जहां पर प्यूबर्टी से संबंधित ज्यादा जानकारी नहीं हैं। दरअसल अर्ली प्यूबर्टी को प्रीकोशियस प्यूबर्टी भी कहा जाता है, जिसमें समय से पहले ही बच्चों में जवानी के लक्षण आने लगते हैं। उदाहरण के लिए बच्चे के समय से पहले ही जननांगों का आकार बढ़ने लगना, आवाज भारी होना, लड़कियों में मासिक धर्म शुरू हो जाना और शरीर पर बाल आना आदि।

किस कारण से होती है अर्ली प्यूबर्टी

प्रीकोशियस प्यूबर्टी के ऐसे कई मामले हैं, जिनके अंदरूनी कारणों का पता नहीं चल पाता है। हालांकि, यह हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से संबंधित हो सकता है। कोई भी ऐसी समस्या होना जो मस्तिष्क में कुछ बदलाव करके हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकती है, वह अर्ली प्यूबर्टी का कारण भी बन सकती है। इसमें आमतौर पर सिर में चोट लगना, मस्तिष्क में ट्यूमर और मस्तिष्क में सूजन आदि शामिल हैं।

जल्द से जल्द जांच कराना है जरूरी

अगर आपके बच्चे में अर्ली प्यूबर्टी से संबंधित कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो जल्द से जल्द उसे डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि शरीर में समय से पहले यौन बदलाव आना कई बार किसी गंभीर अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है। साथ ही अर्ली प्यूबर्टी के कारण बच्चे को भावनात्मक व सामाजिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है, जो उसके जीवन पर असर डालता है।