बच्चों को क्यों होती है ड्राई आई की परेशानी? जानें कारण, लक्षण और इलाज 

Dry Eyes in Kids:  बच्चों में ड्राई आई की परेशानी होने पर वह बार-बार अपनी आंखों को मलते हैं। ऐसे में अगर आपके बच्चे इस तरह की गतिविधि कर रहे हैं तो तुरंत उनका आई टेस्ट कराएं। ताकि उनके ड्राई आई की परेशानी को समय पर ठीक किया जा सके। 

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Written By: Kishori Mishra | Published : December 30, 2022 1:21 PM IST

Dry Eyes in Kids: सर्दियों में ड्राई आई की परेशानी होना काफी सामान्य है। लेकिन इस परेशानी में काफी ज्यादा असहज महसूस होता है। बड़ों को अगर इस तरह की परेशानी हो तो उन्हें समझ आ जाता है, लेकिन बच्चों को इस तरह की परेशानी होने पर उन्हें काफी ज्यादा तकलीफ का सामना करना पड़ता है। ऐसे में माता-पिता को उन पर ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर आपके बच्चों को ड्राई आई की परेशानी हो गई है, तो इस स्थिति में आंखों के आसपास सूजन जैसा महसूस हो सकता है। 

ड्राई आई सिंड्रोम की परेशानी होने पर अक्सर सुबह के समय आंखों में काफी ज्यादा चुभन, किरकिरा और सनसनी जैसा महसूस होता है, जिसकी वजह से पूरा दिन खराब हो सकता है। बच्चों को इस तरह की परेशानी उनको धुंधला नजर आ सकता है। हालांकि, ड्राई आई की परेशानी कुछ ही समय के लिए होती हैं। यह स्थाई रूप से बच्चों को प्रभावित नहीं करती हैं। 

ड्राई आई की परेशानी कई कारणों से होती हैं। इन कारणों में मौसम में नमी की कमी, धुआं, प्रदूषण, एलर्जी, कॉन्टैक्ट लेंस इत्यादि हो सकता है। इसकी वजह से आंखों में जलन और खुजली होने लगता है। अगर आपके बच्चों को इस तरह की परेशानी हो रही है तो इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि बच्चों की आंखों को सुरक्षित रखा जा सके। आज हम आपको इस लेख में बच्चों को ड्राई आई की परेशानी के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में विस्तार से बताएंगे। 

क्या होता है ड्राई आई सिंड्रोम? - What is Dry Eye Syndrome in Hindi

ड्राई आई सिंड्रोम आंखों से जुड़ी एक गंभीर परेशानी है। यह परेशानी आंखों तब होती है, जब आंखों को पर्याप्त रूप से चिकनाई नहीं मिल पाती। इसके कारण आंखों में पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बन पाते हैं। साथ ही आंखों से आंसू जल्दी सूख जाते हैं। यह आंखों की गुणवत्ता के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। 

बच्चों को क्यों होती है ड्राई आई की परेशानी? - What causes dry eyes in children in Hindi

बच्चों को ड्राई आई की परेशानी कई दैनिक गतिविधियों के कारण हो सकती है, जिसमें लंबे समय तक पढ़ना, कंप्यूटर का लगातार कई घंटों तक इस्तेमाल करना, खेलना इत्यादि हो सकता है। पढ़ते या फिर किसी भी कार्य को करते समय जब बच्चे लगातार एक ही चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जो इस दौरान उनकी आंखों में खुजली, जलन, चिड़चिड़ापन जैसी परेशानी होने लगती है। इसके साथ ही बच्चों को ड्राई आई सिंड्रोम होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-

  • गंभीर एलर्जी, आक्रामक एंटीहिस्टामाइन उपयोग के कारण बच्चों की आंखें ड्राई हो सकती हैं। 
  • कुछ बच्चे कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, जिसकी वजह से उन्हें ड्राई आई सिंड्रोम हो सकता है।
  • कभी-कभी कंजक्टिवाइटिस (पिंक आई) की परेशानी के कारण बच्चों को ड्राई आई की समस्या हो सकती है। 
  • कुछ बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण उन्हें ड्राई आई की परेशानी हो सकती है। 
  • आधुनिक समय में बच्चे काफी ज्यादा स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी वजह से उन्हें ड्राई आई की परेशानी हो सकती है। 

बच्चों में ड्राई आई की परेशानी के लक्षण क्या हैं? - What are the various symptoms of dry eyes in kids in Hindi

अधिकतर बच्चे आंखों से जुड़ी परेशानी होने पर उसे सही तरीके से बयां नहीं कर पाते हैं। अगर उन्हें आंखों से जुड़ी किसी तरह की परेशानी होती है, तो वजह अधिकतर समय अपनी आंखों को मसलते रहते हैं। ऐसे में अगर आपका बच्चा इस तरह का व्यवहार करे, तो उन पर आपको ध्यान देने की जरूरत है। ताकि उनकी आंखों को सुरक्षित रखा जा सके। बच्चों में ड्राई आई सिंड्रोम की परेशानी होने पर कुछ सामान्य लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे-

  • बार-बार पलकों को झपकना
  • आंखों के चारों ओर लालिमा नजर आना
  • लगातार आंखों को मलना
  • रोशनी अधिक होने पर उससे दूरी बनाना
  • आंखों के अंदर और आसपास चुभन या जलन जैसा महसूस होने की शिकायत करना। 
  • आंखों में धुंधलापन महसूस होना।
  • पढ़ने में कठिनाई
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • आंखों में खुजली होना। 

घर पर अपने बच्चों की ड्राई आई परेशानी का कैसे करें इलाज?- How to treat your children dry eye at home

बच्चों को ड्राई आई की परेशानी होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। डॉक्टर इसके लक्षणों को कम करने के लिए आर्टिफिशियल टियर्स का इस्तेमाल करने की सलाह दे सकते हैं। इसके साथ ही ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपचार का भी सहारा लिया जा सकता है। साथ ही ड्राई आई सिंड्रोम की परेशानी से बचने के तरीके अपनाना जरूरी है। आइए जानते हैं इस बारे में-

1. आंखों में जलन और खुजली पैदा करने वाली चीजें जैसे- धुएं, प्रदूषण, धूल इत्यादि से दूर रहें। 

2.  बच्चों को धूप में जाने से पहले चश्मा पहनाएं। इसके साथ ही सर्दियों में उनके सिर को अच्छी तरह से ढक कर रखें। धूल, हवा, गंदगी, धूप इत्यादि से बचने के लिए उन्हें टोपी या छाते का उपयोग करने के लिए कहें। 

3.  सर्दियों में बच्चों के आसपास या फिर सोने वाले बिस्तर के पास ह्यूमिडिफायर लगाएं। इसके साथ ही  ह्यूमिडिफायर मशीन की समय-समय पर अच्छी तरह से सफाई करें। 

4.  ध्यान रखें कि सोते समय बच्चों के आसपास पंखा न चलाएं। पंखे की हवा अधिक होने की वजह से उनकी आंखों में परेशानी हो सकती है। 

5.  अगर आपका बच्चा सामान्य रूप से कॉन्टैक्ट लेंस पहनता है, तो अपने बच्चे की आंखों में समय-समय पर रीवेटिंग ड्रॉप्स डालें। इसके साथ ही कोशिश करें कि आपका बच्चा कॉन्टैक्ट लेंस के बजाय चश्मा पहने। ऐसा करने से उनकी आंखों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

6.  बच्चों को समय-समय पर दे दवाईयां। ध्यान रखें कि आपका बच्चा समय पर दवाइयां ले रहा हो। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर आपके बच्चे को दवा से किसी भी तरह की परेशानी होतो उन्हें तुरंत आई डिजीज एक्सपर्ट के पास ले जाएं, इससे उनकी आंखों में बढ़ने वाली परेशानी को कम किया जा सकता है। 

7.  अधिकतर डॉक्टर बच्चों को ड्राई आई की परेशानी होने पर दिन में कम से कम 4 बार आर्टिफिशियल टियर्स का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। 

8.अगर आपके बच्चे को दिन में 4 बार से अधिक आर्टिफिशियल टियर्स की जरूरत महसूस होती है, तो इस स्थिति में डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अपनी मर्जी से दवा की डोज न बढ़ाएं। ऐसा करने से उनके आंखों की परेशानी बढ़ सकती है। 

9. इसके साथ ही बच्चों के शरीर को हाइड्रेट रखें। समय-समय पर उन्हें पानी पिलाएं। साथ ही जलदार फल, सब्जियों का सेवन कराएं।

10. रोजाना सुबह बच्चों की आंखों की लगभग 5 मिनट तक गर्म सिंकाई करें। इसके बाद कुछ मिनटों तक पलकों की मसाज करें। ऐसा करने से आपके बच्चों की आंखों की प्राकृतिक नमी को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। 

ध्यान रखें कि बच्चों को ड्राई आई सिंड्रोम की परेशानी होने पर उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं, ताकि आंखों में गंभीर परेशानी को कम किया जा सके। साथ ही अपने बच्चों की आंखों पर ध्यान दें। उनकी हर एक छोटी से छोटी गतिविधि पर अपनी नजर बनाएं रखें, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।

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