
Also Read
धुआं रहित, दुर्गंध रहित और कई फ्लेवर्स का लालच देकर ई सिगरेट इंडस्ट्री युवाओं को इस ओर आकर्षित कर रही है। पर यह सेहत के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक है। ©Shutterstock.
ई सिगरेट के नुकसान पर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। पिछले सप्ताह हुई ग्लोबल फोरम ऑन निकोटीन (The Global Forum on Nicotine) की कांन्फ्रेंस में शामिल 600 प्रतिनिधियों ने आने वाली पीढ़ी के लिए ई सिगरेट के नुकसान पर चर्चा की। बरसों से दुनिया भर धूम्रपान यानी स्मोकिंग को बैन करने के अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों पर ई सिगरेट की आमद ने पानी फेर दिया है। इसे सिगरेट छोड़ने का सशक्त माध्यम बताकर ई सिगरेट इंडस्ट्री ने इसे उन युवाओं और किशोरों के बीच भी पहुंचा दिया है जो सिगरेट नहीं पीते थे। जबकि ई सिगरेट स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक है।
आम सहमति यह है कि ई-सिगरेट, सिगरेट से लगभग 95% कम हानिकारक है। लेकिन इसे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। ये एक सिगरेट पीने वाले को तंबाकू कंपनियों के 600 घातक रसायनों से बचाती है। सिगरेट पीने वाले बहुत से लोग ई सिगरेट की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। पर ई-सिगरेट की तरफ स्विच करने से पहले आपको ये जरूरी बातें जान लेनी चाहिए।
इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (एंडस) बैटरी संचालित उपकरण होते हैं, जो शरीर में निकोटिन पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग करते हैं। इसमें सबसे ज़्यादा यूज़ होने वाला उपकरण ई-सिगरेट है। ©Shutterstock.
इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (एंडस) बैटरी संचालित उपकरण होते हैं, जो शरीर में निकोटिन पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग करते हैं। इसमें सबसे ज़्यादा यूज़ होने वाला उपकरण ई-सिगरेट है। ई-सिगरेट अर्थात इलेक्ट्रॉनिक-सिगरेट। इसे बाहर से सिगरेट के आकर का ही बनाया जाता है। इसके अंत में एक एलईडी बल्ब लगाया जाता है, जिसकी ज़रूरत नहीं है, लेकिन कश लगाने पर जब ये जलता है तो लगता है कि सिगरेट का तंबाकू जल रहा है। अंदर लिक्विड निकोटिन की कार्टेज़ होती है, जिसके खत्म हो जाने पर आप नई कार्टेज़ खरीद सकते हैं। कुछ यूज़-एंड-थ्रो ई-सिगरेट्स भी उपलब्ध होती हैं, जिनमें कार्टेज़ नहीं बदलना पड़ता।
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का आविष्कार चीनी फार्मासिस्ट हॉन लिक ने किया था। उसने 2003 में डिवाइस को पेटेंट करवा लिए था और 2004 में इसे बाजार में पेश किया था। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में निकोटीन लिक्विड जलता नहीं इसलिए इससे धुआं नहीं बनता। वो गर्म होकर भाप बनाता है। इसलिए इसे पीने वाला भाप खींचता है न कि धुआं।
इनमें और सामान्य सिगरेट्स में सबसे मुख्य अंतर ये होता है कि ई-सिगरेट्स में तंबाकू नहीं होता।
इनमें और सामान्य सिगरेट्स में सबसे मुख्य अंतर ये होता है कि ई-सिगरेट्स में तंबाकू नहीं होता। यानी लॉजिकल है कि ई-सिगरेट्स से आपको निकोटिन से होने वाले तो सारे नुकसान होंगे, लेकिन तंबाकू से होने वाले नुकसान नहीं होंगे। एंडस और ई-सिगरेट को अक्सर धूम्रपान छोड़ने या तम्बाकू के स्वस्थ विकल्प के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है। बेशक इनमें सिगरेट में पाए जाने वाले ‘टार’ जैसे जहरीले बाई-प्रोडक्ट्स नहीं होते, लेकिन इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं हैं कि ई-सिगरेट धूम्रपान छुड़ावाने में लाभदायक है।
जिस तरह ‘मेरियुआना’ को हानिरहित बताने वाले लोग भी ये ज़रूर मानते हैं कि ये बाकी ड्रग्स का एंट्री गेट होता है, वैसा ही ई-सिगरेट्स के मामले में भी है। जो सिगरेट नहीं पीते हैं उन्हें भी ई-सिगरेट ‘कूल’ लगती है। विभिन्न सर्वे से पता चलता है कि सिगरेट से ई-सिगरेट में स्विच करने वाले कम हैं और ई-सिगरेट से अपने धूम्रपान का सफ़र शुरू करने वाले लोग अधिक। ई-सिगरेट के हज़ारों फ्लेवर मार्केट में उपलब्ध हैं, जो सिगरेट छुड़ाने के लिए नहीं उसे शुरू करने के लिए प्रेरित करते हैं।
ई-सिगरेट में केवल निकोटिन भर ही नहीं होता है। इसमें कैंसरपैदा करने वाले एजेंट भी होते हैं, जैसे फॉर्मेडिहाइड। निकोटीन दिल, जिगर, गुर्दे कमोबेश सबके लिए ही नुकसानदायक है। इस सब के चलते सिंगापुर, सेशल्स और ब्राज़ील जैसे कई देशों में ऑलरेडी ई-सिगरेट बैन है। कनाडा और यूएस जैसे कुछ विकसित देश भी या तो इस पर कड़ी नज़र रखते हैं या इस पर ढेरों कानूनी नियम बनाकर कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं।