
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: Dr. Gautam Modi
धूल मिट्टी के कणों से एलर्जी होना बहुत ही आम बात है।
धूल से होने वाली एलर्जी (Dust Allergy) आज के समय की सबसे आम हेल्थ प्रॉब्लम बन चुकी है। खास बात ये है कि धूल से होने वाली एलर्जी से ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं। घर से बाहर निकलते हैं और सड़क पर कोई झाड़ू लगाते हुए मिल जाए तो धूल- मिट्टी के संपर्क में आते ही खांसी और छींक निकलने लगती है। धूल से होने वाली एलर्जी बेशक से आम हो, लेकिन इसको लेकर बहुत सारी गलत धारणाएं लोगों के दिमाग में हैं। भारत में आज भी ज्यादातर लोग मानते हैं कि उन्हें सिर्फ दिखाई देने वाली धूल या प्रदूषण ही एलर्जी होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि घर के अंदर मौजूद कई सूक्ष्म एलर्जन ऐसे होते हैं, जिन्हें आंखों से देखा भी नहीं जा सकता और वही एलर्जी की सबसे बड़ी वजह बनते हैं। पटना स्थित मोदी एलर्जी क्लिनिक के कंसल्टेंट एलर्जिस्ट डॉ. गौतम मोदी बताते हैं कि इस तरह की एलर्जी को मेडिकल भाषा में डस्ट माइट्स कहा जाता है।
डॉ. गौतम मोदी के अनुसार, धूल से होने वाली एलर्जी का सबसे बड़ा कारण हाउस डस्ट माइट्स (House Dust Mites) हैं। ये बेहद सूक्ष्म जीव होते हैं, जो हमारी त्वचा से झड़ने वाली मृत कोशिकाओं पर लंबे समय तक जिंदा रहते हैं। घर की बात करें तो डस्ट माइट्स मुख्य रूप से गद्दों, तकियों, कालीनों, पर्दों, सोफों और मुलायम खिलौनों में पाए जाते हैं। इतने छोटे होते हैं कि इन्हें सामान्य आंखों से नहीं देखा जा सकता। इन्हें देखने के लिए खास प्रकार के स्नकैनर की जरूरत होती है।
धूल से एलर्जी की परेशानी घर के पर्दे और चादरों से भी हो सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि उन्हें डस्ट से एलर्जी सिर्फ बाहरी धूल और मिट्टी से हो रही है। लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। कई बार घर के गद्दों, तकियों और फर्नीचर में मौजूद डस्ट माइट्स एलर्जी का कारण बने रहते हैं।
भारत में डस्ट एलर्जी को लेकर एक बड़ी धारणा यह भी है कि यह फूलों के कणों से होती है। लेकिन हर व्यक्ति हर फूल से डस्ट एलर्जी नहीं हो सकती है। ज्यादातर सजावटी फूलों का पराग भारी होता है और हवा में ज्यादा दूर तक नहीं फैलता। जबकि घास, खरपतवार हवा में आसानी से फैलते हैं और एलर्जी का कारण बनते हैं।
कई लोगों को लगता है कि उन्हें डस्ट एलर्जी की परेशानी सिर्फ मौसम बदलने पर होती है। डॉ. गौतम कहते हैं यह धारण बिल्कुल गलत है। परागकण से होने वाली एलर्जी मौसम के अनुसार बदल सकती है, लेकिन डस्ट माइट्स की एलर्जी हर मौसम में एक जैसी ही होती है।
डॉक्टर बताते हैं कि डस्ट एलर्जी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग- अलग होते हैं। डस्ट एलर्जी के सामान्य लक्षणों में शामिल हैः
डॉक्टर बताते हैं कि डस्ट एलर्जी के लक्षणों का इलाज समय पर न किया जाए तो यह अस्थमा का रूप ले सकता है और आपको गंभीर रूप से बीमार कर सकता है।
डस्ट एलर्जी से बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाएं।
डस्ट एलर्जी को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियों से इसे थोड़ा बहुत कंट्रोल किया जा सकता है। आइए आगे जानते हैं इसके बारे में-
Disclaimer: डस्ट से एलर्जी होना बहुत ही आम बात है। लेकिन इसका समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी है। समय पर इलाज न करवाया गया तो डस्ट एलर्जी गंभीर हो सकती है और आपको नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए समय रहते डस्ट एलर्जी को पहचाने और इसका इलाज करवाएं।