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Self Breast Cancer Examination : स्तन कैंसर आज दुनिया भर की महिलाओं में आम हो गया है। स्तन कैंसर के मामले में जितना जल्दी निदान हो जाए, उतना ही इलाज के सफल होने की संभावनवा बढ़ जाती है। खुद जांच करके भी महिलाएं स्तन कैंसर की संभावना का जल्दी पता लगा सकती है। डॉ. पारुल गर्ग, एडिशनल डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ रेडियोलॉजी, जेपी हॉसिप्टल का कहना है कि इसके लिए उन्हें अपने स्तनों में किसी भी तरह की गांठ या असामान्यता पर नज़र रखनी चाहिए। यह तकनीक बेहद आसान है, और कोई भी महिला घर पर ही इसे कर सकती है।
1-स्तनों की खुद जांच करने के लिए शीशे के सामने खड़ी हो जाएं और ध्यान से अपने स्तनों को देखें। देखेंकि कहीं स्तन के साइज़, शेप या कलर में कोई बदलाव तो नहीं हो रहा है। इसके अलावा निप्पल्स में कोई बदलाव या किसी तरह का डिस्चार्ज तो नहीं होता है। दोनों स्तनों में किसी भी बदलाव पर ध्यान दें।
2-इसके बाद अपनी अंगुलियों से स्तनों को दबा कर देखें कि इनमें किसी तरह को गांठ या कोई बदलाव तो नहीं। स्तन को चार हिस्सों में बांटें और हर हिस्से को अलग-अलग महसूस करें। स्तन के टिश्यूज़ को दबाने के लिए अंगुलियों के चपटे सिरों का उपयोग करें, अंगुलियों को गोल-गोल घुमाएं। बगलों के आस-पास भी ध्यान दें।
3-आप यह जांच खड़ी होकर या बैठकर कर सकती हैं। इससे आपको वो गांठ भी महसूस हो जाएगी जो लेटी हुई स्थिति में महसूस नहीं होती है। एक बाजू को अपने सिर के पीछे रखें फिर दूसरे हाथ से स्तनों को छू कर देखें कि इसमें कोई गांठ या बदलाव तो नहीं।
4-अगर स्तनों में कोई बदलाव दिखाई देता है, तो ज़रूरी नहीं कि यह हमेशा कैंसर ही हो। बहुत बार स्तनों में बनायन गांठ भी हो सकती है जैसे फाइब्रोसिस्टिक बदलाव, सिस्ट या इन्फेक्शन भी हो सकता है। हालांकि कोई भी बदलाव दिखने पर आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉ. पारुल गर्ग कहती हैं कि स्तनों की खुद जांच करके, स्तन कैंसर का जल्दी निदान हो सकता है। इससे इलाज के सफल होने की संभावना बढ़ती है। अगर स्तन कैंसर का निदानजल्द हो जाए, तब गांठ छोटी होती है और आमतौर पर शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलती। यानि ऐसे में इलाज के विकल्प ज़्यादा होते हैं और मरीज़ के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि यहां इस बात पर भी ध्यान देना ज़रूरी है कि स्तनों की खुद जांच करना, मैमोग्राफी का विकल्प नहीं है। मैमोग्राफी एक इमेजिंग टेस्ट है जिसमें स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए लो डोज़ एक्स-रे का उपयोग किया जाता है। मैमोग्राफी के द्वारा गांठ महसूस होने से पहले ही स्तन कैंसर का निदान हो जाता है। ऐसे में यह स्तन कैंसर के जल्दी निदान का महत्वपूर्ण तरीका है। 40 साल की उम्र के बाद सभी महिलाओं को नियमित रूप से मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है।
कुल मिलाकर, स्तन कैंसर एक गंभीर रोग है, और समय पर निदान के द्वारा इसका सफल इलाज संभव है। स्तनों की खुद जांच करना आसान तरीका है और हर महिला अपने स्तनों में होने वाले बदलावों या गांठ पर निगरानी रख सकती है। इसलिए हर महिला को महीने में एक बार अपने स्तनों की खुद जांच करनी चाहिए और कोई भी बदलाव आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। याद रखें, कैंसर का जल्द निदान आपकी ज़िंदगी को बचा सकता है। सभी महिलाओं को स्तनों की खुद जांच के बारे में जागरुक होना चाहिए।