Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
-
- हिंदी
Breast Cancer Se Jude Myth: ब्रेस्ट कैंसर भारत समेत दुनिया में महिलाओं में सबसे ज्यादा होने वाले कैंसरों में से एक है और इसके मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसलिए इसके प्रति जानकारी होना जरूरी है, इसके प्रति जो शर्म समाज में बनी हुई है उसे खत्म करना जरूरी है और स्तन कैंसर के बारे में जो भी गलत धारणाएं व गलत जानकारी फैली हुई हैं, उन्हें खत्म करना भी जरूरी है। फैली हुई इन गलत जानकारियां में से एक है कि ब्रा पहनने से भी ब्रेस्ट कैंसर होता है। लेकिन क्या यह सच है? इस लेख में हम एसएसओ अस्पताल की ब्रेस्ट कैंसर सर्जन डॉक्टर निहारिका गराच से इस बारे में जानेंगे।
डॉक्टर निहारिका के अनुसार इसका साधारण और सीधा जवाब ना है, यानी ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता है। ऐसे में इसके बाद सवाल आता है कि अगर ब्रा पहनने से कैंसर नहीं होता है तो यह अफवाह इतनी तेजी से फैल क्यों रही है और इस बारे में साइंस क्या कहता है। डॉक्टर निहारिका ने इस बारे में भी काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जिनके बारे में हम आगे इस लेख में जानेंगे।
डॉक्टर निहारिका ने बताया कि 1990 के आसपास उस समय एक किताब प्रकाशित की गई और उसमें बताया गया कि टाइट ब्रा पहनने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि इससे लिम्फ नोड्स रुक जाते हैं और इस कारण से कई बार ब्रेस्त में हानिकारक विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं। यह अफवाह इसलिए फैल गई क्योंकि लोगों को इसपर विश्वास होने लगा। हालांकि, इस दौरान कई एक्सपर्ट्स व डॉक्टर इससे सहमत नहीं हुए थे। साथ ही में कई अध्ययन भी हुए जिसमें इस तथ्य को नकारा गया।
ब्रा हमेशा ब्रेस्ट को फायदा पहुंचाती है, जरूरी सपोर्ट प्रदान करती है, वहीं इसके प्रति फैलाई जाने वाली अफवाहें पूरी तरह से गलत हैं। अध्ययनों में पूरी तरह से यह साबित किया जा चुका है कि ब्रा पहनने से न तो ब्रेस्ट कैंसर होता है और न ही लिम्फ नोड्स से जुड़ी कोई भी समस्या होती है। हालांकि, ब्रा पहनने या फिर टाइट ब्रा पहनने से कुछ समस्याएं हो सकती है जैसे-
अब आते हैं असली तथ्य पर कि अगर ब्रा से कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता है तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा वे कौन सी चीजें हैं जो बढ़ाती हैं-
बढ़ती उम्र - ब्रेस्ट कैंसर का एक खतरा बढ़ती उम्र भी है, उम्र बढ़ने के साथ-साथ इसका खतरा भी बढ़ने लगता है। खासतौर पर 40 की उम्र के बाद महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा रहता है।
फैमिली हिस्ट्री - यह ब्रेस्ट कैंसर से सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है, अगर परिवार में या खून के रिश्ते जैसे मां या बहन को पहले से ब्रेस्ट कैंसर है, जो जेनेटिक कारणों से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
जेनेटिक कारण - जीन्स में होने वाली म्यूटेशन (असामान्य बदलाव) कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है, BRCA1 और BRCA2 में होने वाले बदलाव इस कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
हार्मोन से जुड़ी गड़बड़ी - महिलाओं में होने वाली हार्मोन से जुड़ी समस्याएं जैसे मेनोपॉज में देरी होना, ज्यादा उम्र होने के बाद गर्भवती होना या फिर किसी कारण से बार-बार हार्मोन थेरेपी लेना भी कई बार कैंसर के खतरे को बढ़ा देती है।
जीवनशैली से जुड़ी कारक - खराब जीवनशैली भी कैंसर का एक कारण हो सकती है खासतौर पर मोटापा, धूम्रपान करना, शराब का सेवन करना और गतिहीन जीवनशैली भी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाती है।
रेडिएशन के संपर्क में आना - किसी समस्या का इलाज कराते समय या फिर किसी अन्य कारण से अगर किसी महिला को छाती वाला हिस्सा रेडिएशन के संपर्क में आता है, तो इससे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा हो सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करने के लिए सबसे पहले सही लाइफस्टाइल का होना जरूरी है। किसी भी बुरी आदत को छोड़ दें और साथ ही साथ नियमित रूप से ब्रेस्ट से जुड़ी जांचे कराते रहें जैसे मोमोग्राम आदि। अगर आपको ब्रेस्ट में किसी तरह की कई असामान्य गांठ, दर्द, सूजन या फिर कोई भी असामान्यता दिखती है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से इस बारे में बात कर लें।
जैसा कि हमने आपको ऊपर भी बताया कि ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस भी जरूरी है। ब्रेस्ट कैंसर के ज्यादातर मामलों का इलाज सफलतापूर्वक किया जा सकता है और यह तभी संभव है, जब देर होने से पहले इसका पता लगाया जा सके।
कैंसर कोई भी हो अगर उसे आखिरी स्टेज में पता लगाया जाता है, तो उसका इलाज करना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है और मरीज के लिए जटिलाएं भी बढ़ जाती हैं। इसलिए ब्रेस्ट से जुड़ी किसी भी असामान्यता का पता लगाना और बिना देरी किए इस बारे में डॉक्टर से बात करना बेहद जरूरी है।
ब्रा पहनने से कैंसर होता है जैसी फालतू अफवाहों पर ध्यान देने की बजाय महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर लेनी चाहिए, ताकि कभी अगर भविष्य में उन्हें या किसी अन्य महिला को यह समस्या महसूस हो तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क किया जा सके। इसके अलावा खुद से ब्रेस्ट कैंसर की जांच करने के भी कुछ तरीके हैं जैसे -
महीने में एक बार खुद से ब्रेस्ट की जांच करना - महिलाओं को हर महीने में एक बार अपनी ब्रेस्ट की खुद से जांच करनी चाहिए, दोनों ब्रेस्ट के आकार, आकृति, रंग और अन्य चीजों की तुलना करनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि यह बराबर हैं।
क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जाम - खुद डांस करने के साथ-साथ 20 से 30 साल की महिलाओं को नियमित रूप से क्लीनिकल जांच भी कराते रहना चाहिए। जिसमें हेल्थ एक्सपर्ट्स स्तन से जुड़ी किसी भी असामान्यता की जांच करेंगे। 20 से 30 साल की उम्र में हर दो या तीन साल में एक बार यह जांच होना जरूरी है। वहीं 40 साल की उम्र के बाद हर 1 साल में एक बार इसकी जांच होना जरूरी है।
मैमोग्राफी: इस तकनीक की मदद से ब्रेस्ट का एक्स रे एग्जाम किया जाता है, जिसकी मदद से ब्रेस्ट के अंदर किसी भी तरह की गांठ या असामान्यता का पता लगाया जा सकता है।
अन्य टेस्ट: इसके अलावा भी अन्य टेस्ट हो सकते हैं जिनकी मदद से ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाया जा सकता है जैसे जेनेटिक काउंसलिंग और फैमिली हिस्ट्री की जांच करना आदि।
ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत स्तन की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि से होती है।
जी नहीं, ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता है।
हां, धूम्रपान किए बिना भी लंग कैंसर होना संभव है। पैसिव स्मोकिंग, वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस, फैमिली हिस्ट्री या कार्यस्थल पर जहरीले पदार्थों का संपर्क भी फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है।
हां , कुछ स्टडीज और रिसर्च के अनुसार, किसी व्यक्ति के परिवार में अगर किसी को पहले कैंसर हो चुका है तो उस व्यक्ति में भी कैंसर होने का रिस्क बढ़ जाता है।