
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
कोरोना महामारी के बाद अब मंकीपॉक्स के फैलने का खतरा बढ़ चुका है। 70 देशों से भी अधिक देशों में फैल चुके मंकीपॉक्स वायरस के दुनियाभर में 20 हजार के करीब मामले हो चुके हैं, जिसे अब हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि, अन्य की देशों की तुलना में भारत की स्थिति अभी तक ठीक है और देश में कुल मामलों की बात करें तो अभी तक 10 मामले पाए गए हैं। इनमें 5 केरल (Monkeypox in kerala) और 5 दिल्ली (Monkeypox in delhi) में मिले हैं। कोरोना की ही तरह मंकीपॉक्स वायरस का डर भी लोगों के मन में बढ़ता जा रहा है और ज्यादा लोग यह जानना चाहते हैं कि यह कैसे फैलता है व इससे बचने का तरीका क्या है। यह वायरस कपड़ों पर कितनी देर रह सकता है और क्या कपड़े धोने से यह हट जाता है। इस लेख में हम आपको इन सभी सवालों की जवाब देने की कोशिश करेंगे, क्योंकि किसी भी बीमारी से बचने के लिए उसे प्रति उपयुक्त जानकारी होना जरूरी है।
सीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार मंकीपॉक्स वायरस कपड़े की सतह पर सक्रिय रह सकता है। वहीं एक अध्ययन में किसी व्यक्ति के मंकीपॉक्स से संक्रमित होने 15 दिन बाद उसके घर से मंकीपॉक्स वायरस पाया गया था। इसलिए यह जानना भी जरूरी है कि मंकीपॉक्स वायरस किन-किन सतहों पर रह सकता है और इससे कैसे हटाया जा सकता है।
मंकीपॉक्स वायरस से दूषित कपड़ों को धोना उन्हें रोगाणुरहित बनाने में काफी प्रभावी हो सकता है। सीडीसी के अनुसार मंकीपॉक्स वायरस से दूषित या संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए गए कपड़ों को अलग से धोना चाहिए और दूसरे लोगों के कपड़ों से दूर रखना चाहिए। कपड़े धोने के लिए सामान्य डिटर्जेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, लॉन्ड्री सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना और भी ज्यादा सुरक्षा प्रदान करता है।
कपड़ों के अलावा भी कई ऐसी सतह हैं, जहां पर मंकीपॉक्स वायरस सक्रिय रह सकता है। अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति इन कपड़ों का इस्तेमाल करता है जैसे रूमाल या तौलिया आदि तो उसे यह संक्रमण हो सकता है। वहीं अगर एक स्वस्थ व्यक्ति मंकीपॉक्स से संक्रमित किसी व्यक्ति या जानवर के संपर्क में आता है, तो उसे भी यह बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।
सीडीसी मंकीपॉक्स वायरस को हटाने के लिए क्लीनर व सैनिटाइजर की जगह डिसइन्फेक्टेंट का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि डिसइन्फेक्टेंट आमतौर पर घरों में इस्तेमाल किए जाने वाले क्लीनर से अलग होते हैं। क्लीनर के मुकाबले डिसइन्फेक्टेंट ज्यादा रोगाणुओं को मारते हैं और सैनिटाइजर रोगाणुओं की संख्या को कम करते हैं।