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मोटापा, तनाव, स्मोकिंग सहित और बहुत से कारण हैं जिनके कारण महिलाओं में अर्ली मीनोपॉज के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसी महिलाओं की हार्ट हेल्थ के लिए यह खतरे की घंटी है। © Shutterstock.
इन दिनों महिलाओं में समय पूर्व रजोनिवृत्ति यानी अर्ली मेनोपॉज के मामले बढ़ रहे हैं। अगर यह आयु 40-45 के बीच है तो यह उनके हृदय स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है। इससे उनमें हार्ट फेल्यिर और हृदय संबंधी अन्य बीमारियों का जोखिम दोगुना हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि अर्ली मेनोपॉज के कारणों को जानकर उनसे बचने की। जानिए क्या है पूरा शोध।
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की क्विंसलैंड यूनिवर्सिटी में हुए शोध में यह विश्लेषण सामने आया है कि जिन महिलाओं की रजोनिवृत्ति 40 वर्ष की उम्र के आसपास होती है, उनमें हृदय स्वास्थ्य के जोखिमोंकी संभावना भी और ज्यादा बढ़ जाती है। शोध को लीड कर रहीं प्रोफेसर गीता मिश्रा का कहना है कि ऐसी महिलाओं को 60 वर्ष से पहले भी अपने हृदय के प्रति सजग होने की जरूरत है। जबकि 50 वर्ष की उम्र के बाद रजोनिवृत्त होने वाली महिलाओं में यह जोखिम कम होता है। शोध लांसेट नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
अभी पिछले दो-एक दशक में ऐसे मामले तेजी से बढ़े हैं, जब किशोरियों में अर्ली प्यूबर्टी हो रही है और महिलाओं में अर्ली मेनोपॉज। इसकी वजह खराब डाइट, खराब जीवनशैली और तनाव को बताया जा रहा है। वहीं महिलाओं में बढ़ती स्मोकिंग और एल्कोहल की लत भी उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रही है। खासतौर से तनाव के कारण महिलाओं का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
उपरोक्त शोध के परिणाम डराने वाले तो हैं, पर इसमें यह सामने नहीं आ पाया कि ऐसा क्यों होता है। इसमें 15 अध्ययनों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। जिसमें 3,00,000 से ज्यादा महिलाएं शामिल थीं। प्राप्त डाटा के आधार पर किए गए विश्लेषण में यह पाया गया कि जिन महिलाओं में सीने में दर्द, हार्ट स्ट्रोक और हार्ट फेल्यिर के मामले 60 वर्ष की उम्र से पहले हुए, उनमें अर्ली मेनोपॉज भी देखा गया था। पर ऐसा क्यों हुआ, इस पर वैज्ञानिकों को अभी और शोध करना है।