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ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी: जानिए क्या है बच्चों में होने वाली यह दुर्लभ बीमारी

Duchenne Muscular Dystrophy in Hindi: ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक तरह का दुर्लभ डिसऑर्डर है जिसमें व्यक्ति की मसल्स में बदलाव आने लगता है और शरीर में पाए जाने वाले डिस्ट्रोफिन नाम के प्रोटीन में बदलाव देखने को मिलता है।

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Written By: Atul Modi | Published : December 31, 2022 11:43 AM IST

ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Duchenne Muscular Dystrophy) एक तरह का दुर्लभ डिसऑर्डर होता है जो मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का ही एक प्रकार होता है और इसका फिलहाल में कोई इलाज मौजूद भी नहीं है। जॉन हापकिंस मेडिसिन के अनुसार, यह बीमारी लड़कों को ज्यादा प्रभावित करती है और नए पैदा होने वाले 5000 बच्चों में 3500 लड़कों को यह स्थिति देखने को मिल सकती है। इसके अलावा अधिकतर यह बीमारी किसी और अन्य ग्रुप को इतना ज्यादा प्रभावित नहीं करती। जानिए ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी क्या होती है, इसके क्या लक्षण और कारण है, साथ ही जानेंगे इसके उपचार के बारे में।

ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी क्या है - What Is Duchenne Muscular Dystrophy in Hindi?

यह एक तरह का जेनेटिक डिसऑर्डर होता है, जिसमें मसल्स डीजनरेशन बढ़ने लगता है और शरीर में पाए जाने वाले डिस्ट्रोफिन नाम के एक प्रोटीन में बदलाव आने के कारण शरीर में कमजोरी होने लगती है। आमतौर पर यह प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों की कोशिकाओं को दुरुस्त रखता है। यह रोग भी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का ही एक प्रकार होता है। इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। यह स्थिति ज्यादातर 2 से 3 साल के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है। हालांकि इसके कुछ मामले महिलाओं में भी देखने को मिले हैं लेकिन वह पुरुषों के मुकाबले काफी कम है।

ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के क्या लक्षण हैं?

इस स्थिति का सबसे ज्यादा आम लक्षण मस्कुलर वीकनेस है। इस स्थिति में पेट की साइड होने वाली मसल्स को ज्यादा दिक्कत होती है। आमतौर पर यह देखने को मिलता है कि पैर और शरीर का निचला हिस्सा ही इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होता है और शरीर का ऊपरी हिस्सा इतना ज्यादा प्रभावित नहीं होता। इस स्थिति से जो बच्चा प्रभावित होता है उसको कूदने, भागने आदि जैसी शारीरिक गतिविधि करने में मुश्किल महसूस होती है। ऐसे बच्चों को चलने में भी तकलीफ होती है और वह धीरे धीरे चलते हैं। जैसे-जैसे व्यक्ति को हृदय और रेस्पिरेटरी मसल्स में दिक्कत होना शुरू हो जाती है तो यह लक्षण और भी गंभीर हो जाते हैं। कुछ केसों में तो यह लक्षण आगे चलकर पलमोनरी फंक्शन इंपेयरमेंट का कारण बन जाते हैं।

ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का कारण क्या है?

जब शरीर के जीन शरीर में डिस्ट्रोफिन नाम का प्रोटीन बनाने में असमर्थ हो जाते हैं तभी यह दिक्कत होना शुरु हो जाती है। डिस्ट्रोफाइन ऐसा प्रोटीन होता है जो शरीर में मांसपेशियों की कोशिकाओं में स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी बनाए रखने का काम करता है। यह स्थिति कुछ लोगों को उनके मां बाप से मिलती है तो कुछ लोगों को जन्म से ही हो जाती है। इस स्थिति की कैरियर महिला होती है और उसे इस बात का पता नही चल पाता है की उसका बच्चा प्रभावित हो जाता है।

ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का इलाज

वर्तमान में इस बीमारी का कोई इलाज संभव नहीं है और जिन बच्चों को बचपन में यह स्थिति हो जाती है वह केवल अपनी युवा अवस्था तक ही मुश्किल तक जीवित रह पाते हैं। लेकिन तकनीक में तरक्की होने की वजह से अब बच्चों के जीवन की उम्र को भी बढ़ाया जा सकता है और कुछ बच्चे तो काफी समय तक इस स्थिति के साथ जीवित रह सकते हैं। फिलहाल 30 और 40 की उम्र तक इसमें जीवित रहना अब काफी आम हो गया है।

इस तरह के जेनेटिक और दुर्लभ डिसऑर्डर की स्थिति में आपके हाथ में कुछ नहीं होता, इसलिए आप को इस बीमारी के इलाज को और डॉक्टर की राय को गंभीरता से लेना चाहिए।