
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Harish Kumar Verma
inhalers use
आज के समय में भी अधिकांश भारतीय कुछ दवाओं के बारे में यही मानते हैं कि उनकी आदत लग जाती है और इनमें से इनहेलर भी एक है। अगर किसी को सांस से जुड़ी समस्या हो जाती है, तो उसे अक्सर अलग-अलग प्रकार की सलाह देना शुरू कर दिया जाता है और अक्सर यह जरूर कहा जाता है कि इनहेलर लेना शुरु मत करना आदत लग जाएगी। लेकिन क्या इनहेलर की आदत भी लग सकती है? इस बात का जवाब तो डॉक्टर ही दे सकते हैं और डॉ. हरीश कुमार वर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, शारदाकेयर हेल्थसिटी इस पर कई जरूरी सलाह देते हैं। लेकिन अगर आप सीधा जवाब जानना चाहते हैं तो डॉ. वर्मा के अनुसार एक या दो बार इस्तेमाल करने से इनहेलर की लत नहीं लगती है। लेकिन यह अधूरी जानकारी है और पूरी जानकारी आपको इस लेख में आगे मिलेगी।
अगर आपको भी लगता है कि सिर्फ एक या दो बार इस्तेमाल करने से ही इनहेलर का इस्तेमाल करने की आदत लग जाती है, तो ऐसा नहीं होता है। लेकिन इसकी लग कब लगती है और कब इसकी लग लग जाती है आदि के बारे में जानने के लिए आपको पहले इनहेलर को ही समझना होगा। इनहेलर दवा को सीधे फेफड़ों की सांस की नलियों तक पहुंचाता है। डॉक्टर द्वारा दी गई दवा सांस की नलियों की सूजन कम करती है या उन्हें ढीला करती है, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है और सीटी जैसी आवाज भी कम हो जाती है।
यह हो सकता है कि कई बार किसी व्यक्ति को बार-बार इनहेलर की जरूरत पड़ती है और अगर किसी व्यक्ति को इनहेलर की जरूरत बार-बार पड़ रही है, तो इसका मतलब ज्यादातर यह होता है कि उसकी सांस की बीमारी अभी पूरी तरह कंट्रोल में नहीं है, न कि उसे इनहेलर की लत लग गई है। इसलिए लत के डर से इनहेलर लेने से बचना या इलाज में देर करना सही नहीं है। जब डॉक्टर ने इनहेलर लिखकर दिया हो, तो सांस फूलने या व्हीज़िंग होने पर उसका इस्तेमाल करना चाहिए।
हालांकि, इसकी लत इतनी आसानी से नहीं लगती इसका मतलब यह नहीं है कि इसे आप बिना किसी टेंशन के इस्तेमाल कर सकते हैं। एक इनहेलर का उपयोग हमेशा रेस्पिरेटरी स्पेशलिस्ट (सांस की बीमारियों के डॉक्टर) की सलाह के अनुसार ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहें, ताकि आपका इलाज सही तरीके से चलता रहे और किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट होने का खतरा कम हो जाए।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी उद्देश्य केवल केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है, जिसमें यह बताया गया है कि फेफड़ों से जुड़ी कोई बीमारी जब बहुत गंभीर और आखिरी चरणों में आ जाती है तो कई बार मरीज का जीवन बचाने का एक अंतिम रास्ता लंग ट्रांसप्लांट ही रह जाता है। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।