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कैंसर का कारण हो सकती है ई-सिगरेट, भाप में मिले कार्सिनोजेन धातुकण

साल 2013 में प्रचलन में आने के बाद से टैंक-स्टाइल इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के एरोसोल या वाष्प में लेड, निकल, आयरन और कॉपर जैसी कार्सिनोजेन धातुओं का सांद्रण बढ़ा है।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : September 28, 2019 7:06 PM IST

ई सिगरेट स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ज्‍यादा हानिकारक (E-cigarettes health hazards) है। अभी तक यह माना जा रहा था कि ये सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है। पर अभी हुए एक ताजा शोध में यह बात सामने आई है कि ई सिगरेट से कैंसर भी हो सकता है। इसकी भाप में कैंसर बढ़ाने वाले तत्‍व कार्सिनोजेन की मौजूदगी पाई गई है। इनमें भी एक खास तरह का डिजाइन ज्‍यादा कैंसर कारक पाया गया है।

सावधान करती है ये नई जानकारी 

अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि साल 2013 में प्रचलन में आने के बाद से टैंक-स्टाइल इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के एरोसोल या वाष्प में लेड, निकल, आयरन और कॉपर जैसी कार्सिनोजेन धातुओं का सांद्रण बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में बैटरी, एटॉमिजिंग यूनिट और फ्लूइड होता है, जिसे फिर से भरा जा सकता है। यह अब नए टैंक-स्टाइल डिजाइन में आता है, जिसमें अधिक दमदार बैटरियां होने के साथ-साथ रिफिल फ्लूइड जमा रखने के लिए अधिक क्षमता वाली टंकी बनी होती है।

टैंक स्‍टाइल  ई सिगरेट है ज्‍यादा खतरनाक (E-cigarettes health hazards)

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय रिवरसाइड के शोधकर्ताओं ने कहा कि नए स्टाइल में प्रयोग में लाए जाने वाली हाई-पॉवर की बैटरियां और एटोमाइजर मेटल कंसंट्रेशन को बढ़ा सकता है, जो एरोसोल में ट्रांसफर हो जाता है। एक पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता मोनिक विलियम्स के अनुसार, "टैंक स्टाइल ई-सिगरेट हाई वोल्टेज और पॉवर पर काम करती है। इस कारण एरोसोल में लेड, निकल, आयरन और कॉपर जैसी कार्सिनोजेन धातुओं की कंसंट्रेशन में वृद्धि होती है।"

क्‍या हैं कार्सिनोजेन (know about carcinogen metal)

एक कार्सिनोजन किसी भी पदार्थ रेडियोन्यूक्लाइड या विकिरण है जो कैंसर के विकसित होने में मदद करता है। मानव शरीर में यह जीनोम को नुकसान पहुंचाने के साथ ही अन्‍य क्रियाओं की बाधित करता है। इसका उत्‍सर्जन आमतौर पर अल्‍फा और गामा किरणों के कारण होता है। पर कुछ ऐसे तत्‍व भी हैं जो हमारे आसपास ही है और कार्सिनोजन का निर्माण करते हैं। इनमें तंबाकू, डाइऑक्सिन और एस्‍बेस्‍टोस शामिल है। ये ट्यूमर और कैंसर के गठन में सहायक का काम करते हैं।

मानव स्‍वास्‍थ्‍य के लिए घातक है कार्सिनोजेन 

रेडियोएक्टिव और गैर रेडियोएक्टिव दोनों ही प्रकार के कार्सिनोजेन मानव स्‍वास्‍थ्‍य के लिए घातक हैं। यह मल्‍टीपल ऑर्गेन फेलियर का भी कारण बन सकता है। जबकि सबसे ज्‍यादा जोखिम ट्यूमर और कैंसर के होने का होता है। यह कोशिकाओं की सामान्‍य प्रक्रिया को बाधित करता है। जिससे वे टूटने की बजाए बढ़ती चली जाती हैं।

भारत में हो चुकी है बैन

ई सिगरेट से होने वाले नुकसान के कारण है अभी हाल ही में इसका आयात और बिक्री पर बैन लगा दिया गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर सख्‍त जुर्माने और सजा का विधान है। पिछले कुछ वर्ष से देखने में आया कि ई सिगरेट युवाओं के बीच खासी लोकप्रिय होती जा रही थी। जबकि इसके दुष्‍प्रभाव बहुत ज्‍यादा हैं। इसी को देखते हुए भारत में ई सिगरेट के आयात और बिक्री में दोषी पाए जाने पर एक लाख से पांच लाख तक का जुर्माना रखा गया है।