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Tuberculosis Symptoms in kids: टीबी या ट्यूबरक्लोसिस एक गम्भीर और संक्रामक बीमारी है जो लंग्स पर सीधे हमला करती है। धीरे-धीरे टीबी की बीमारी पेट, रीढ़ की हड्डी और शरीर के अन्य भागों तक भी फैल सकती है। टीबी की शुरुआत माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक संक्रमण से होती है। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ते जाता है पीड़ित व्यक्ति की तकलीफें भी बढ़ने लगती हैं। टीबी का बैक्टीरिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैल सकता है। खांसने या छींकने से हवा में फैली पानी की बूंदों (droplets) के साथ टीबी के बैक्टेरिया श्वसन मार्ग में प्रवेश करते हैं और ये अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।
वहीं, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में टीबी होने का रिस्क भी अधिक होता है। इसीलिए बुजुर्गों और बच्चों में भी टीबी की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि ये दोनों ही समूह शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं और इनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है।
टीबी से संक्रमित बच्चे की उम्र के आधार पर बीमारी के लक्षण (symptoms of tb in children) अलग हो सकते हैं। टीबी का सबसे कॉमन लक्षण बुखार, बच्चे की ग्रोथ में रूकावट आने, अचानक से वजन कम होने जैसे लक्षण शामिल हैं। इसके अलावा ये लक्षण भी दिखायी दे सकते हैं-
टीबी के उपचार से जुड़ी जो गाइडलाइंस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने जारी कीं उनके अनुसार बच्चों में टीबी का इलाज किसी एक्सपर्ट पीडियाट्रिक (और जिसे टीबी के इलाज का अनुभव हो) की देखरेख में करना चाहिए। शिशुओं, बहुत छोटे बच्चों और टीनएजर बच्चों में उनकी उम्र के अनुसार इलाज मिलना और ट्रीटमेंट पूरा करना आवश्यक है।
सीडी के अनुसार बच्चों में टीबी की बीमारी का इलाज करने के लिए 4 महीने, 6 महीने और 9 महीने के कोर्स के आधार पर एंटी-टीबी दवाओं से किया जाना चाहिए।
वहीं, 12 साल से छोटे बच्चों और जिनका वजन 40 किग्रा से कम है उन बच्चों को 4 महीने वाले रिफैपेंटाइन-मोक्सीफ्लोक्सासिन टीबी ट्रीटमेंट प्रोग्राम की सलाह नहीं देनी चाहिए।
टीबी की दवाएं समय से लेने से यह बीमारी तेजी से ठीक हो सकती है। वहीं, दवाओं के सेवन से जुड़ी लापरवाहीके कारण टीबी का इलाज महंगा और मुश्किल भी हो सकता है।